डॉ. इंदु भूषण बाली
वर्तमान समय में समाज में धन एकत्रित करने के लिए कई संगठन, समितियाँ और यहां तक कि बिरादरियाँ तथाकथित लक्की ड्रा (Lucky Draw) का आयोजन करती हैं। इन आयोजनों में लोगों को टिकट बेची जाती हैं और यह वादा किया जाता है कि विजेताओं को कार, मोटर साइकिल, गहने या अन्य महंगे पुरस्कार मिलेंगे। वास्तव में यह मनोरंजन और सामाजिक गतिविधि प्रतीत होती है परन्तु वास्तव में स्वार्थी तत्वों का उक्त कृत्य अवैध, असंवैधानिक और दण्डनीय अपराध है।
लक्की ड्रा और समाज पर प्रभाव :-
लोग बड़े पुरस्कार पाने की लालसा में अपने गहन परिश्रम से अर्जित किए धन की हानि कर देते हैं। विशेषकर अशक्त (गरीब) और मध्यमवर्गीय लोग इसका शिकार बनते हैं। इससे न केवल उनकी आर्थिक हानि होती है बल्कि मानसिक तनाव भी बढ़ता है। इसके अतिरिक्त यह प्रवृत्ति समाज में परिश्रम और सत्यनिष्ठा के मूल्य को कम करती है, क्योंकि लोग बिना परिश्रम धन पाने की आदत में पड़ जाते हैं और अपने ही चतुर पदाधिकारियों के स्वार्थी हाथों से धोखाधड़ी का शिकार हो जाते हैं।
वैधानिक दृष्टि :-
भारत में लॉटरी (Lottery) को नियंत्रित करने के लिए लॉटरी (विनियमन) अधिनियम, 1998 बनाया गया है। इस अधिनियम के अनुसार केवल राज्य सरकार या केंद्र सरकार को ही लॉटरी आयोजित करने का अधिकार है। किसी भी समाज, बिरादरी या संस्था द्वारा बिना अनुमति टिकट बेचकर लक्की ड्रा आयोजित करना स्पष्ट रूप से विधि (कानून) का उल्लंघन है। ऐसा करना न केवल अवैध है बल्कि दण्डणीय भी है। क्योंकि इस पर आयोजकों पर आर्थिक दण्ड लगाते हुए उन्हें सुधारगृह (जेल) में भी भेजा जा सकता है।
विधिक दण्ड और अपराध की गम्भीरता :-
धारा 7 के अनुसार यदि कोई व्यक्ति, संगठन या बिरादरी विशेष सरकार की अनुमति लिए बिना लॉटरी/लक्की ड्रा आयोजित करता है तो उसे दो वर्ष तक कारावास, या ₹10,000 तक का जुर्माना, या दोनों दण्ड एक साथ दिए जा सकते हैं। साथ ही, भारतीय दण्ड संहिता (Indian Penal Code – IPC) की धारा 420 के तहत छल और धोखाधड़ी का प्रावधान लागू होता है। यदि यह आयोजन समूह में किया गया हो, तो आपराधिक षड्यंत्र की धारा 120-बी भी लागू किया जा सकता है।
संवैधानिक आधार :-
भारतीय संविधान का अनुच्छेद 19(6) स्पष्ट करता है कि सरकार जनहित और नैतिकता की रक्षा के लिए नागरिक स्वतंत्रता पर उचित प्रतिबंध लगा सकती है। अनुच्छेद 21 जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता की रक्षा करता है और ठगी, छल-कपट जैसी आपराधिक गतिविधियों से नागरिकों को सुरक्षित रखने का अधिकार देता है। अनुच्छेद 14 समानता का भी अधिकार देता है। अतः लॉटरी और लक्की ड्रा जैसी गतिविधियाँ संविधान की दृष्टि से भी अवैध हैं जो अपराध की श्रेणी में आता है।
समाज और बिरादरी का मूल उत्तरदायित्व :-
कोई भी चरित्रवान एवं लोकप्रिय बिरादरी या समिति यदि समाज हित के लिए धन जुटाना चाहती है तो उसके पास स्मारिका प्रकाशन जैसे अनेक वैधानिक विकल्प हैं। वह दान, सदस्यता शुल्क, सांस्कृतिक, सामाजिक या शिक्षा संबंधी कार्यक्रम आयोजित कर वैधानिक निधि संग्रह (FUND RAISING) द्वारा पारदर्शी रूप से धन एकत्र कर सकती हैं। लेकिन टिकट बेचकर लक्की ड्रा करना न केवल विधि का उल्लंघन है बल्कि समाज की नैतिकता को भी चोट पहुँचाती हैं। इसलिए जागरूक विद्वान नागरिकों और समाज के सत्यनिष्ठ सदस्यों का यह मौलिक कर्तव्य ही नहीं बल्कि अधिकार भी है कि ऐसे चरित्रहीन पदाधिकारियों द्वारा आयोजित आयोजनों का सशक्त विरोध करें और समय रहते प्रशासन को सूचित कर राष्ट्रनिर्माण को प्रथामिकता दें।
न्यायालयों का दृष्टिकोण – सुप्रीम कोर्ट के निर्णय :-
1. सनराइज एसोसिएट्स बनाम भारत संघ, 2006 – सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि लॉटरी टिकट “दावा योग्य अधिकार” (Actionable Claim) हैं, वस्तु (Goods) नहीं।
2. के. अरुमुगम बनाम भारत संघ, 2024 – राज्य द्वारा लॉटरी टिकट बेचना विशेषाधिकार (Privileged Activity) है और इसे सेवा (Service) नहीं माना जाएगा।
3. भारत संघ बनाम फ्यूचर गेमिंग सॉल्यूशन्स प्रा. लि., 2025 – केंद्र सरकार लॉटरी वितरकों पर सेवा कर (Service Tax) नहीं लगा सकती, क्योंकि लॉटरी राज्य सूची (State List) का विषय है।
4. बी.आर. एंटरप्राइजेज बनाम उत्तर प्रदेश राज्य – निजी लॉटरी पर प्रतिबंध लगाना राज्य का अधिकार है।
5. आर.एम.डी.सी. मैसूर बनाम मैसूर राज्य – पुरस्कार प्रतियोगिता अधिनियम (Prize Competitions Act) और राज्य अधिनियमों की वैधता की पुष्टि।
उपरोक्त निर्णयों से स्पष्ट होता है कि बिना अनुमति लॉटरी और लक्की ड्रा दोनों अवैध हैं।
लागू धाराएँ और दण्ड का प्रावधान :-
1. लॉटरी (विनियमन) अधिनियम, 1998 की धारा 7 के अन्तर्गत बिना अनुमति लॉटरी/लक्की ड्रा आयोजित करने पर 2 वर्ष तक कारावास या ₹10,000 तक जुर्माना, या दोनों एक साथ हो सकते हैं। भारतीय दण्ड संहिता (आईपीसी) की धारा 420 में छल और धोखाधड़ी बताती है। इसके अतिरिक्त धारा 120-बी में यदि समूह में किया गया हो तो सामूहिक आपराधिक षड्यंत्र में आता है।
3. भारतीय संविधान :-
अनुच्छेद 19(6) : जनहित में नागरिक स्वतंत्रता पर उचित प्रतिबंध।
अनुच्छेद 21 : जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता की सुरक्षा।
निष्कर्ष
स्पष्ट है कि किसी भी बिरादरी, समाज या संस्था द्वारा टिकट बेचकर लक्की ड्रा आयोजित करना पूर्णतः अवैध और दण्डनीय अपराध है। इसका विरोध करना, जागरूक रहना और प्रशासन को सूचित करना प्रत्येक नागरिक का मौलिक कर्तव्य है अर्थात उसका दायित्व है। केवल पारदर्शी और वैधानिक मार्ग अपनाकर ही समाज में विश्वास, न्याय और नैतिकता की स्थापना सम्भव है। प्रेस कोर काउन्सिल और उसके राष्ट्रभक्त राष्ट्रीय सॅंरक्षक डॉ.इंदु भूषण बाली का आह्वान है कि हम सब मिलकर ऐसे अवैध कार्यों को रोकें और जागरूकता फैलाएँ। ऐसे में यदि कोई संस्था, समिति अथवा बिरादरी यदि भूलवश उक्त लक्की ड्रा पर विचार कर रही है तो उसके आयोजकों को भी परामर्श दिया जाता है वह उक्त अवैध आयोजन का त्याग करें अन्यथा अवैध हथकंडे के लिए हथकड़ी भी लग सकती है। सम्माननीयों जय हिन्द
प्रार्थी
डॉ. इंदु भूषण बाली
प्रेस कोर कॉउन्सिल का
राष्ट्रभक्त राष्ट्रीय सॅंरक्षक,
राष्ट्रपति पद का पूर्व प्रत्याशी, वरिष्ठ लेखक एवं पत्रकार, डाकघर एवं तहसील ज्यौड़ियॉं, जिला (जम्मू) जम्मू और कश्मीर पिनकोड 181202
मोबाइल 7889843859
ईमेल आईडी baliindubhushan@gmail.com


