कटनी। कृषि विज्ञान केंद्र कटनी में राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन कार्यक्रम के अन्तर्गत 22सितंबर से 26 सितंबर तक कृषि विज्ञान केन्द्र कटनी मप्र में पाँच दिवसीय कृषि साखियों हेतु प्राकृतिक खेती पर प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजन किया किया गया है यह कार्यक्रम कृषि विज्ञान केंद्र कटनी के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉक्टर संजय वैशंपायन के मार्ग निर्देशन में एवं इस अवसर पर कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ ए के तोमर डॉ आर.के मिश्रा, डॉ शशि गौर,,डॉ यति राज खरे, डॉ अर्पिता श्रीवास्तव, डॉ आर.पी बैन,डॉ के पी द्विवेदी डॉ संदीप चंद्रवंशी, प्रियंका धुर्वे उपस्थित थे यह कार्यक्रम परियोजना संचालक (आत्मा), किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग, कटनी के सहयोग से चलाया जा रहा है। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ आर एन पटेल उपसंचालक कृषि जिला कटनी एवं परियोजना संचालक आत्मा श्रीमती अरुनिमा सेन एवं सहायक संचालक कृषि सुश्री रजनी चौहान की उपस्थिति में किया और कृषि वैज्ञानिक एवं उपसंचालक कृषि ने अपने उद्बोधन में कहा कि प्राकृतिक खेती आज की आवश्यकता है जिससे माध्यम से अन्धाधुन्ध रसायनों के प्रयोग को कम किया जा सकता है। इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि सहायक संचालक कृषि ने कृषि सखियों से कहा कि कटनी जिले से आप लोगों का चुनाव हुआ यहां से अच्छे ढंग से प्रशिक्षण प्राप्त कर अपने ब्लॉक और गाँव के कृषकों प्राकृतिक खेती के विषय में जानकारी देनी है। आज
प्रशिक्षण मे आसपास के गांव से लगभग 60 महिला एवं पुरूषों की भागीदारी रही है। प्रशिक्षक द्वारा विधिवत जैविक कीटनाशक मे अग्निअस्त्र, नीमास्त्र और जीवामृत बनाने की विधि बताई गई, साथ ही उपयोग विधि पर भी प्रकाश डाला गया है। बताया गया कि अभी खरीफ की फसल मे यदि कोई बीमारी लगती है तो कार्यकर्ताओं की मदद से बीमारी की पहचान कर सम्बंधित दवाई का उपयोग कर सकते है। यह भी बताया गया कि जैविक दवाई किसान स्वयं तैयार कर सकते है या फिर सस्ते दामो मे खरीद सकते है।
= = प्रशिक्षण के उद्देश्य-
किसानों को जैविक खाद एवं कीटनाशकों की तैयारी की प्रक्रिया से अवगत कराना।
सायनिक दवाओं पर निर्भरता कम करना।
कम लागत में अधिक उत्पादन की तकनीक उपलब्ध कराना।
फसलों की सुरक्षा एवं मिट्टी की उर्वरता बनाए रखना।
= = प्रशिक्षण के परिणाम-
किसानों ने जैविक खाद एवं जैविक कीटनाशकों को बनाने की प्रक्रिया सीखी।
किसानों को कीटों की पहचान एवं उनके जैविक समाधान की जानकारी मिली।
किसानों में जैविक खेती अपनाने की रुचि बढ़ी।
प्रशिक्षण के तकनीकी सत्र में कृषि वैज्ञानिकों ने अपने अपने विषय में तकनीकी जानकारी दी हेतु अपने विचार व्यक्त किया ।
हरिशंकर बेन


