जबलपुर/ कटनी- सिहोरा से 10 किमी दूर खड़ा मन्दिर दिवालय में करीब पांच सौ वर्षों से एक विशालकाय चट्टान पर विराजी माता की मूर्ति क्षेत्र एवं दूर दूर तक के लोगों की अटूट आस्था का केंद्र हैं जहां सैकड़ों वर्षों पहले वीरान जंगल और झाड़ियां ही रहती थी और चट्टान में मूर्ति विराजमान थी लेकिन उस समय वहां जंगली जानवरों की वजह से पूजा करने वाले भक्त कम ही पहुंच पाते थे ।
लेकिन यहां के परंपरागत पुजारी पंडित श्री अयोध्या प्रसाद बिलौन्हा जी बताया कि उनके दादा परदादा खडरा मन्दिर के बड़े दिवालय में पूजा करते आ रहे हैं जिनके द्वारा – यही धार्मिक कहानी सुनने मिली कि पहले इस जगह में वीरान जंगल और झाड़ियां ही थी जहां किसी समय पर चरवाहे बच्चे मवेशी लेकर आते थे और उन्होंने मूर्ति के आसपास साफ सफाई करके नवरात्रि में थोड़ा थोड़ा समान की व्यवस्था कर जवारे बो दिए और अष्टमी के दिन एक बालक पंडा बना तो एक बालक बलि का बकरा बन गया और एक बलि देने वाला पंडा बन गया, और जब तलवार न होने पर गिध्द के पंख से – बलि देने के लिए प्रहार किया तो बकरा बने बालक की गर्दन कट गई, जिसके बाद गांव तथा आसपास के क्षेत्रीय लोग यहां पर भगत कीर्तन करने लगे और बाद में मृत बच्चे में
प्राण वापस हुए। तब से यहां पर पूजन अर्चना का निरंतर अनुष्ठान चलता रहता है। जबकि नवरात्रि के वैशाख तथा क्वार में यहां भक्तों की भीड़ रहती है। यहां दूर दूर से भक्त अपनी मनोकामना पूर्ण करने के लिए पूजन और चढ़ावा भेंट करने आते है। 27 वर्षों से जल रही अखंड ज्योत
खड़रा मन्दिर दिवालय में दो अखण्ड ज्योत विगत 27 वर्षों से वर्ष 1997 से प्रज्वलित हैं जिसमें एक शुद्ध घी का दीपक तो दूसरा तेल के दीपक के रूप में माता की ज्योत जल रही है। वहीं मन्दिर का रखरखाव मन्दिर के पुजारी अयोध्या प्रसाद
एवं उनके पुत्र सनद बिलौन्हा जी करते आ रहे हैं। जबकि लोगों की मनोकामना पूर्ण होने पर यहां कई छोटे बड़े निर्माण और व्यवस्थाएं भी भक्तों द्वारा कराई गई हैं। चट्टान का आकार निरंतर बढ़ रहा है उसी में माता विराजी हैं जिसकी ऊंचाई लगभग 25 फीट के करीब है।
➡️धार्मिक आस्था का केंद्र
खड़रा मन्दिर दिवालय यहां पर हर आने वाले भक्त की अटूट आस्था का केंद्र हमेशा बना रहता है जिनके सन्तान पाने की या शादी विवाह, स्वास्थ्य नौकरी पाने की मनोकामना पूर्ण होती है, जिसके चलते कार की नवरात्र में जवारे बोने की परंपरा वर्षों से चली आ रही है जिनका विषर्जन नवमी के दिन किया जाता है वहीं वैशाख की नवरात्र में यहां पर नौ दिनों तक भक्तों की भीड़ बनी रहती है और मेला लगा रहता है। मन्दिर के मुख्य द्वार में गणेश भगवान विराजे हैं काल भैरव, राम दरवार, राधा कृष्ण, शंकर पार्वती विराजे हैं।
➡️यहां से पहुंचे मन्दिर
जबलपुर जिले के सिहोरा से महज 10 किमी की दूरी पर खड़रा दिवालय मन्दिर है जहां आसानी से जाने के लिए आपके वाहन मिल जाते हैं जबकि कटनी जिले के बहोरीबंद से होते हुए कुआं से होकर भी खड़ा मन्दिर पहुंच सकते हैं।


