उधार लिए रुपए के लिए क्या कोई जिगर के टुकड़े को गिरवी रख सकता है वो भी एक दो दिन नहीं पूरे 6 साल तक। जी हां मामला बैतूल जिले के डुड गांव का है जहां गंजू अपनी पत्नी सरिता और सात वर्षीय बेटे के साथ साल 2019 में मजदूरी के लिए हरदा जिले के झिरीखेड़ा गांव के ठेकेदार रूपेश शर्मा के पास गए थे। कुछ दिनों बाद गंजू को अपने छोटे भाई की शादी के लिए रुपयों की आवश्यकता थी। उसने रूपेश से 50 हजार रुपए उधार लिए जिसके एवज में दोनों पति पत्नी ने दो वर्ष तक ठेकेदार के पास काम किया।
हरदा थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई। जिसके बाद बच्चे को सीडब्ल्यूसी हरदा के द्वारा बैतूल सीडब्ल्यूसी सामने पेश किया गया। बाल कल्याण समिति (CWC) बैतूल ने दस्तावेज ना होने (आधार, राशन कार्ड) की वजह से बच्चे को तत्काल उसके परिजनों को सौंपा नहीं जा सका। महिला एवं बाल विकास विभाग ने सोशल इन्वेस्टिगेशन रिपोर्ट (SIR) तैयार की और बच्चे को छिंदवाड़ा के
बाल सुधार गृह भेज दिया, जहां बच्चे की समुचित देखभाल की जा रही है। बच्चे को सौंपने से पहले बाल कल्याण समिति पहले सभी तरह की जांच कर बच्चे को सुरक्षित महसूस करने के बाद ही बच्चे को परिजन को सौंपेगी। फिलहाल गंजू और सरिता ने अपने बच्चे के सभी जरूरी दस्तावेज बना लिए है। एक दो दिन में वे समिति के सदस्यों के साथ जाकर अपने बेटे को अपने घर ले जा सकेंगे।


