डॉ. इंदु भूषण बाली
भारत-पाकिस्तान के रिश्ते मानो अखाड़ा बन चुके हैं। आप देख सकते हैं कि सुबह मिसाइलों का अभ्यास, दोपहर में आतंक का प्रदर्शन और शाम को क्रिकेट का तमाशा। कभी पुलवामा में लहू बहता है तो कभी पहलगाम में मातम छा जाता है और फिर स्टेडियम में रोशनी, ढोल-तमाशे और कमेंट्री बॉक्स से आवाज़ आती है “ये रहा एक शानदार भारतीय चौका और पाकिस्तानी छक्का!”
क्या यही है कूटनीति है कि मैदान पर चौके-छक्के गिनों और सीमा पर ताबूत? क्या यही है खेल भावना कि एक ओर माताएँ अपने बेटों की तस्वीर को गले लगाकर रोएं और दूसरी ओर स्पॉन्सर कंपनियाँ करोड़ों का लाभ गिनें?
क्रिकेट तो कहता है “खेलो दिल से”, लेकिन यहां तो खेला जा रहा है दिलों के साथ। यह वही पाकिस्तान है जो बंदूक की नली से दोस्ती का गीत सुनाता है और बम के धुएं में शांति का इत्र बेचता है। और हम हैं कि उसी से क्रिकेट का “जश्न-ए-मुकाबला” रचाते हैं।
सोचिए, अगर यह खेल ही इतना प्रिय है तो क्यों न सीधे सीमा पर ही मैच रखा जाए। पुलवामा की सड़क को पिच बना दीजिए, कारगिल की पहाड़ियों पर बाउंड्री खींच दीजिए—तब पता चलेगा कि चौका किसका और छक्का किसका। शायद तभी समझ आएगा कि यह क्रिकेट नहीं, बलिदान की खिल्ली है।
शहीदों की शहादत को भूलकर चियरलीडर्स के नृत्य में ताली बजाना, यह कैसा राष्ट्रधर्म है? टीआरपी की भूखी मीडिया और प्रायोजकों की भरी तिजोरियां क्या माताओं के आंसुओं से भारी हो गई हैं?
प्रेस कोर काउन्सिल का राष्ट्रीय राष्ट्रभक्त सॅंरक्षक यह कहने में संकोच नहीं करता कि यह क्रिकेट नहीं, यह तो उपहास है; यह मैच नहीं, यह राष्ट्र की स्मृतियों का मज़ाक है; यह खेल नहीं, यह राजनीति और पैसे की साझी जुगलबंदी है।
जब तक पाकिस्तान की भूमि से आतंक का व्यापार और व्यवहार बंद नहीं होता, तब तक हर भारत-पाक मैच एक बल्ले और बम का संयुक्त नाटक ही कहलाएगा। और इस नाटक का टिकट हमारे बलिदानियों का रक्त चुका रहा है। माननीय महामहिम राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू जी कृपया उक्त नापाक उपहास को रोकिए। सम्माननीयों जय हिन्द
प्रार्थी
डॉ. इंदु भूषण बाली
प्रेस कोर कॉउन्सिल का
राष्ट्रभक्त राष्ट्रीय सॅंरक्षक,
राष्ट्रपति पद का पूर्व प्रत्याशी, वरिष्ठ लेखक एवं पत्रकार, डाकघर एवं तहसील ज्यौड़ियॉं, जिला (जम्मू) जम्मू और कश्मीर पिनकोड 181202
मोबाइल 7889843859
ईमेल आईडी baliindubhushan@gmail.com


