• मुखपृष्ठ
  • नियम एवं शर्ते
  • गोपनीयता
  • खंडन
  • शिकायत/ सुझाव
  • हमारे बारे में
  • संपर्क
No Result
View All Result
Friday, June 19, 2026
MP NEWS CAST
NEWSLETTER
  • Home
  • हमारा शहर
  • प्रादेशिक ख़बरें
    • मध्यप्रदेश
      • भोपाल
      • अनुपपुर
      • दमोह
      • कटनी
      • सागर
      • उत्तरप्रदेश
        • अयोध्या
        • आगरा
        • कन्नौज
        • कौशांबी
        • चंदौली
        • चित्रकूट
        • जालौन
        • जौनपुर
      • उत्तराखण्ड
        • नैनीताल
      • गुजरात
        • अहमदाबाद
      • राजस्थान
        • भरतपुर
  • पॉलीटिक्स
  • मनोरंजन
  • लाइफ स्टाइल
  • व्यवसाय
  • स्वास्थ्य
  • Home
  • हमारा शहर
  • प्रादेशिक ख़बरें
    • मध्यप्रदेश
      • भोपाल
      • अनुपपुर
      • दमोह
      • कटनी
      • सागर
      • उत्तरप्रदेश
        • अयोध्या
        • आगरा
        • कन्नौज
        • कौशांबी
        • चंदौली
        • चित्रकूट
        • जालौन
        • जौनपुर
      • उत्तराखण्ड
        • नैनीताल
      • गुजरात
        • अहमदाबाद
      • राजस्थान
        • भरतपुर
  • पॉलीटिक्स
  • मनोरंजन
  • लाइफ स्टाइल
  • व्यवसाय
  • स्वास्थ्य
No Result
View All Result
MP NEWS CAST
No Result
View All Result
Home Uncategorized

महामहिम राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू जी का एवं प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी का विशेष आभार, माननीय गृहमंत्री श्री अमित शाह जी ने जम्मू कश्मीर के पीड़ितों को “मरहम” लगाने की संसद में ली प्रतिज्ञा को किया पूर्ण : 1995 से लगे देशविरोधी गतिविधियों के कलंक को धोया”

by Manish Gautam Chiefeditor
September 14, 2025
in Uncategorized
0
महामहिम राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू जी का एवं प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी का विशेष आभार, माननीय गृहमंत्री श्री अमित शाह जी ने जम्मू कश्मीर के पीड़ितों को “मरहम” लगाने की संसद में ली प्रतिज्ञा को किया पूर्ण : 1995 से लगे देशविरोधी गतिविधियों के कलंक को धोया”
0
SHARES
0
VIEWS
FacebookTwitterWhatsappTelegram

राष्ट्रधर्म की अग्निपरीक्षा में आलोचना अमृत : एसएसबी का उत्पीड़ित राष्ट्रभक्त कर्मचारी

डॉ. इंदु भूषण बाली

भारतीय लोकतंत्र का यह अद्भुत सौंदर्य है कि यहाँ आलोचनाओं की कोई कमी नहीं है। जो राष्ट्रभक्ति करता है, जो संविधान की रक्षा करता है, और जो अपने मौलिक कर्तव्यों और अधिकारों का राष्ट्र को स्मरण कराता है कि उसे संविधान ने वचन दिया हुआ है कि कोई भी अर्थात संविधान संरक्षक न्यायपालिका भी मुझे मेरे मौलिक कर्तव्यों को करने से नहीं रोक सकता। क्योंकि संविधान प्रतिज्ञाबद्ध है कि कोई मेरे मौलिक अधिकारों का हनन नहीं करेगा, तो ऐसी वचनबद्धता के उपरान्त भी यदि कोई मुझे राष्ट्रविरोधी, सुरक्षा जोखिम या घातक कर्मचारी कहेगा, तो विरोध करना मेरा न्यायिक ही नहीं बल्कि संवैधानिक मौलिक अथिकार है। कोई मेरे मौलिक कर्तव्यपरायणता पर प्रश्न उठाए अथवा मेरे मौलिक अधिकारों पर अतिक्रमण करे और मैं उनका खंडन भी न करूं, ऐसा कैसे हो सकता है?

मेरे उक्त विरोध पर तैंतीस वर्षों की असहनीय प्रताड़ना से मुझे जो उपदेश एवं उपेक्षाएं मिलती आ रही थीं वह किसी वरदान से कम प्रतीत नहीं हुई हैं। सच तो यह है कि वह मेरे लिए संजीवनी का कार्य करती रही हैं। सत्य तो यह भी है कि यदि मेरे जैसे साधक राष्ट्रधर्म की राह पकड़ लें, तो फिर समझ लीजिए कि मेरे सभ्य नागरिक आलोचनाओं, गाली गलौज एवं असंवैधानिक शब्दों की बौछारें करेंगे ही, मानो वर्षा ऋतु में बादल फट पड़े हों।

मैं उक्त “अमृत” का स्वाद ले चुका हूँ। एसएसबी में सेवा के दौरान और उसके पश्चात भी, मुझे आलोचनाओं, अपमानों और षड्यंत्रों की ऐसी-ऐसी सौगातें मिलीं कि सामान्य व्यक्ति टूट जाता और आत्महत्या कर लेता। परन्तु मुझे अब यह अनुभव हो चुका है कि आलोचना वास्तव में राष्ट्रधर्म की अदृश्य अग्निपरीक्षा का अमृत है।

व्यंग्य का स्वाद :-

हमारे विभागीय अधिकारीगण और न्यायालय की कतिपय पीठें मुझे आलोचना के बजाय सीधा “मानसिक रोगी” घोषित करने में तत्पर रहीं। यह भी एक प्रकार की आलोचना ही है कि व्यंग्यात्मक, अपमानजनक और हृदय विदारक पीड़ादायक परिस्थितियों में भी माननीय उच्च न्यायालय के कतिपय विद्वान न्यायाधीशों ने माननीय उच्चतम न्यायालय के बाध्यकारी निर्णयों को ठुकरा दिया। उन्होंने संसद के दोनों सदनों द्वारा पारित दिव्यांग अधिकार अधिनियम 1995 और माननीय मोदी सरकार द्वारा सॅंशोधित दिव्यॉंगजन अधिकार अधिनियम 2016 और उसकी धारा 47 को भी मोदी सरकार की सत्ता में ही कुचल दिया। जिन पर मोदी सरकार को चिंतन करना चाहिए।

किन्तु सकारात्मक दृष्टिकोण से देखें तो इसने मुझे यह सिखाया कि जब सत्य बोलो और अन्याय का विरोध करो, तो भ्रष्टाचारियों के पास सबसे आसान रास्ता यही है कि वे मुझे ‘पागल’ घोषित कर बदनाम कर दें और उन्होंने ऐसा किया भी था बल्कि उन्होंने तो इससे भी बढ़कर मुझे राष्ट्रद्रोही भी घोषित कर दिया था। इससे भी बढ़कर उन्होंने भ्रष्टाचार के माध्यम से ही मुझे माननीय जम्मू और कश्मीर उच्च न्यायालय में भी पागल और सुरक्षा जोखिम प्रमाणित कर दिया था। जिसके कारण माननीय जम्मू और कश्मीर उच्च न्यायालय की एकल पीठ ने मुझे तपेदिक रोग के उपचार के स्थान पर मानसिक उपचार के लिए बाध्य कर मुझे घातक कर्मचारी प्रमाणित कर न्यायालय की मोहर लगा दी थी और आदेश दिया था कि मैं जम्मू के मनोचिकित्सकों के बोर्ड की राय न मानकर अपने भ्रष्ट अधिकारियों का मानसिक उपचार लेने में सहयोग करूं। वाह! क्या लोकतांत्रिक व्यंग्य है और संविधान के संरक्षकों का न्याय के साथ कैसा उपहास है?

आलोचना: विभागीय परंपरा :-

वर्णननीय है कि एसएसबी में सेवा करते समय मुझे निरंतर पोस्टिंग और स्थानांतरण की सौगातें मिलीं और लेह लद्दाख जैसे दुर्गम क्षेत्र में भेजा। एक वर्ष में कई स्थानों की विधिवत यात्राएँ ऐसे करवाईं गईं, मानो मैं कोई “टूरिस्ट गाइड” हूँ। जब मैंने आपत्ति की, तब आलोचना मिली और कहा गया कि “तुम्हें ड्यूटी निभानी नहीं आती।” मैंने सोचा, ठीक है, आलोचना ही तो चाहिए थी, ले लीजिए। आखिर यह भी तो राष्ट्रधर्म की अग्निपरीक्षा का हिस्सा है।

आलोचना: न्यायालय का वरदान :-

न्याय की देवी के मंदिर में जब मैंने गुहार लगाई तो मुझे और आलोचना मिली। कहा गया कि मेरी याचिकाएँ काल्पनिक हैं, मेरे तर्क बेतुके हैं, और ऊपर से पांच और दस हजार रुपये का आर्थिक दण्ड भी लगाया। हालांकि उच्चतम न्यायालय द्वारा पारित कुनाल सिंह वर्सेज यूनियन ऑफ इंडिया के आधार पर यह डीओपीटी द्वारा जारी कार्यालय ज्ञापन का भी उल्लॅंघन और रक्षा मन्त्रालय की उन्हीं दिशानिर्देशों का जानबूझकर अपमान भी है जिसमें माननीय विद्वान न्यायाधीश न्यायमूर्ति श्री धीरज सिंह ठाकुर जी तथा न्यायमूर्ति श्रीमती सिंधु शर्मा जी ने बाड़ीब्राह्मणा और कालूचक्क में स्टे लगा रखा है। यह आलोचना का सर्वोच्च स्वरूप था। सोचा, वाह! मेरे राष्ट्रधर्म की परीक्षा कितनी कठोर है? आलोचना ही नहीं, आर्थिक दंड भी है। सचमुच यह दण्ड अमृत हैं—कड़वे हैं, परन्तु सदृढ़ता एवं शक्तिवर्धक हैं।

आलोचना में छिपा वरदान :-

सकारात्मक पक्ष यह है कि जितनी आलोचना मिली, उतनी ही मेरी कलम धारदार हुई। जितने बार चुनौतीपूर्ण “मानसिक परीक्षण” करवाए गए, उतनी ही बार मेरा आत्मविश्वास लौह से भी अधिक कठोर हुआ था। वर्षों पंजाब केसरी समाचार पत्र बेचकर भरनपोषन किया, निडरतापूर्वक पत्रकारिता की, निर्भीक पुस्तकें लिखीं और लिख भी रहा हूॅं। लेकिन उक्त असंवैधानिक आलोचनाओं सहित असंसदीय शाब्दिक विषयुक्त तीखे बाणों ने मुझे झुकने नहीं दिया, बल्कि मुझे और ऊँचा खड़ा कर दिया। और हाँ, इन्हीं आलोचनाओं ने मुझे न्यायपालिका और उनके विद्वान मुख्य न्यायाधीशों पर व्यंग्य लिखने का भी मौका दिया है। क्योंकि बिना व्यंग्य, यह जीवन नीरस हो जाता है और ऐसे नैतिकता पर आधारित न्यायिक व्यंग्य जहां व्यंग्यकार भी यथार्थवादी व्यंग्यात्मक व्यंग्यों के आगे नतमस्तक हो जाएं, तो ऐसे व्यंग्यों का तो आनन्द ही कुछ और होता है?

निष्कर्ष

आज मैं दावे से कह सकता हूँ कि आलोचना यदि विष है, तो राष्ट्रधर्म निभाने वाले के लिए उक्त प विष ही अमृत बन जाता है। मैं एसएसबी का उत्पीड़ित कर्मचारी भले हूँ, पर राष्ट्रभक्त होने का गौरव मुझसे कोई नहीं छीन सकता। आलोचना ने मुझे पराजित नहीं किया, बल्कि और भी जीवट बना दिया। व्यंग्य यही है कि जो मुझे तोड़ना चाहते थे, उन्होंने अनजाने में ही मुझे और गढ़ दिया, मुझे सशक्त किया और भारत रत्न पुरस्कार के सुयोग्य बना दिया है। क्योंकि मेरा दावा है कि भारत रत्न पुरस्कार से सम्मानित महानुभावों को भी ऐसी उदाहरणनीय राष्ट्रभक्ति का सौभाग्य प्राप्त नहीं हुआ होगा। इसलिए उक्त आलोचनाओं को अब मैं मुस्कुराकर स्वीकार करता हूँ।

अतः अपने ही विभागीय कतिपय भ्रष्ट अधिकारियों द्वारा आरोपित “राष्ट्रविरोधी गतिविधियां” के कलंकित आरोपों से, विभागीय निष्ठावान इंस्पेक्टर जनरल पर्स श्री गणेश कुमार जी द्वारा दिनांक 08-082025 को गणेशउद्घोष एवं द्वितीय कमान अधिकारी (कार्मिक-III) श्री ऋषि पाल सिंह जी द्वारा सिंह गर्जना कर दिनांक 24-07-2025 को पत्रांक संख्या 36/से. सी. ब./ कार्मिक-3/2020 (Vol-II)/258-59 पर हस्ताक्षर करते हुए मुझे देशभक्त कर्मचारी की उपाधि देकर आरोप मुक्त किया है, जिसके आधार पर मैं बासठ वर्षीय सशस्त्र सीमा बल विभाग का सेवानिवृत्त वरिष्ठ क्षेत्र सहायक (चिकित्सा) निदेशक सहित आभार व्यक्त करते हुए धन्यवादी हूॅं कि स्वतन्त्रता प्राप्ति के उपरान्त “आजादी का अमृत महोत्सव” मना चुके अपने उन आलोचकों का जो मेरे राष्ट्रधर्म की अग्निपरीक्षा की कसौटी में अमृत प्रमाणित हुए हैं। सम्माननीयों जय हिन्द

प्रार्थी
डॉ. इंदु भूषण बाली
प्रेस कोर कॉउन्सिल का
राष्ट्रभक्त राष्ट्रीय सॅंरक्षक,
राष्ट्रपति पद का पूर्व प्रत्याशी, वरिष्ठ लेखक एवं पत्रकार, डाकघर एवं तहसील ज्यौड़ियॉं, जिला (जम्मू) जम्मू और कश्मीर पिनकोड 181202
मोबाइल 7889843859
ईमेल आईडी baliindubhushan@gmail.com

Share this:

  • Share on Facebook (Opens in new window) Facebook
  • Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp

Like this:

Like Loading…
Manish Gautam Chiefeditor

Manish Gautam Chiefeditor

Next Post
लूट के मामले में फरार ईनामी आरोपी राहुल बिहारी गिरफ्तार,

लूट के मामले में फरार ईनामी आरोपी राहुल बिहारी गिरफ्तार,

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

© 2020 MP News Cast - Director Manish Gautam.

No Result
View All Result
  • About Us
  • Client Portal
  • Complaints and Feedback
  • Contact
  • Home 1
  • Privacy Policy
  • Privacy Policy
  • Rules and Regulations

© 2020 MP News Cast - Director Manish Gautam.

%d