कालापीपल(बब्लू जायसवाल)भागम भरी जिंदगी में हर व्यक्ति किसी न किसी कारण से परेशान है,इस परेशानी को दूर करने के लिए व्यक्ति यहां-वहां देवीधाम करते हैं, लेकिन वास्तव में व्यक्ति की परेशानी की असली वजह पूर्वजों की नाराज़गी होती है, वेद पुराणों में बताया गया है कि पूर्वजों की पूजा अर्चना न करने की वजह से वह नाराज होते हैं और हमारी परेशानियों का कारण बनते हैं। लेकिन 7 सितंबर से शुरू होने वाले पितृपक्ष में अपने पूर्वजों की पूजा अर्चना करें,जिससे उनकी कृपा हम पर बरसती रहे, श्री सिध्देश्वर पंचांग कर्ता ज्योतिषाचार्य पंडित नीरज अग्निहोत्री भरदी वाले के अनुसार इन 15 दिनों में दिवंगत पूर्वजों की आत्मा की शांति और सम्मान के लिए श्राद्ध,तर्पण और विशेष पूजा की जाती है,पितृपक्ष में कुछ नियमों का पालन करना अत्यंत आवश्यक माना गया है।
“यह बिल्कुल भी न करें”
तामसिक भोजन पितृ पक्ष में भूलकर भी मांस और शराब का सेवन नहीं करना चाहिए,शुभ कार्य विवाह, मुंडन,गृह प्रवेश या किसी नए व्यवसाय की शुरुआत जैसे कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए,व्यक्तिगत देखभालःपितृ पक्ष के 15 दिनों में बाल और नाखून काटने से बचना चाहिए,नई वस्तुएं नाए कपड़े, गहने या अन्य कोई नई वस्तु नहीं खरीदनी चाहिएए।
लड़ाई-झगड़ा इस दौरान किसी से भी बहस या झगड़ा करने से बचें श्राद्ध पक्ष में इन बातों का रखें ध्यान
प्रतिदिन तर्पणःस्नान मैं दक्षिण दिशा की ओर मुख करके पितरों को जल अर्पित करें। जल में काले तिल और जौ मिलाकर अध्य दें,मंत्र जापः-तर्पण करते समय पितृ मंत्र का जाप करें,यह पितरों को तृप्त करने का एक प्रभावी उपाय है,पिंडदान और भोजन श्राद्ध में पिंडदान करना और ब्राहमणों को भोजन कराना जरूरी होता है,यदि बाहह्मण उपलब्ध न हों तो भोजन किसी जरूरतमंद व्यक्ति या गाय को खिलाया जा सकता है,सात्विक भोजनःश्राद्ध का भोजन पूरी तरह से सात्विक,
शुद्ध और बिना लहसुन प्याज का होना चाहिए,दान-पुण्यः इस दौरान अन्नार वस्त्राए जूते और अन्य आवश्यक वस्तुओं का दान करना बहुत शुभ माना जाता है,
श्राद्ध पक्ष की तिथिया:-
पूर्णिमा श्राद्धः 7 सितंबर, रविवार प्रतिपदा श्राद्धः8 सितंबर,सोमवार द्वितीया श्राद्धः9 सितंबर,मंगलवार तृतीया व चतुर्थी श्राद्धः 10 सितंबर,बुधवार पञ्चमी श्राद्ध व महा भरणी 11 सितंबर,गुरुवार षष्ठी श्राद्धः12 सितंबर, शुक्रवार सप्तमी श्राद्धः 13 सितंबर,शनिवार अष्टमी श्राद्ध 14 सितंबर,रविवार नवमी श्राद्धः 15 सितंबर, सोमवार दशमी श्राद्ध 16 सितंबर,मंगलवार एकादशी श्राद्धः 17 सितंबर, बुधवार द्वादशी श्राद्ध 18 सितंबर गुरुवार त्रयोदशी श्राद्ध व मधा श्राद्ध 19 सितंबर, शुक्रवार चतुर्दशी श्राद्धः 20 सितंबर,शनिवार सर्वपितृ अमावस्या 21 सितंबर रविवार है।


