जैन समाज पंचायत समिति द्वारा आयोजित दशलक्षण पर्व के सातवें दिन जैन बोर्डिंग हाउस में प.पू.मुनिश्री पदम सागर जी महाराज ने उत्तम तप धर्म पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि उत्तम तप आत्मा की शुद्धि और मोक्ष के लिए महत्वपूर्ण है।
*उत्तम तप के बारे में:*
– *वज्र के समान*: मुनिश्री ने कहा कि उत्तम तप द्रव्य कर्म और भावकर्म रूपी पर्वत को नाश करने के लिए वज्र के समान है।
– *दो प्रकार के तप*: मुनिश्री ने बताया कि तप दो प्रकार के होते हैं – बाह्य तप और अंतरंग तप।
– *बाह्य तप*: आहार का संयम, अनशन, अवमौदर्य, व्रत परिसंख्यान, काय-उत्सर्ग।
– *अंतरंग तप*: प्रायशिचत, विनय, वैयावृत्य, स्वाध्याय, व्युत्सर्ग, और ध्यान।
*आत्मा की शुद्धि:*
– *कर्मवंदन से शुद्धि*: मुनिश्री ने कहा कि अंतरंग और बहिरंग दोनों से आत्मा की कर्मवंदन से शुद्धि होती है।
– *मोक्ष के पद पर अग्रसर*: आत्मा मोक्ष के पद पर अग्रसर होती है।
*शांतिधारा:*
– *विनय वंदना जैन मिर्जापुर*: शांतिधारा करने का सौभाग्य विनय वंदना जैन मिर्जापुर, हाउसिंग बोर्ड के श्रद्धालु बंधुओं को मिला।
– *देव कुमार शास्त्री परिवार*: देव कुमार शास्त्री परिवार और सनत सिंघई को शांतिधारा करने का अवसर मिला।


