मातृ शिशु रक्षा का अर्थl माँऔर शिशु के स्वास्थ्य की रक्षा से है, जिसके अंतर्गत गर्भावस्था से लेकर बच्चे के दूसरे जन्मदिन तक, स्वास्थ्य सेवाओं, पोषण और सहायता का प्रावधान किया जाता है। तथा मातृ और शिशु मृत्यु दर को कम करने में मदद करता है ।उसके बाबजूद भी दूसरी बार एक मां की गोद सूनी हो गई ।
आपको बता दे कि रीठी तहसील क्षेत्र अंतर्गत ग्राम नौआपटी निवासी पीड़ित पिता अनिल सिंह ठाकुर ने स्वास्थ्य विभाग की इस लापरवाही पर, आरोप लगाते हुए बताया कि मेरे बच्चे की जान से साथ खिलवाड़ किया गया है। मेरी पत्नी राजकुमारी, जो प्रसव पीड़ा होने पर अपने मायके, ग्राम जमुनिया से अपनी मां और भावी के साथ रीठी सरकारी अस्पताल में 28अगस्त को भर्ती हुई थी। उसी रात्रि दरमियान बच्चे का जन्म हुआ। जिसका वजन दो किलो बताया गया । तब जच्चा बच्चा दोनों स्वस्थ थे । दूसरे दिन बच्चे को बुखार आना शुरू हो गया ,जिस पर बच्चे की मां राजकुमारी ने मोजूदा नर्स से बताया कि बच्चा रो रहा है और उसको बुखार भी है । जिस पर नर्स ने कहा ऐसे ही है, कोई बात नही l और बुखार मैं ही इंजेक्शन लगा दिया गया l जिससे बच्चा झिझकने लगा और बुखार तेज बढ़ गया तथा कुछ घंटे बाद, 31अगस्त को अस्पताल में ही बच्चे की मौत हो गई। यह सुनते ही एक मां के चारो ओर अंधेरा छा गया और फूट फूट कर रोने लगी।
बताया जाता हैं कि यह पीड़िता राजकुमारी के दूसरे बच्चे की मौत हुई है l ठीक इसी तरह इनके पहले बच्चे की भी डिलेवरी रीठी सरकारी अस्पताल मैं 25 दिसंबर2019 को हुई थी, और तीन दिन बाद 28 दिसंबर को वह मां से जुदा हो गया था।
वही पीड़ित परिजनों ने ऐसी लापरवाही बरतने वाले स्वास्थ्य कर्मचारियों के ऊपर उचित कार्रवाई किए जाने की मांग है ।ताकि भविष्य में और किसी मां की गोद ना उजड़े ।
अब देखना यह है कि इस विषय पर ऊपर बैठे उच्च अधिकारी क्या कार्रवाई करते हैं या फिर ऐसे ही मां की गोद सूनी होती रहेंगी ।
हरिशंकर बेन


