अनादिकाल से इस पुण्यधरा पर जड़, जीव, चैतन्य को अपने आशीर्वाद से पल्लवित करती आ रही नर्मदा मैया को पौराणिक शास्त्रों में तीर्थों की जननी एवं तप की अधिष्ठात्री के रूप में वर्णित किया गया है।
नर्मदा मैया से कामना करता हूँ कि समस्त देशवासियों के जीवन को सुख, समृद्धि, सौभाग्य एवं आरोग्यता के धवल प्रकाश से दीप्त करे।
नर्मदे हर!


