देश मैं डॉक्टर को भगवान का दूसरा रूप कहा जाता है l वहीं शासन ने भी स्वास्थ्य केंद्रों को आरोग्य मंदिर का नाम दिया है। और इस मंदिर में देवी देवता याने कि (CHO) कम्युनिटी हेल्थ ऑफीसर को बैठाया गया है।ताकि ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओ का लाभ ले सके । और सार्वजनिक स्वास्थ्य कार्यक्रमों लागू हो, जैसे मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, परिवार नियोजन, संचारी रोग नियंत्रण,गर्भवती महिलाओं का टीकाकरण क्षय रोग (टीवी)और टेली-परामर्श जैसी सेवाएं प्रदान की जा सकेl
परंतु कटनी जिले की रीठी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र क्षेत्र के ग्राम बखलेहटा का आरोग्य मंदिर बदहाली के आसू रोने को मजबूर है l यहां स्वास्थ्य केंद्र होने पर भी,गांव के ग्रामीणों को स्वास्थ्य सुविधा का लाभ नहीं मिल पाना, यह स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही को उजागर करता है ।
यहां के रहवासियों का आरोप है कि यह स्वास्थ्य केंद्र महीनो से बंद पड़ा हुआ है। जिससे मरीजों को भरी दिक्कतो का सामना करना पड़ता हैं। गांव के ग्रामीणों की परेशानी उस वक्त और बढ़ जाती है । जब कोई मरीज गंभीर होकर ,इलाज के लिए केन्द्र पहुंचता हैं। और वहां जाने के बाद पता चलता है कि केन्द्र तो बंद है। अब मरीज क्या करे l फिर वह मायूस होकर लगभग 12 किलोमीटर का सफर तय कर रीठी सरकारी अस्पताल या मोटी रकम खर्च कर झोलाछाप डॉक्टरों की शरण लेता हैं । जबकि केंद्र मैं 12 कर्मचारियों मैं, सीएचओ, एएनएम, सेक्टर सुपरवाइजर, आशा सहयोगिनी और आठ आशा कार्यकर्ताओ के नाम सूची में दर्ज है । उसके बावजूद भी आरोग्य केंद्र का बंद रहना, स्वास्थ्य विभाग को सवालों के घेरे लाकर खड़ा कर रहा है । वही इस संबंध में बीएमओ डॉक्टर मेघेंद्र श्रीवास्तव का कहना है की क्षेत्र में बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं दी जा रही l यदि एशा है तो में स्वयं जाकर देखूंगा,l
अब देखना यह है कि क्या ग्रामीणों को स्वास्थ्य सेवाएं बेहतर मिल पाएंगी l या फिर उनको बंद आरोग्य मंदिर के ही दर्शन करने पड़ेंगे ।
हरिशंकर बेन


