मौसम के चलते इन दोनों वायरल फीवर और मौसमी बीमारीयो के सैकड़ों मरीज अपना इलाज करने प्रतिदिन सरकारी अस्पताल पहुंच रहे है।
हद तो तब हो गई जब आज सोमवार की दोपहर मरीजों को भीड़ देखी गई ।वही आज भी हमेशा की तरह दवा वितरण फार्मासिस्ट नही बल्कि एक दिव्यांग हेल्पर से दवाई बटवाई जा रही है । वही फार्मासिस्ट मरीज को दवा वितरण की जिम्मेदारी भूलकर कागजी खाना पूर्ति में व्यस्त है ।
ऐसी स्थिति में यदि मरीजो के हाथों में गलत दवाइया चली जाती है तो उसकी जिम्मेदार कौन होगा,,,?
वहीं सूत्रों से मिली जानकारी अनुसार बताया जाता है कि ओपीडी में बैठे हुए डॉक्टर जो दवाइयां मरीजों को लिखते हैं उसमे से कुछ दवाइयो को खत्म हो गई है,कहकर मरीजों को पर्चा थमा दिया जाता है ।
आखिर कब खत्म होगी स्वास्थ विभाग की लापरवाहियों की कहानी,,,।
हरिशंकर बेन,,


