कटनी, प्रशासन के तमाम दावों के बावजूद आदिवासी बाहुल्य क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं का हाल जस का तस है। बीते रविवार को ढीमरखेड़ा विकासखंड के गौरी गांव में सड़क सुविधा और स्वास्थ्य व्यवस्था की बदहाली ने एक बार फिर प्रशासनिक लापरवाही उजागर कर दी। यहां सड़क न होने के कारण जननी वाहन गर्भवती महिला के घर तक नहीं पहुंच सका और महिला को रास्ते में ही बच्ची को जन्म देना पड़ा।
जानकारी के मुताबिक ढीमरखेड़ा तहसील के गौरा ग्राम पंचायत के आश्रित गांव गौरी निवासी मुन्ना गौंड की पत्नी कुसुम बाई (30) को रविवार सुबह प्रसव पीड़ा हुई। परिजनों ने तुरंत जननी वाहन सेवा को सूचना दी, लेकिन दलदल और दुर्गम रास्ते के कारण वाहन गौरा गांव से आगे नहीं बढ़ सका और गौरी गांव की पहाड़ी से करीब दो किलोमीटर पहले ही रुक गया। गांव तक पक्की सड़क न होने से परिजन गर्भवती महिला को ‘झोली’ में उठाकर पहाड़ से नीचे उतारने लगे। इस दौरान रास्ते में ही महिला का प्रसव हो गया। बाद में गांव की आशा कार्यकर्ता शशिप्रभा विश्वकर्मा और समाजसेवी दुर्गेश विश्वकर्मा ने मोटरसाइकिल से जच्चा और बच्ची को जननी वाहन तक पहुंचाया। वाहन से दोनों को सिलौंड़ी अस्पताल लाया गया, जहां उनका इलाज जारी है। ग्रामीणों का कहना है कि वे कई बार सड़क बनाने की मांग कर चुके हैं, लेकिन अब तक समस्या जस की तस बनी नहीं हुई। बारिश के दिनों में गौरा से गौरी तक का सफर बेहद कठिन हो जाता है और गर्भवती महिलाओं को आज भी पुराने जमाने की तरह झोली में उठाकर पहाड़ी से नीचे लाना पड़ता है। जब तक वे गौरा गांव तक नहीं पहुंचतीं, उनकी राह मुश्किलों से भरी रहती है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि जल्द ही गांव तक पक्की सड़क बनाई जाए, ताकि भविष्य में ऐसी जानलेवा स्थिति दोबारा न बने। ढीमरखेड़ा तहसील के दर्जनों गांव अब भी सड़क जैसी बुनियादी सुविधा से वंचित हैं।
हरिशंकर बेन


