भौगोलिक संकेत (GI) टैग अब सतना के बाजारों में भी अपनी चमक बिखेरेगा। ग्राम खुलरी (जबलपुर) में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में भेड़ाघाट स्टोन क्राफ्ट प्रोड्यूसर कंपनी के शिल्पकारों को GI उपयोगकर्ता प्रमाण पत्र वितरित किए गए, जिसके बाद अब इन उत्पादों के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार के साथ-साथ विंध्य क्षेत्र के प्रमुख शहरों जैसे सतना में भी संभावनाओं के द्वार खुल गए हैं।
NABARD की OFPO परियोजना के तहत लोक कल्याण भूमिका समिति (LKBS) द्वारा संचालित इस पहल का उद्देश्य पारंपरिक हस्तशिल्प को आर्थिक मजबूती देना और कलाकारों को सीधा बाजार उपलब्ध कराना है। संस्था के प्रयासों से अब तक दर्जनों शिल्पकार GI प्रमाणन प्राप्त कर चुके हैं, और संस्था का लक्ष्य है कि 400 से अधिक कलाकारों को इस योजना से जोड़ा जाए।
सतना में मिलेगा नया व्यापारिक आधार
सतना न केवल एक सांस्कृतिक और धार्मिक केंद्र है, बल्कि यहाँ तेजी से उभरता हुआ बाजार भी है। नर्मदा नदी से आने वाली हरियाली जिस तरह इस क्षेत्र की कृषि को समृद्ध करेगी, उसी तरह भेड़ाघाट के GI टैग प्राप्त उत्पादों को यहाँ के शहरी और पर्यटक बाजारों में बेहतर प्रतिक्रिया मिलने की उम्मीद है।
व्यापार विशेषज्ञों का मानना है कि सतना जैसे शहरों में शिल्प उत्पादों की बिक्री से कलाकारों की आमदनी में उल्लेखनीय वृद्धि होगी और शहर में हस्तशिल्प आधारित स्वरोजगार को भी बढ़ावा मिलेगा।
पर्यटन और शिल्प का संगम बनेगा सतना
चित्रकूट, मैहर और गुफाओं की धरती सतना पहले से ही पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र है। ऐसे में यदि GI प्रमाणित भेड़ाघाट शिल्प के स्टॉल, प्रदर्शनियाँ या बिक्री केंद्र यहाँ स्थापित किए जाएँ, तो यह शहर पर्यटन और कला-संस्कृति के संगम के रूप में उभर सकता है।
LKBS की अध्यक्ष रेखा कुशवाहा और NABARD के जिला विकास प्रबंधक अपूर्व गुप्ता के नेतृत्व में यह पहल देश के ग्रामीण शिल्पकारों को नए अवसर दिलाने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम साबित हो रही है।
सतना अब सिर्फ धार्मिक नहीं, शिल्प-पर्यटन के मानचित्र पर भी अपनी पहचान बनाने को तैयार है।


