रीठी प्रदेश सरकार भले ही स्वास्थ्य सेवाओं को सशक्त बनाने के लिए करोड़ों की योजनाएं लागू कर रही हो, लेकिन ज़मीनी स्तर पर भ्रष्टाचार की जड़ें इतनी गहरी हैं कि इन योजनाओं का लाभ पात्र लोगों तक पहुंच ही नहीं पा रहा है। कटनी जिले के रीठी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से उठ रही एक गंभीर मामले ने पूरे स्वास्थ्य विभाग की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
2 बर्ष पूर्व की वाइट
सूत्रों से मिली जानकारी अनुसार रीठी सीएचसी में पिछले कुछ वर्षों से नियम विरुद्ध आशा कार्यकर्ताओं की नियुक्तियों के बदले में मोटी रकम वसूली गई थी, जिसकी शिकायत सूचना के अधिकार के माध्यम से मांगी गई,लेकिन संबंधित अधिकारियों ने जानकारी देने से कतराते हुए भ्रामक जवाब देकर पल्ला झाड़ लिया। आरटीआई आवेदक विनोद शंकर शर्मा ने बताया कि कई बार जानकारी मांगी गई, लेकिन अधिकारी जवाब देने से बचते रहे,,,,,।
गौरतलब यह है कि रीठी स्वास्थ्य केंद्र में कुल 140 आशा कार्यकर्ता 10 सेक्टर और 10 आशा सहयोगिनी कार्यरत है ।
और वह रात दिन अपनी स्वास्थ्य सेवाएं पूरी ईमानदारी जिम्मेदारी के साथ निभाती है ।
वास्तव में आशा कार्यकर्ता जो स्वास्थ्य तंत्र की रीढ़ मानी जाती हैं, उन्हीं का सबसे अधिक शोषण हो रहा है। प्रशिक्षण से लेकर,साप्ताहिक बैठक और हर माह की आखरी तरीक को 49 कालम का स्वस्थ्य भुक्ततान बाउचर भरकर जमा करना ताकि उन्हें आसानी से मासिक मानदेय मिले और वह अपना परिवार का भरण पोषण कर सके । परंतु हर स्तर पर उनसे पैसे की मांग की जाती है। सूत्र बताते हैं कि मझगवा सेक्टर की आशा कार्यकर्ताओं से हर आशा से प्रति माह 500/ रुपए की वसूली की जाती थी। जिसकी जानकारी भी आशाओं ने विभाग को दी l यह कोई एक सेक्टर का मामला नहीं बल्कि सभी सेक्टर में अधिकारियों की मिली भगत से आशा सहयोगिनियों द्वारा पैसे वसूले जाने की खबर आती है।
वहीं डेढ़ साल पहले भी बिलहरी सेक्टर की एक आशा कार्यकर्ता ने बीसीएम पर भुगतान वाउचर जमा करने के बदले पैसे मगाए जाने का आरोप लगाया था ।जिसके आज तक भुक्ततान बाउचर जमा नही किए गए है।
यह स्थिति तब है जब शासन द्वारा हर आशा कार्यकर्ता को समय पर भुगतान और सुविधा देने की बात कही जाती है।
नाम न छापने की शर्त पर बताया कि भुगतान बाउचर जमा करने के नाम पर हर माह लाखों रुपये की अवैध वसूली की जाती हैं। जो यह गंभीर वित्तीय अनियमितताओं की ओर इशारा करती है।
स्वास्थ्य विभाग के निचले स्तर से लेकर ऊपरी अधिकारी तक भ्रष्टाचार के घेरे मैं नज़र आते हैं। विभाग मैं किसी भी मद से कोई भी,किसी का,भुक्ततान क्यों न हो सबका कमिशन तय है। क्योंकि बिना कमीशन की भुगतान होना असंभव है। और
भाजपा शासनकाल में शिकायतों के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है। इससे साफ है कि कहीं न कहीं राजनीतिक संरक्षण भी इन मामलों में मौन सहमति बना रहा है। बड़ा सवाल यह है कि जब भ्रष्टाचार की शिकायतें सार्वजनिक होकर जनचर्चा का विषय बन जाए । तब विभागीय व जिला स्तरीय वरिष्ठ अधिकारी भी इस पर संज्ञान नहीं ले रहे है ? क्या सरकार को यह सब नहीं दिखता, या फिर यह सब ‘मिलीभगत’ का नतीजा है?
अब देखना यह है कि क्या शासन इस गम्भीर भ्रष्टाचार के मामले में संज्ञान लेगा? क्या दोषियों पर कार्रवाई होगी या यह मामला भी अन्य मामलों की तरह फाइलों में दफ्न होकर रह जाएगा? और सबसे अहम सवाल कब तक होता रहेगा आशाओ का शोषण,,,?
स्वास्थ्य विभाग में व्याप्त इस भ्रष्टाचार की जड़ें यदि अभी नहीं काटी गईं तो यह संपूर्ण स्वास्थ्य सेवा व्यवस्था को खोखला कर देगा। शासन और प्रशासन को चाहिए कि वे इस प्रकरण की जांच निष्पक्ष एजेंसी से करवाकर दोषियों को तत्काल निलंबित कर कानूनन कार्रवाई करें, ताकि आम जनता का भरोसा सरकारी संस्थाओं पर बना रहे।
हरिशंकर बेन


