रीठी विभाग और आम नागरिक अधिकतर गली चौराहों और दिवालो पर स्लोगन संदेश इसलिए लिखवाते हैl ताकि लोग पढ़कर जागरूक हो सके या उसे पर अमल कर व्यवस्था बनाए रखें ।और व्यवस्थाओं की देखरेख की जिम्मेदारी भी शाखा प्रबंधक की होती है । परंतु इस कलयुगी रूपी मानव अधिकतर स्लोगन संदेश के विपरीत ही कार्य कर अपने आप में ही खुशी महसूस करता है।
जहा लिखा होता है कृपया वाहन यहां खड़ा न करें,और वही लोग अपना वाहन खड़ा करेंगे,चाहे भले ही किसी को निकलने तक के लिए जगह न बचे। यह हाल है रीठी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का जहा प्रबंधक से लेकर गार्ड तक दर्जनों कर्मचारी रोजाना तैनात रहते हैं परंतु मजाल है की कोई इस अव्यवस्था को सही कर दे ।
भले ही खड़े वाहनो से घुसकर आना जाना करना पड़ जाए, पर हमे क्या फर्क पड़ता है ।
जबकि यह सारी व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी सुरक्षा गार्ड की होती है परंतु वह कहां तैनात है उससे क्या काम लिया जा रहा है इसकी किसी को कोई खबर तक नहीं है । वही कायाकल्प जैसी अन्य योजनाओं के तहत लाखों रुपए का बजट शासन द्वारा आवंटित किया जाता है । परंतु वह खर्च सिर्फ कागजों मैं दिखाई देता है जमीनी स्तर पर नही । यदि होता तो बाहर मरीजों के बैठने के लिए उत्तम व्यवस्था ,पार्किंग व्यवस्था पेयजल व्यवस्था,साफ-सफाई, सुरक्षा गार्ड व्यवस्था आदि अवश्य ही नजर आती ।परंतु इन सारी मूलभूत व्यवस्थाओं को अस्पताल प्रबंधक नजर अंदाज कर रहे हैं तो आम जनता और कर्मचारी क्या करें ।
वही यहां के रहवासियों का कहना की इन सब व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी अस्पताल प्रबंधन की होती है जिसे वह शीघ्र से शीघ्र मूलभूत सुविधाओं को पूर्ण करें। ताकि मरीजों और उनके साथ आने वाले परिजनों को किसी भी प्रकार की कोई परेशानी ना हो सके ।
हरिशंकर बेन


