कहते हैं कि दर्पण कभी झूठ नहीं बोलता, लेकिन रीठी जनपद पंचायत की अधिकांश ग्राम पंचायतो ने तो, दर्पण को भी धोखा देना सीख लिया है! सरकार की पारदर्शी व्यवस्था को बताकर पंचायत के कर्मचारी “पंचायत दर्पण पोर्टल” पर धुंधले बिल अपलोड कर रहे हैं..ताकि ना आंखें पढ़ पाए, ना सच्चाई सामने आ सके!
कटनी जिले की जनपद पंचायत रीठी की अधिकांश ग्राम पंचायतो में सरपंच सचिव द्वारा शातिर खेल खेला जा रहा है। शासन ने जिस पोर्टल को पारदर्शिता की मिसाल बनाकर पेश किया था, वही पोर्टल अब भ्रष्टाचारियों के लिए कमाई का जरिया बन चुका है। बिल ऐसे अपलोड किए जा रहे हैं कि आम आदमी तो छोड़िए, अधिकारी भी उसकी इबारत नहीं पढ़ सकते है ।
इसका जिम्मेदार कौन है पंचायत के वे कर्मचारी जो दफ्तर की दीवारों के पीछे बैठकर फाइलों में खेल करते हैंl या वो जो पोर्टल पर दस्तावेज अपलोड कर देते हैं जो दिखते तो हैं, लेकिन पढ़े नहीं जा सकते। बिलों की इमेज ऐसी कि जैसे जानबूझकर धुंधली की गई हो ,ताकि कोई सवाल ही न पूछ सके।
जबकि शासन का आदेश साफ है – हर भुगतान से पहले और बाद में बिल साफ-सुथरे ढंग से पोर्टल पर अपलोड हों, ताकि जनता भी जान सके कि उनके गांव का पैसा कहां और कैसे खर्च हो रहा है। लेकिन यहां तो खेल ही उल्टा चल रहा है। पैसा निकाला जा रहा है, लेकिन काम का कोई ठोस सुबूत जनता को दिखाने लायक नहीं छोड़ा जाता है।
अब जरा सोचिए – जब दस्तावेज ही नहीं पढ़े जा सकते, तो फिर उन पर भुगतान किस आधार पर हो रहा है? क्या ये पारदर्शिता है? या फिर यह भ्रष्टाचार गड़बड़ी की ऐसी कहानी है, जिसे पूरे सिस्टम ने मिलकर लिखा है?
सबसे बड़ा सवाल – क्या पोर्टल सिर्फ दिखाने के लिए है? क्या जनता को गुमराह करने का ये नया डिजिटल तरीका निकाला गया है? और जब ये सब खुलेआम हो रहा है, तो जनपद के अधिकारी आंख मूंदे क्यों बैठे हैं,? क्या यह सब इनकी मिलीभगत से हो रहा है ।
जनता अब सवाल पूछ रही है- लेकिन जवाब देने वाला कोई नहीं। पंचायतों में भ्रष्टाचार का ये खेल अब डिजिटल दौर में भी जारी है- फर्क बस इतना है कि अब घोटाले ऑनलाइन अपलोड हो रहे हैं… और जनता देख रही है एक धुंधला सा सच,,।कई ऐसी ग्राम पंचायत भी हैं जिनमें नियम विरुद्ध बिना सरपंच सचिव की सील साइन के बिना ही बिल अपलोड कर,भुगतान किया जा रहा हैं ।
इनका कहना है
यदि पंचायत में नियम विरुद्ध तरीके से बिलों को जारी कर अपलोड किया जा रहा है तो उसकी जांच का उचित कार्रवाई की जाएगी,,।
राजेश नरेंद्र सिंह
सीईओ रीठी
हरिशंकर बेन


