देश मैं डॉक्टर को भगवान का दूसरा रूप माना जाता है l वहीं शासन ने भी स्वास्थ्य केंद्रों को आरोग्य मंदिर का नाम दिया है। और इस मंदिर में देवी देवता याने कि (CHO) कम्युनिटी हेल्थ ऑफीसर को बैठाया गया है। ताकि ग्रामीण समुदाय में प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान की जा सके और सार्वजनिक स्वास्थ्य कार्यक्रमों को लागू तथा स्वास्थ्य और कल्याण केंद्रों में कार्य करना जहां वे बुनियादी चिकित्सा देखभाल, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, परिवार नियोजन, संचारी रोग नियंत्रण,गर्भवती महिलाओं का टीकाकरण क्षय रोग (टीवी) और टेली-परामर्श जैसी सेवाएं प्रदान की जा सके।
परंतु कटनी जिले की रीठी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र क्षेत्र मैं स्वास्थ्य सेवाओं की हालात बहुत ही दयनीय होती जा रही है। जानकारी अनुसार बताया जाता हैं कि रीठी सीएचसी मैं लगभग 17 आरोग्य मंदिर खोले गए है l जिनमे हर मंदिर पर एक देवी या देवता याने कि सीएचओ बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मुहिया करने के लिए बैठाए गए है l यह बात खुद रीठी अस्पताल मैं सीएचओ और एएनएम की समीक्षा बैठक के दौरान जिला स्वास्थ्य अधिकारी ने बताई थी । साथ ही सभी सीएचओ को निर्देशित भी किया था कि रोजाना आरोग्य मंदिरो को खोले , उस मंदिर को ताला नही लगना चाहिए।
लेकिन अधिकतर सीएचओ ने अपने अधिकारी तक की बात को अनसुना कर वह अपनी मर्जी अनुसार ही घर से ही कागजों पर स्वास्थ्य सेवाएं मुहिया करा रही है ।चाहे वह किसी भी क्षेत्र के हो ।कुछ सीएचओ तो अनजान नंबर देखकर मरीजों का फोन तक उठाना मुनासिब नहीं समझते है
कहने को तो यह सभी जगह पर सीएचओ और एएनएम तैनात कर दिए गए हैं। लेकिन केंद्रों में अक्सर ताला लगा दिखाई देता है, ग्रामीणों ने बताया कि सीएचओ सप्ताह में सिर्फ एक दिन ही टीकाकरण के लिए ही को आती है और बाकी दोनों ताला लगा रहता है ।ऐसी स्थिति में ग्रामीणों को इलाज कराने के लिए मोटी रकम खर्च कर झोलाछाप डॉक्टरों की शरण लेनी पड़ती है। जबकि बरसाती मौसम में अधिकतर मौसमी बीमारियां एवं जहरीले जीव जंतुओ का खतरा भी बना रहता है ऐसी स्थिति में केंद्र में ताला लगा होना मरीजों की जान के साथ खिलवाड़ होने जैसा है ।
वही बताया जाता है की रीठी सीएससी में बीएमओ डॉक्टर ओपीडी पर नहीं बैठते है और वह ओपीडी मैं सीएचओ को तैनात कर देते है। ऐसी स्थिति में आरोग्य मंदिरो में ताला लगा रहना लाजमी है । परंतु इससे अधिकारियों को कोई फर्क नहीं पड़ता हैं की चाहे ग्रामीण क्षेत्रों में लोगो इलाज मिले या ना मिले
वहीं ग्रामीणों ने उच्च अधिकारियों से इस स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही की जांच व दोषियों पर कार्रवाई करने की मांग की है ।
हरिशंकर बेन


