सरकारी अस्पताल में डॉक्टरों का समय नदारत होना एक आम बात सी हो गई है । शासन भले ही सरकारी अस्पतालों को सुबह 9 बजे से दोपहर 2 तक और साम 5 बजे से 6 बजे तक ओपीडी और डॉक्टरों की उपस्थिति के निर्देश दिए हो।लेकिन डॉक्टर और कर्मचारी कभी भी समय पर अस्पताल नहीं पहुंचते हैं ।
यह कोई कहानी नहीं बल्कि हकीकत है रीठी सामुदायिक केंद्र की । जहा आज सुबह कुत्ते के हमले से घायल हुआ ग्राम देवरी निवासी,केशव प्रसाद पिता स्वर्गीय दरवारी लोधी रीठी सरकारी अस्पताल इलाज के लिए पहुंचा। लेकिन ओपीडी बंद और डॉक्टर नदारत मिलने पर और दर्द से चिल्लाने लगा जिसकी आवाज सुन समय पर ड्यूटी पर तैनात सिस्टर जया चौहान ने प्रथम उपचार कर डॉक्टर का इंतजार करने कहा ।
लेकिन डॉक्टर और कर्मचारियों को इसकी कोई फिक्र नहीं थी वह तो घर में आराम फरमा रहे थे। जबकि आकस्मिक घटना दुर्घटना होने पर ही आपातकालीन स्वस्थ्य सेवाएं 24 घंटे के लिए खोली गई है ।
अब प्रश्न यह उठता है कि जब शासन ने ओपीडी खोले जाने का समय निर्धारित किया है तो क्यों डॉक्टर समय पर उपस्थित नहीं होते,आखिर क्यों किसी की जान से साथ खिलवाड़ किया जा रहा है ।
हरिशंकर बेन


