पुरी में भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा शुरू हो गई है, जिसे ‘पहांडी’ अनुष्ठान कहा जाता है. देश-विदेश से लाखों की संख्या में श्रद्धालु रथ यात्रा जुलूस में शामिल होने के लिए पुरी में जुटे हैं. भगवान बलभद्र, देवी सुभद्रा और भगवान जगन्नाथ को मंदिर से सिंह द्वार के सामने खड़े उनके संबंधित रथों तक ले जाया जाता है. इस दौरान विधि-विधान से पूजा-पाठ होता है और भव्य जुलूस निकलता है, सिंह द्वारा से भगवान बलभद्र, देवी सुभद्रा और महाप्रभु जगन्नाथ के रथों को खींचकर श्री गुंडिचा मंदिर ले जाया जाता है, जो पुरी जगन्नाथ मंदिर से लगभग 2.6 किलोमीटर दूर है. गुंडिचा मंदिर महाप्रभु जगन्नाथ, उनके भाई भगवान बलभद्र और बहन देवी सुभद्रा के मौसी का घर माना जाता है.
मंगल आरती और विधि विधान से पूजा-पाठ करने के बाद भगवान जगन्नाथ, देवी सुभद्रा और भगवान बलभद्र को 12वीं शताब्दी के मंदिर से निकालकर सिंह द्वार पर खड़े उनके रथों नंदी घोष, दर्पदलन और तालध्वज पर विराजमान किया गया. भोई राजवंश के मुखिया ने रथ यात्रा के रास्ते को सोने की झाड़ू से बुहारा.


