स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा खोले गए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों का ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया करने के लिए महत्वपूर्ण योगदान हैं। ये केंद्र आमतौर पर बीमारियों की रोकथाम, उपचार और स्वास्थ्य शिक्षा जैसी बुनियादी स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करते हैं। परंतु इन स्वास्थ्य केंद्रों में अक्सर ताले लटके होने की तस्वीरे सामने आती हैं, जिसका मतलब है कि ये केंद्र या तो पूरी तरह से बंद हैं या फिर स्वास्थ्य कर्मचारी ठीक से काम नहीं कर रहे हैं । जी हां एक ऐसी ही तस्वीर कटनी जिले रीठी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र क्षेत्र के बड़गांव में संचालित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की सामने आई है।
अक्सर यहां ताला लटका होने से क्षेत्र की आम जनता को स्वास्थ्य सुविधा मुहैया ना होने से क्षेत्रीय जनता में भारी आक्रोश है। ग्रामीणों ने बताया कि इस प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में स्वास्थ्यकर्मियों की नियुक्ति की गई है लेकिन राजनीतिक गलियारे में पकड़ मजबूत होने से अपना अटैचमेंट और कही करवा रखा है।जिसके कारण स्वास्थ्य केंद्र में स्वास्थ्य सेवाए सुचारू रूप से नही मिलने या ताला लगा होने से परेशान होकर ग्रामीणों को लगभग 15 किलोमीटर दूर रीठी अस्पताल या ग्राम में ही किसी झोलाछाप की शरण लेनी पड़ती है। विभाग की उदासीनता के कारण स्वास्थ्य केंद्र में ताला लगा होने पर इसका सीधा असर ग्रामीण लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ता है। उन्हें बीमारियों का इलाज कराने, गर्भवती महिलाओं को टीकाकरण कराने और अन्य आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएं प्राप्त होने से वंचित हो रहे हैं,या इलाज कराने दूर- दराज के इलाकों में जाना पड़ता है, जिससे उनके लिए मुश्किलें और बढ़ जाती हैं ।ग्रामीणों की मांग है। कि सरकार इस समस्या को गंभीरता से ले और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को ठीक से चलाने के लिए आवश्यक कदम उठाए, ताकि ग्रामीण लोगों को स्वास्थ्य सेवाएं आसानी से मिल सकें. ।
हरिशंकर बेन


