शासन स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर जितना जोर लगा रही है उतना ही अधिकारी कर्मचारी लापरवाही बरतने में कोई कसर नहीं लग रहे । मरीज को बिना बेडशीट के संक्रमण खतरे के बीच अपना इलाज करवाना मजबूरी बन रहा है ।अस्पताल से लेकर लैब तक भारी गंदगी में मरीजों को ,संक्रमण के खतरे की दास्तान , कटनी जिले की रीठी सरकारी अस्पताल ब्यया कर रहा है । जहां स्वास्थ्य सेवाओं की हकीकत खुद अपनी कहानी कह रही है। अस्पताल और लैब,जहाँ रोज़ाना दर्जनों मरीज़ अपना इलाज और जांच कराने आते हैं,
वहां गंदगी और मवेशियों का गोबर बिखरा पड़ा है। जहां संक्रमण से बचाने के इंतज़ाम व सलाह दी जाती है, वहीं गंदगी और लापरवाही का आलम दिखता है। मरीजों का कहना है कि स्वच्छता सिर्फ़ कागजों तक सीमित है। न डॉक्टर समय पर आते हैं, न इलाज मिल पाता है,अब तो अस्पताल परिसर में आवारा कुत्तों और मवेशियों का खुलेआम घूमना अस्पताल की सुरक्षा पर सवाल खड़ा कर रहा है । सबसे चिंताजनक बात यह है कि लैब जैसी संवेदनशील जगह में भी कोई साफ-सफाई नहीं है। गोबर और गंदगी के बीच जांच प्रक्रिया होना न केवल मरीज़ों के लिए,बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए संक्रमण का खतरा बन चुका है।
अब सवाल यह उठता है कि क्या स्वास्थ्य विभाग की नज़र इस बदहाली पर नहीं है? जबकि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के तहत और रोगी कल्याण समिति द्वारा लाखों रुपए का बजट जारी किया जाता है ।उसके बावजूद भी आम जनता असुविधाओं और लापरवाही का शिकार बनती जा रही हैं।
हरिशंकर बेन


