• मुखपृष्ठ
  • नियम एवं शर्ते
  • गोपनीयता
  • खंडन
  • शिकायत/ सुझाव
  • हमारे बारे में
  • संपर्क
No Result
View All Result
Tuesday, June 23, 2026
MP NEWS CAST
NEWSLETTER
  • Home
  • हमारा शहर
  • प्रादेशिक ख़बरें
    • मध्यप्रदेश
      • भोपाल
      • अनुपपुर
      • दमोह
      • कटनी
      • सागर
      • उत्तरप्रदेश
        • अयोध्या
        • आगरा
        • कन्नौज
        • कौशांबी
        • चंदौली
        • चित्रकूट
        • जालौन
        • जौनपुर
      • उत्तराखण्ड
        • नैनीताल
      • गुजरात
        • अहमदाबाद
      • राजस्थान
        • भरतपुर
  • पॉलीटिक्स
  • मनोरंजन
  • लाइफ स्टाइल
  • व्यवसाय
  • स्वास्थ्य
  • Home
  • हमारा शहर
  • प्रादेशिक ख़बरें
    • मध्यप्रदेश
      • भोपाल
      • अनुपपुर
      • दमोह
      • कटनी
      • सागर
      • उत्तरप्रदेश
        • अयोध्या
        • आगरा
        • कन्नौज
        • कौशांबी
        • चंदौली
        • चित्रकूट
        • जालौन
        • जौनपुर
      • उत्तराखण्ड
        • नैनीताल
      • गुजरात
        • अहमदाबाद
      • राजस्थान
        • भरतपुर
  • पॉलीटिक्स
  • मनोरंजन
  • लाइफ स्टाइल
  • व्यवसाय
  • स्वास्थ्य
No Result
View All Result
MP NEWS CAST
No Result
View All Result
Home मध्यप्रदेश छिन्दवाडा

*”सफलता की कहानी”* *”स्वावलंबी महिला, सशक्त राष्ट्र”* *मारई की वंदना इंग्ले ने जैविक खेती से दी जीवन को नई दिशा* *लखपति दीदी बनी, कई प्रमाण पत्र और सम्मान भी प्राप्त हुये*

by Manish Gautam Chiefeditor
May 31, 2025
in छिन्दवाडा
0
*”सफलता की कहानी”*  *”स्वावलंबी महिला, सशक्त राष्ट्र”*  *मारई की वंदना इंग्ले ने जैविक खेती से दी जीवन को नई दिशा*  *लखपति दीदी बनी, कई प्रमाण पत्र और सम्मान भी प्राप्त हुये*
0
SHARES
0
VIEWS
FacebookTwitterWhatsappTelegram

छिन्‍दवाड़ा/31 मई 2025/छिन्दवाड़ा जिले के मारई गांव की श्रीमती वंदना इंग्ले, एक ऐसी महिला है, जिनकी कहानी मेहनत, संघर्ष और आत्मनिर्भरता की एक प्रेरणादायक मिसाल है। पहले वे पारंपरिक रासायनिक खेती करती थीं, जिससे उत्पादन तो सामान्य था, लेकिन उनकी भूमि की उर्वरता धीरे-धीरे कम होती जा रही थी। इस समस्या से निजात पाने और कुछ नया करने की चाह ने उन्हें जैविक खेती की ओर मोड़ा।जैविक खेती को अपनाने के बाद उनके जीवन की दिशा और दशा बदल गई।उन्नत कृषक और जैविक कार्य करने हेतु कई बार इन्हें प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया है।

उनकी यह नई यात्रा 2013-14 में शुरू हुई, जब उन्हें “सब मिशन ऑन एग्रीकल्चर एक्सटेंशन योजना” के तहत प्रशिक्षण मिला। इस दौरान, उन्होंने जैविक खेती के महत्व को समझा और इसे अपनाने का दृढ़ निश्चय किया। आत्मा परियोजना के माध्यम से फसल प्रदर्शन, भ्रमण और प्रशिक्षण से प्राप्त ज्ञान को उन्होंने अपने खेतों में लागू किया।

2015-16 में, आत्मा परियोजना की पी.के.वी.वाय योजना के अंतर्गत, उनके खेत में 8X4X1 आकार का वर्मी कम्पोस्ट टैंक बनाया गया और उन्हें एक किलो केंचुए दिए गए। यहीं से शुरू हुआ वर्मी कम्पोस्ट खाद के निर्माण और बिक्री का सफर, जिसने उनकी जिंदगी को पूरी तरह से बदल दिया।

आज, वंदना इंग्ले के पास 12X12X1 आकार के दो बड़े वर्मी कम्पोस्ट टैंक हैं। हर 45 दिनों में तैयार खाद निकलती है, जिसे वे छानकर और पैक करके बेचती हैं। इसके अलावा, उन्होंने जीवामृत, नीमास्त्र, पांचपत्ती काढ़ा और ब्रह्मास्त्र जैसे प्राकृतिक खेती के उत्पाद भी बनाने शुरू किए, जिन्हें वे बोतलों में भरकर बेच रही हैं।

अपनी व्यक्तिगत सफलता के साथ-साथ, वंदना इंग्ले ने गांव की अन्य महिलाओं को भी सशक्त बनाने का काम किया। उन्होंने महिला समूहों का गठन किया, जिससे वे भी आर्थिक रूप से सक्षम हो सकें। इसके अलावा, वे सृजन एनजीओ की सक्रिय सदस्य भी बनीं, जिसके माध्यम से उन्हें जीवामृत निर्माण के लिए एक स्वचालित मशीन भी मिली।

उनकी मेहनत को प्रशासन ने भी सराहा। कलेक्टर और कृषि विभाग के उप संचालक ने उनके कार्यों को देखा और प्रशंसा की। उन्होंने अपने महिला समूह के लिए आत्मा परियोजना से 10,000 रुपये की सीडमनी और 20,000 रुपये का “सर्वश्रेष्ठ समूह पुरस्कार” भी जीता।

आज, वंदना इंग्ले सालाना 2,40,000 रुपये की शुद्ध आय अर्जित कर रही हैं, जो वर्मी कम्पोस्ट, केंचुए, जैविक उत्पादों और दूध की बिक्री से आती है। अपने कार्यों से, वंदना इंग्ले ने गांव की कई महिलाओं को प्रेरित किया और उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने का रास्ता दिखाया। उन्हें आत्मा परियोजना, कृषि विभाग, कृषि विज्ञान केंद्र, आजीविका मिशन और सृजन एनजीओ द्वारा कई प्रमाण पत्र और सम्मान प्राप्त हुए हैं। उन्हें दिल्ली,

बैतूल, भोपाल, जबलपुर, सिवनी और नरसिंहपुर जैसे विभिन्न जिलों में भ्रमण और प्रशिक्षण के लिए भी भेजा गया। वहाँ से नई तकनीकें सीखकर, उन्होंने उन्हें अपने खेतों में लागू किया और अपनी कृषि को और भी उन्नत बनाया।

वंदना इंग्ले की कहानी मेहनत, नवाचार और आत्मनिर्भरता का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। उनकी सफलता को देखकर, आज आसपास के किसान और महिलाएं भी कृषि, पशुपालन और जैविक खेती को अपनाकर आत्मनिर्भर बन रहे हैं।

*संवाददाता शुभम सहारे छिंदवाड़ा*

Share this:

  • Share on Facebook (Opens in new window) Facebook
  • Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp

Like this:

Like Loading…
Manish Gautam Chiefeditor

Manish Gautam Chiefeditor

Next Post
*सर्विलांस टीम द्वारा खोए हुए 151 मोबाइल (अनुमानित कीमत लगभग 25 लाख रूपये) बरामद कर उनके मालिकों को सुपुर्द किये गये ।*

*सर्विलांस टीम द्वारा खोए हुए 151 मोबाइल (अनुमानित कीमत लगभग 25 लाख रूपये) बरामद कर उनके मालिकों को सुपुर्द किये गये ।*

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

© 2020 MP News Cast - Director Manish Gautam.

No Result
View All Result
  • About Us
  • Client Portal
  • Complaints and Feedback
  • Contact
  • Home 1
  • Privacy Policy
  • Privacy Policy
  • Rules and Regulations

© 2020 MP News Cast - Director Manish Gautam.

%d