उमरियापान:- चैत्र नवरात्रि के आखरी दिन सोमवार को देवी मंदिरों में बोए गए जवारों का विसर्जन किया गया।चल समारोह के बाद नगर के जलाशयों में जवारें विसर्जन किये गए। अष्ठमी और रामनवमीं पर सुबह से ही देवी मंदिरों में मातारानी के पूजन अर्चन और आठें-अठवाई चढ़ाने का क्रम जारी रहा। सोमवार को मंदिरों में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ रही।मंदिरों में बोए गए जवारें की पूजा अर्चना के बाद शाम होते ही जवारें विसर्जन के लिए चल समारोह शुरू हुआ। उमरियापान में जवारा बस्ती अंदर बड़ी माई मंदिर,चंडी माता,कटरा बाजार, चंडी माता मंदिर, बस स्टेण्ड, झंडा चौक ,कुदवारी मोहल्ला सहित नगर के प्रमुख मार्गों से होकर गुजरे।इस दौरान माता के भक्त मुंह में बाना छेदकर तो कोई भक्त जलता हुआ खप्पर हाथों पर लेकर जवारों के आगे -आगे नाचते चलते रहे।पीछे -पीछे सिर पर जवारे कलश रखे महिलाएं और युवतियां चलती रहीं।खप्पर लिए नाच रही
काली जवारा चल समारोह (जुलूस) में आकर्षण का केंद्र रहा।नगर के मुख्य मार्गों से होते हुए क्यूली तलैया और पुरैना तालाब में पूजन अर्चन के बाद जवारों को विसर्जित किया गया।जावरा देखने उमरियापान सहित आसपास के लोग बड़ी संख्या में शामिल हुए। इस दौरान थाना प्रभारी दिनेश तिवारी पुलिस के जवानों के साथ तैनात रहे।इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में भी चल समारोह के साथ जवारें विसर्जित किए गए।
रिपोर्टर राजेंद्र कुमार चौरसिया धीमरखेडा कटनी


