• मुखपृष्ठ
  • नियम एवं शर्ते
  • गोपनीयता
  • खंडन
  • शिकायत/ सुझाव
  • हमारे बारे में
  • संपर्क
No Result
View All Result
Friday, June 19, 2026
MP NEWS CAST
NEWSLETTER
  • Home
  • हमारा शहर
  • प्रादेशिक ख़बरें
    • मध्यप्रदेश
      • भोपाल
      • अनुपपुर
      • दमोह
      • कटनी
      • सागर
      • उत्तरप्रदेश
        • अयोध्या
        • आगरा
        • कन्नौज
        • कौशांबी
        • चंदौली
        • चित्रकूट
        • जालौन
        • जौनपुर
      • उत्तराखण्ड
        • नैनीताल
      • गुजरात
        • अहमदाबाद
      • राजस्थान
        • भरतपुर
  • पॉलीटिक्स
  • मनोरंजन
  • लाइफ स्टाइल
  • व्यवसाय
  • स्वास्थ्य
  • Home
  • हमारा शहर
  • प्रादेशिक ख़बरें
    • मध्यप्रदेश
      • भोपाल
      • अनुपपुर
      • दमोह
      • कटनी
      • सागर
      • उत्तरप्रदेश
        • अयोध्या
        • आगरा
        • कन्नौज
        • कौशांबी
        • चंदौली
        • चित्रकूट
        • जालौन
        • जौनपुर
      • उत्तराखण्ड
        • नैनीताल
      • गुजरात
        • अहमदाबाद
      • राजस्थान
        • भरतपुर
  • पॉलीटिक्स
  • मनोरंजन
  • लाइफ स्टाइल
  • व्यवसाय
  • स्वास्थ्य
No Result
View All Result
MP NEWS CAST
No Result
View All Result
Home ज्योतिष

*वृन्दावन में एक बिहारी जी का परम् भक्त था, पेशे से वह एक दुकानदार था। आईए देखते*

by Manish Gautam Chiefeditor
February 6, 2025
in ज्योतिष
0
*वृन्दावन में एक बिहारी जी का परम् भक्त था, पेशे से वह एक दुकानदार था। आईए देखते*
0
SHARES
0
VIEWS
FacebookTwitterWhatsappTelegram

MP NEWS CAST

वह रोज प्रातः बिहारी जी के मंदिर जाता था और फिर गौ सेवा में समय देता और गरीब, बीमार और असहाय लोगों के उपचार और भोजन और दवा का प्रबन्ध करता।

वह बिहारी जी के मंदिर जाता न तो कोई दीपक जलाता न कोई माला न फूल न कोई प्रसाद उसे अपने पिता की कही एक बात जो उसने बचपन से अपने पिता से ग्रहण करी थी और जीवन मन्त्र बना ली।

उसके पिता ने कहा था बिहारी जी की सेवा तो भाव से होती है बिहारी तो उसकी सेवा स्वीकार करते हैं, जो उनकी हर सन्तान की जो किसी न किसी कारण दुखी है उनकी सेवा करता है। जो पशु-पक्षियों की सेवा करता है देखो भगवान ने स्वयं गौ सेवा की थी ।

लेकिन एक बात थी मंदिर में बिहारी जी की जगह उसे एक ज्योति दिखाई देती थी, जबकि मंदिर में बाकी के सभी भक्त कहते वाह ! आज बिहारी जी का श्रृंगार कितना अच्छा है, बिहारी जी का मुकुट ऐसा, उनकी पोशाक ऐसी,

तो वह भक्त सोचता… बिहारी जी सबको दर्शन देते हैं , पर मुझे क्यों केवल एक ज्योति दिखायी देती है।

हर दिन ऐसा होता।

एक दिन बिहारी जी से बोला ऐसी क्या बात है कि आप सबको तो दर्शन देते हैं पर मुझे दिखायी नहीं देते। कल आप को मुझे दर्शन देना ही पड़ेगा।

अगले दिन मंदिर गया फिर बिहारी जी उसे ज्योत के रूप में दिखे ।

वह बोला बिहारी जी अगर कल मुझे आपने दर्शन नहीं दिये तो में यमुना जी में डूबकर मर जाँऊगा।

उसी रात में बिहारी जी एक कोढ़ी के सपने में आये जोकि मंदिर के रास्ते में बैठा रहता था, और बोले तुम्हे अपना कोड़ ठीक करना है
वह कोढ़ी बोला- हाँ भगवान,

भगवान बोले-तो सुबह मंदिर के रास्ते से एक भक्त निकलेगा तुम उसके चरण पकड़ लेना और तब तक मत छोड़ना जब तक वह ये न कह दे, कि बिहारी जी तुम्हारा कोढ ठीक करें।

कोढ़ी बोला पर प्रभु वहां तो रोज बहुत से भक्त आते हैं मैं उन्हें पहचानूगां कैसे ?

भगवान ने कहा जिसके पैरों से तुम्हे प्रकाश निकलता दिखायी दे वही मेरा वह भक्त है।

अगले दिन वह कोढ़ी रास्ते में बैठ गया जैसे ही वह भक्त निकला उसने चरण पकड़ लिए और बोला पहले आप कहो कि मेरा कोड़ ठीक हो जाये।

वह भक्त बोला मेरे कहने से क्या होगा आप मेरे पैर छोड़ दीजिये, कोढ़ी बोला जब तक आप ये नहीं कह देते की बिहारी जी तुम्हारा कोड़ ठीक करें तब तक मैं आपके चरण नहीं छोडूगा।

भक्त वैसे ही चिंता में था, कि बिहारी जी दर्शन नहीं दे रहे, ऊपर से ये कोढ़ी पीछे पड़ गया तो वह झुँझलाकर बोला जाओ बिहारी जी तुम्हारा कोड़ ठीक करे और मंदिर चला गया,

मंदिर जाकर क्या देखता है बिहारीजी के दर्शन हो रहे हैं, बिहारी जी से पूछने लगा अब तक आप मुझे दर्शन क्यों नहीं दे रहे थे?

तो बिहारीजी बोले: तुम मेरे निष्काम भक्त हो आज तक तुमने मुझसे कभी कुछ नहीं माँगा इसलिए मैं क्या मुँह लेकर तुम्हे दर्शन देता, यहाँ सभी भक्त कुछ न कुछ माँगते रहते हैं।

इसलिए मैं उनसे नज़रे मिला सकता हूँ, पर आज तुमने रास्ते में उस कोड़ी से कहा-कि बिहारी जी तुम्हारा कोड़ ठीक कर दे इसलिए में तुम्हे दर्शन
देने आ गया।

मित्रों भगवान की निष्काम भक्ति ही करनी चाहिये, भगवान की भक्ति करके यदि संसार के ही भोग, सुख ही माँगे तो फिर वह भक्ति नहीं वह तो सौदेबाजी है और यह कथा जो कहना चाहती है सबसे बड़ी परमात्म सेवा उनकी है जो वास्तव में बेबस और लाचार हैं। असहाय और दुःखियों की निस्वार्थ सेवा इस जगत की सबसे बड़ी सेवा है।

Share this:

  • Share on Facebook (Opens in new window) Facebook
  • Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp

Like this:

Like Loading…
Manish Gautam Chiefeditor

Manish Gautam Chiefeditor

Next Post
शिक्षक निकला करोड़पति, सुरेश भदौरिया नामक शिक्षक के घर से EOW को मिली 8 करोड़ से अधिक की सम्पत्ति, कार्रवाई जारी।

शिक्षक निकला करोड़पति, सुरेश भदौरिया नामक शिक्षक के घर से EOW को मिली 8 करोड़ से अधिक की सम्पत्ति, कार्रवाई जारी।

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

© 2020 MP News Cast - Director Manish Gautam.

No Result
View All Result
  • About Us
  • Client Portal
  • Complaints and Feedback
  • Contact
  • Home 1
  • Privacy Policy
  • Privacy Policy
  • Rules and Regulations

© 2020 MP News Cast - Director Manish Gautam.

%d