🔳कड़कनाथ मुर्गा और बैकयार्ड कुक्कुट पालन से मालामाल हुए यशपाल
कटनी। जिला मुख्यालय कटनी से करीब 8 किलोमीटर दूर ग्राम गाताखेड़ा निवासी यशपाल खन्ना ने पशुपालन एवं डेयरी विकास विभाग के तहत संचालित राष्ट्रीय पशुधन मिशन योजनान्तर्गत कड़कनाथ मुर्गा और बैकयार्ड कुक्कुट पालन कर जहां 4 व्यक्तियों को हर माह रोजगार दे रहे हैं , वहीं इस साल 10 से 12 लाख रुपए तक की सालाना आमदनी होने के प्रति आशान्वित हैं।श्री खन्ना को इसके पहले वर्ष 2022-23 में करीब साढ़े चार से 5 लाख रुपए और वर्ष 2023-24 में करीब 6 लाख रुपए की कमाई हुई थी।जो साल -दर- साल बढ़ती ही जा रही है।
इस प्रकार कभी चाय बेंच कर बमुश्किल परिवार चलाने वाले श्री यशपाल खन्ना आज कड़कनाथ और बैकयार्ड कुक्कुट पालन कर समृद्धि की इबारत लिख कर , दूसरों के लिए प्रेरणास्रोत और मिसाल बन गये हैं। उपसंचालक पशुपालन और डेयरी विकास डॉ आर के सिंह ने बताया कि श्री खन्ना को राष्ट्रीय पशुधन मिशन के तहत कड़कनाथ और बैकयार्ड कुक्कुट पालन हेतु 36 लाख रुपए का प्रोजेक्ट स्वीकृत किया गया था। जिसमें 50 फीसदी 18 लाख रुपए अनुदान राशि शामिल थी। प्रोजेक्ट स्वीकृत होने के बाद श्री खन्ना द्वारा कड़कनाथ और बैकयार्ड कुक्कुट पालन हेतु शेड बनवाने, बोरिंग आदि कराने के बाद 9 लाख रुपए दिए गए, वहीं पूरा प्रोजेक्ट शुरू होने के बाद 9 लाख रुपए की और अनुदान राशि योजना के प्रावधान के तहत प्रदान किया गया। वर्तमान में श्री खन्ना के पास कड़कनाथ और बैकयार्ड रंगीन कुक्कुट को मिलाकर करीब 2100 मुर्गियां हैं। कड़कनाथ मुर्गा 800 से 1 हजार रुपए प्रति नग और बैकयार्ड रंगीन कुक्कुट 500 से 600 रुपए प्रति नग बड़ी आसानी से बिक जाते हैं। श्री खन्ना द्वारा चूजों की बिक्री भी की जाती है। वे बताते हैं कि कड़कनाथ का 28 दिनों का एक चूजा 110 रूपए में और रंगीन बैकयार्ड कुक्कुट का एक चूजा 60 रुपए में बिक जाता है। कड़कनाथ मुर्गे की खासियत यह है कि यह अन्य मुर्गों की तुलना में कम बीमार पड़ते हैं, जिससे आपको मुर्गी पालन में कम लागत आती है. इसके अलावा, कड़कनाथ मुर्गे का मांस बहुत स्वादिष्ट होता है और इसमें कई पोषक तत्व होते हैं, जिससे इसकी मांग बाजार में बहुत ज्यादा है.
*इन जिलों में है चूजों की मांग*
श्री खन्ना के पोल्ट्री फार्म के कड़कनाथ और बैकयार्ड कुक्कुट के चूजों की मांग प्रदेश के डिंडोरी,मंडला, नरसिंहपुर, अनूपपुर, शहडोल, उमरिया,दमोह,सीधी, सिंगरौली और सतना जिलों में सर्वाधिक है। चूजों की बिक्री से श्री खन्ना को खासी आमदनी हो रही है। यशपाल खन्ना ने बताया कि इंक्यूबेटर में अंडों को तय तापमान पर रखा जाता है, फिर 18 दिन सेल्टर में और तीन दिन हैचरी में अंडा रखा जाता है।
*त्वचा के साथ दिल और आंखों को भी स्वस्थ रखता है कड़कनाथ*
कड़कनाथ में जहां प्रोटीन की प्रचुर मात्रा होती है. वहीं वसा न्यूनतम मात्रा में होता है. यह हृदय रोगियों और डायबिटीज पेशेंट के लिए उत्तम आहार माना जाता है।इसका मांस स्वादिष्ट और आसानी से पचने वाला होता है. कड़कनाथ ब्रीड के मीट में कोलेस्ट्रॉल लेवल भी बहुत कम है. जहां दूसरे चिकन में 20 से 21 पर्सेंट है तो इसमें 1 से 3 प्रतिशत के बीच में कोलेस्ट्रॉल लेवल है और जो प्रोटीन है वह बहुत अच्छा. इसमें 25 प्रतिशत प्रोटीन है और जो अन्य प्रजाति के मुर्गों में, 20 पर्सेंट होता है।इस तरह से रिसर्च कर यह पाया गया जितने भी रेस्पिरेट्री सिस्टम डिजीज है. कार्डियोलॉजिस्ट डिज़ीज़ ,इसके अलावा और जो प्रजनन संबंधित जो बीमारियां होती हैं, उसमें भी इसका बहुत अच्छा रिजल्ट देखा गया है।कड़कनाथ खाने से खून बढ़ने के साथ आंखों की रोशनी भी बढ़ती है।यह आंखों में मौजूद कॉर्निया को साफ रखता है. साथ ही यह आंखों के इन्फेक्शन से भी बचाता है. यह नाइट विजन को ठीक करने के साथ ही नाइट ब्लांइडेस से भी बचाता है। चिकित्सकों के मुताबिक कड़कनाथ मुर्गा में विटामिन-ई की मात्रा ज्यादा होती है। जो रेडिकल्स से छुटकारा दिलाता है. यह यूव्ही किरणों से बचाता है और त्वचा की नमी को बरकरार रखने का भी काम करता है। इसके अलावा इंसान के दिल को भी स्वस्थ रखता है. अन्य प्रजाति के मुर्गा की अपेक्षा इसमें वसा और कोलेस्ट्राल काफी कम होता है। जिससे मोटापा और हाइपरटेंशन जैसी बीमारी भी कम होती है।इसके अलावा सर्दी-जुकाम के लिए भी कड़कनाथ काफी अच्छा होता है।क्योंकि इसमें एंटी ऑक्सीडेंट्स पाए जाते हैं।इसकी तासीर गर्म होती है, जो ऐसी समस्याओं को ठीक करने के लिए बेहतर मानी जाती है।


