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*श्रीमद्भागवत कथा में छठवें दिन श्रीकृष्ण और रुक्मिणी विवाह के प्रसंग में बड़े ही धूमधाम से मनाया गया**

*जो भक्त कृष्ण रुक्मणी विवाह उत्सव में शामिल होते हैं उनकी वैवाहिक समस्या समाप्त होती हैं - किशोरी वैष्णवी गर्ग*

by Manish Gautam Chiefeditor
December 27, 2024
in दमोह
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*श्रीमद्भागवत कथा में छठवें दिन श्रीकृष्ण और रुक्मिणी विवाह के प्रसंग में बड़े ही धूमधाम से मनाया गया**
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*दमोह* हिंडोरिया – कथा व्यास किशोरी वैष्णवी गर्ग जी के मुखारविंद से मेंहलबार माता बरेजा प्रांगण चौरसिया समाज द्वारा आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के छठे दिन श्रीमद् भागवत कथा में श्रीकृष्ण रुक्मणी विवाह का आयोजन हुआ, जिसे बड़े ही धूमधाम से मनाया गया। श्रीमद भागवत कथा के छठवें दिन कथा व्यास किशोरी जी ने रास पंच अध्याय का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि महारास में पांच अध्याय है। उनमें गाए जाने वाले पंच गीत भागवत के पंच प्राण है। जो भी ठाकुरजी के इन पांच गीतों को भाव से गाता है, वह भव पार हो जाता है।
उन्हें वृंदावन की भक्ति सहज प्राप्त हो जाती है। कथा में भगवान का मथुरा प्रस्थान, कंस का वध, महर्षि संदीपनी के आश्रम में विद्या ग्रहण करना, कालयवन का वध, उधव गोपी संवाद, ऊधव द्वारा गोपियों को अपना गुरु बनाना, द्वारका की स्थापना व रुकमणी विवाह के प्रसंग का संगीतमय भावपूर्ण पाठ किया गया। भारी संख्या में भक्तगण दर्शन हेतु शामिल हुए आज पूरा प्रांगण श्रद्धालुओं से पूर्णरूपेण भरा था और सभी पुष्प वर्षा के साथ खूब झूम और नाच कर रहे थे। कथा के दौरान किशोरी जी ने कहा कि महारास में भगवान श्रीकृष्ण ने बांसुरी बजाकर गोपियों का आह्वान किया।
महारास लीला द्वारा ही जीवात्मा परमात्मा का ही मिलन हुआ। उन्होंने कहा कि भगवान कृष्ण ने 16 हजार कन्याओं से विवाह कर उनके साथ सुखमय जीवन बिताया। भगवान श्रीकृष्ण रुकमणी के विवाह की झांकी ने सभी को खूब आनंदित किया। भागवत कथा के छठवें दिन कथा स्थल पर रूकमणी विवाहउत्सव के आयोजन ने श्रद्धालुओं को झूमने पर मजबूर कर दिया। श्रीकृष्ण रुक्मणी की वरमाला पर जमकर फूलों की बरसात हुई।
कथावाचक किशोरी वैष्णवी गर्ग जी ने भागवत कथा के महत्व को बताते हुए कहा कि जो भक्त प्रेमी कृष्ण रुक्मणी के विवाह उत्सव में शामिल होते हैं उनकी वैवाहिक समस्या हमेशा के लिए समाप्त हो जाती है। कथा श्रवण के दौरान स्थानीय महिलाओं पर पांडवों के भाव अवतरित हुए। कथा वाचक ने कहा कि जीव परमात्मा का अंश है, इसलिए जीव के अंदर अपारशक्ति रहती है यदि कोई कमी रहती है, वह मात्र संकल्प की होती है। संकल्प व कपट रहित होने से प्रभु उसे निश्चित रूप से पूरा करेंगे। उन्होंने महारास लीला श्री उद्धव चरित्र श्री कृष्ण मथुरा गमन और श्री रुक्मणी विवाह महोत्सव प्रसंग पर विस्तृत विवरण दिया।
रुक्मणी विवाह महोत्सव प्रसंग पर व्याख्यान करते हुए उन्होंने कहा कि रुक्मणी के भाई ने उनका विवाह शिशुपाल के साथ सुनिश्चित किया था, लेकिन रुक्मणी ने संकल्प लिया था कि वह शिशुपाल को नहीं केवल नंद के लाला अर्थात श्री कृष्ण जी को पति के रूप में वरण करेंगे। उन्होंने कहा शिशुपाल असत्य मार्गी है। द्वारिकाधीश भगवान श्री कृष्ण सत्य मार्गी है। इसलिए वो असत्य को नहीं सत्य को अपनाएगी। अंत में भगवान श्रीद्वारकाधीशजी ने रुक्मणी के सत्य संकल्प को पूर्ण किया। उन्हें भार्या के रूप में वरण करके प्रधान पटरानी का स्थान दिया, रुक्मणी विवाह प्रसंग पर आगे कथावाचक ने कहा इस प्रसंग को श्रद्धा के साथ श्रवण करने से कन्याओं को अच्छे घर और वर की प्राप्ति होती है और दांपत्य जीवन सुखद रहता है।
मुख्य यजमान – समस्त चौरसिया समाज एवं सभी नगर बासी हिंडोरिया ने कथा श्रवण करने की आप सभी से कथा श्रवण करने की अपील की है।
शनिवार को श्री कृष्ण सुदामा चरित्र होगा । कथा व्यास किशोरी वैष्णवी गर्ग के यूट्यूब चैनल को सब्सक्राइब करें।कथा का समय दोपहर 2 बजे से श्रीहरि इच्छा तक।

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