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Home मध्यप्रदेश छिन्दवाडा

*सफलता की कहानी”* *मत्स्य पालन से लखपति बने श्री सुनील सिंगारे* *सालाना कमा रहे 8 लाख रूपये तक की आय*

by Manish Gautam Chiefeditor
December 24, 2024
in छिन्दवाडा
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*सफलता की कहानी”* *मत्स्य पालन से लखपति बने श्री सुनील सिंगारे* *सालाना कमा रहे 8 लाख रूपये तक की आय*
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*छिन्दवाड़ा, सिवनी, मंडला, जबलपुर, कानपुर जिले के साथ ही बिहार, झारखंड, यू.पी. तक भी करते है मत्स्य का परिवहन*

छिन्दवाड़ा/24 दिसम्बर 2024/ मध्यप्रदेश शासन और मत्स्य विभाग ग्रामीण क्षेत्रों में मत्स्य पालन और जल उत्पादकता को बढ़ावा देने के लिए निरंतर प्रयासरत हैं। प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना और अन्य योजनाओं के माध्यम से मत्स्य पालन से जुड़े उद्यमियों को आर्थिक सहायता, आधुनिक उपकरण और प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है। इन योजनाओं का उद्देश्य ग्रामीण युवाओं को स्व-रोजगार से जोड़ना, उनकी आय बढ़ाना और जल संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करना है।
मत्स्य विभाग की ओर से मछली पालकों को सब्सिडी, इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट, बीज वितरण और इन्सुलेटेड वाहन जैसी सुविधाओं के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसी प्रयास के अंतर्गत श्री सुनील सिंगारे जैसे उद्यमियों ने योजनाओं का लाभ उठाकर अपनी सफलता की कहानी लिखी है।

श्री सुनील सिंगारे की प्रेरणादायक यात्रा- श्री सुनील सिंगारे जिले के विकासखण्ड परासिया के ग्राम परसोली के निवासी हैं और राजीव गांधी मत्स्योद्योग सहकारी समिति मर्यादित कन्हरगांव के सक्रिय सदस्य हैं। शिक्षा में एम.ए. तक की डिग्री प्राप्त करने के बाद उन्होंने मत्स्य व्यवसाय में कदम रखा और अपने कठिन परिश्रम और दूरदर्शी सोच के साथ सफलता की एक नई कहानी लिखी।

शुरुआत और व्यवसाय में वृद्धि- श्री सिंगारे ने कन्हरगांव जलाशय में मछली पकड़ने का कार्य शुरू किया। शुरुआती दिनों में वे मछलियों को स्थानीय सोसायटी और व्यापारियों को बेचते थे जिससे उन्हें नियमित आमदनी प्राप्त होती थी। धीरे-धीरे उन्होंने अपने काम का दायरा बढ़ाया और जिले के बाहर सिवनी जिले में भी किसानों के निजी तालाब ठेके पर लेकर सिंगाड़ा उत्पादन शुरू किया। सिंगाड़े को मंडी में बेचने से उनकी आय में लगातार वृद्धि हुई।
“मत्स्य पालन बना उनकी पहचान,
हर कदम पर दिखाया आत्मसम्मान।
कभी जलाशय तो कभी सिंगाड़ा उत्पादन,
हर राह में पाई नई पहचान।”
आधुनिक तकनीक और योजनाओं का उपयोग- अपनी सफलता को और ऊंचाई पर ले जाने के लिए श्री सिंगारे ने प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना का लाभ उठाया और एक इन्सुलेटेड वाहन खरीदा। इस वाहन के जरिए उन्होंने कन्हरगांव और आस-पास के जलाशयों से मछलियां इकट्ठा करके उन्हें प्रदेश और अन्य राज्यों में पहुंचाना शुरू किया।
व्यापक बाजार और आय में वृद्धि- श्री सिंगारे अब अपनी मछलियों को सिवनी, मंडला, जबलपुर, नागपुर जैसे शहरों के साथ-साथ बिहार (मुगलसराय), झारखंड (रांची), उत्तर प्रदेश (गोरखपुर) जैसे राज्यों में भी बेचते हैं। उनका इन्सुलेटेड वाहन एक बार में 3 टन मछली का परिवहन करता है, जिससे उन्हें सालाना 6 से 8 लाख रुपये की आय हो रही है।
प्रेरणा और उपलब्धि- श्री सुनील सिंगारे की यह यात्रा उनकी मेहनत, अनुशासन और सरकारी योजनाओं के कुशल उपयोग का परिणाम है। उनकी कहानी उन लोगों के लिए प्रेरणा है जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़ा सपना देखते हैं।
शासन और मत्स्य विभाग के प्रोत्साहन के साथ श्री सिंगारे ने यह साबित कर दिया कि ग्रामीण क्षेत्रों में भी मत्स्य पालन जैसे व्यवसाय के माध्यम से आर्थिक सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता हासिल की जा सकती है। उनकी यह सफलता आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा स्रोत बनी रहेगी।

*संवाददाता शुभम सहारे छिंदवाड़ा*

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