रिपोर्टर सीमा कैथवास
नर्मदापुरम। रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव नर्मदापुरम में हरदा और बैतूल जिले में एक जिला एक उत्पाद अंतर्गत चयनित बांस और सागौन में व्यापार, व्यवसाय और निवेश को प्रोत्साहन देने के लिए सेक्टोरियाल सत्र आयोजित किया गया। जिसमें बांस और सागौन को प्रोत्साहन देने के लिए मध्यप्रदेश शासन और जिला प्रशासन द्वारा किए जा रहे प्रयासों के संबंध में विभिन्न उद्योगपतियों को विस्तार से जानकारी दी गई। कलेक्टर बैतूल श्री नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी द्वारा सागौन और हरदा कलेक्टर श्री आदित्य सिंह द्वारा बांस के संबंध में विस्तृत प्रेजेंटेशन दिया गया। कमिश्नर उद्योग विभाग दिलीप कुमार द्वारा विभिन्न औद्योगिक इकाइयों को बांस और सागौन उत्पाद पर मध्य प्रदेश शासन की उद्योग फ्रेंडली नीतियों की लाभ उठाने और निवेश करने के लिए आमंत्रित किया गया।
—सागौन की जीआई टैगिंग—
बैतूल डीएफओ श्री नवीन गर्ग ने बताया कि जिले के तैलीया सागौन को राष्ट्रीय एवं अंतराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाए जाने हेतु जिओ टैग पंजीकरण की कार्यवाही की जा रही है। सागौन की जीआई टैगिंग हेतु G.I. Registry पोर्टल पर “बैतूल टीक वुड” नाम से फाइल कर दी गई है। जिसमे जीआई ऑफिस चेन्नई की सीजीएम मीटिंग के पश्चात बैतूल सागौन का GIR Journal में स्वीकृत एवं प्रकाशित होने के पश्चात जीआई टैग प्रदान किया जाएगा। जीआई टैगिंग से सागौन एवं उनके उत्पाद के विक्रय हेतु अधिक से अधिक क्रेता को बढ़ाना एवं स्थानीय स्तर पर वुडन क्लस्टर स्थापित कर सागौन एवं सागौन काष्ठ की खपत को बढ़ाना, स्थानीय विनिर्माता एवं व्यापारी की आय में वृद्धि करना एवं स्थानीय जनता को अधिक से अधिक रोजगार के अवसर प्रदान करना जीआई टैगिंग के मुख्य उद्देश्य है।
—औद्योगिक इकाइयों से 3 हजार लोगों को मिलेगा रोजगार—
जिले के सागौन की महत्वता एवं स्थानीय व्यवसायियों को व्यवसाय में सुविधा प्रदान करने एवं एक जिला एक उत्पाद के रूप में पृथक पहचान स्थापित करने की दृष्टि से एमएसएमई विभाग के सहयोग से एसपीवी बैतूल क्लस्टर डेव्हलपमेंट एसोसिएशन द्वारा भोपाल-नागपुर एनएच.69 पर स्थित ग्राम कढ़ाई के 20 हे. शासकीय भूमि पर वुडन क्लस्टर का निर्माण किया जा रहा है। जिसमें व्यवसाय के लिए 101 भूखण्ड विकसित किये जाएंगे। वूडन क्लस्टर में 101 औद्योगिक इकाइयों में लगभग 3 हजार लोगों को रोजगार प्राप्त होगा। यहां लगभग 200 करोड़ रु. राशि का अनुमानित निवेश किया जाएगा। वुडन क्लस्टर में सुविधाओं हेतु सिंगल विंडो प्लेटफार्म स्थापित किया जाएगा, जिसमें बैंक, ए.टी.एम., कैंटीन, मीटिंग हाल, ट्रेनिंग हाल, फायर बिग्रेड स्टेशन, वन विभाग एवं उद्योग विभाग का कार्यालय बनाया जाएगा। वुडन क्लस्टर में फर्निचर, प्लायवुड, पार्टीकल बोर्ड, विनियर, एम.डी.एफ., खिलौना, डेकोरेटिव आइटम प्रकार के उद्योगों में जीरो वेस्टेज पॉलिसी के तहत लकड़ी का पूर्ण उपयोग किया जाएगा।
—-विनिर्माण इकाइयों के लिए विशिष्ट सहायता—
प्रदेश में समावेशी विकास, रोजगार के अवसर निर्मित करने तथा नवाचार एवं उद्यमिता को प्रोत्साहित करने के लिए फर्नीचर संबंधित विनिर्माण इकाइयों को उद्योग विकास अनुदान, ब्याज अनुदान, विद्युत शुल्क में छूट, विद्युत टैरिफ में सहायता, पंजीयन शुल्क और स्टाम्प ड्यूटी की प्रतिपूर्ति, गुणवत्ता प्रमाणीकरण पर प्रोत्साहन, कौशल विकास एवं प्रशिक्षण पर व्यय की प्रतिपूर्ति, रोजगार सृजन अनुदान, निर्यात सहायता तथा प्रोडक्ट डिजाईन/टेक्नोलॉजी ट्रांसफर हेतु प्रतिपूर्ति, पेमेंट एवं डिजाईन पंजीयन हेतु प्रतिपूर्ति, अपशिष्ट प्रबंधन, हरित पहल पर प्रतिपूर्ति सहायता दी जाएगी।
—-जिले में 60 आरा मशीन, 200 फर्नीचर निर्माण इकाइयां एवं 3 शिल्पकार पंजीकृत—-
सागौन के विक्रय से बैतूल को लगभग 100 करोड़ रुपए का राजस्व प्रतिवर्ष प्राप्त होता है। जिले में 60 आरा मशीन, 200 फर्नीचर निर्माण इकाइयां एवं 3 शिल्पकार पंजीकृत है। सागौन काष्ठ से हस्तशिल्प की मूर्तियां, विनियर प्लाईवुड, फर्नीचर, मकानों की चौखट, दरवाजे, खिलौने डेकोरेटिव आइटम एवं अन्य कलाकृतियों का निर्माण किया जाता है। इन व्यावसायिक गतिविधियों से अनुमानित 25 करोड़ रुपए का प्रतिवर्ष व्यापार होता है एवं जिलों की 2 इकाई द्वारा लगभग 10 करोड़ राशि का निर्यात यूरोपिन देशों में किया जाता है।
—-राष्ट्रीय बांस मिशन योजना —
डीएफओ हरदा श्री अनिल चोपड़ा ने बताया कि बांस उत्पाद निर्माण उद्योगों की स्थापना एवं राष्ट्रीय बांस मिशन योजना में प्रावधान के संबंध में बताया कि बांस के पौधों का उत्पादन तथा बांस रोपण अंतर्गत बांस रोपणियों की स्थापना में निजी क्षेत्र के लिए 50 प्रतिशत तक अनुदान, कृषि क्षेत्र में बांस वृक्षारोपण पर रू. 120/- प्रति पौधा 50:30:20 के अनुपात में तीन वर्षों में अनुदान,बांस उत्पादन निर्माण एवं प्रसंस्करण में निजी क्षेत्र के लिए 30 से 50 प्रतिशत तक अनुदान,बांस उपचरण एवं संरक्षण पर निजी क्षेत्र के लिए 50 प्रतिशत तक अनुदान, बांस बाजार के लिए अद्योसंरचना एवं विकास निजी क्षेत्र के लिए 25 प्रतिशत तक अनुदान बांस आधारित औजार, उपकरण एवं मशीनरी का विकास निजी क्षेत्र के लिए 50 प्रतिशत तक अनुदान दिए जाने का प्रावधान हैं। उन्होंने बताया कि स्वसहायता समूह के सदस्यों द्वारा एम्पोरियम का संचालन होता है।
—सेक्टोरियल सत्र में बांस से बने उत्पादों को बढ़ावा देने किया प्रेरित—
नागपुर से वेद प्रकाश सोनी ने बांस उत्पादों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि पहले बांस से छोटे-मोटे उत्पाद चटाई इत्यादि बनाई जाती थी, लेकिन कुछ सालों में बदलाव आया और बांस उत्पादन में काफी एक्यूमेंट हुआ। अब मशीन की सहायता से बांस उत्पाद की संख्याओं में वृद्धि हुई है, जिसकी अन्य जिलों में काफी डिमांड है। हम अगरबत्ती, चारकोल, बंबू फर्नीचर, बंबू प्लाईवुड, बंबू बोट, बंबू बॉटल जैसे उत्पाद आसानी से मशीन की सहायता से बना सकते है। इस दौरान श्रीमती शांतला ने बंबू के बेस मैनेजमेंट की जानकारी दी। आशीष पांडे ने जिले में बांस से संबंधित खेती की जानकारी दी और उद्यमिता के विषय में अपने विचार सांझा किए।
उन्होंने कहा कि हम जिले में बांस की खेती कर मार्केट में विस्तार ला सकते है। हम अपनी मार्केटिंग को कैसे बढ़ाएं इसकी भी जानकारी दी गई। जनरल मैनेजर श्री अभिमन्यु श्रीवास्तव ने कहा कि यूरोप में बांस की अधिक डिमांड है। पहले भारत में बांस से निर्मित उत्पादों का उपयोग करते थे, लेकिन अब हमने दूरी बना ली है। उन्होंने सभी से पुन्ह बांस, टीक, बम्बू से बने उत्पादों को बढ़ावा देने का आह्वान किया।
बम्बू मिशन मप्र राज्य शासन के तकनीकी विशेषज्ञ श्री सरदार भाईरे ने जिले के किसानों को बांस की खेती में वृद्धि किए जाने की टिप्स सांझा की। उन्होंने कहा कि बांस की खेती में किसानों को पेशेंस रखना पड़ेगा। इसकी खेती हमें तुरंत में मुनाफा तो नहीं देती, लेकिन कुछ सालों बाद जो मुनाफा मिलता है वह अधिक होता है।


