रिपोर्टर प्रिया दुबे
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मुख्य आतिथ्य में शनिवार को नेताजी सुभाष चंद्र बोस कल्चरल एंड इंफॉर्मेशन सेंटर में आयोजित रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव 2024 में मध्यप्रदेश और जबलपुर में कृषि, डेयरी, खाद्य प्रसंस्करण, टेक्सटाइल व गारमेंट इंडस्ट्रीज की संभावनाओं को देखते हुए इच्छुक नए उद्यमियों के लिए विभागवार सेक्टोरल सेशन का आयोजन भी किया गया था। जिसमें विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ ही क्षेत्र के सफल उद्योगपतियों ने अपने अनुभव साझा किए और नए उद्यमियों से वन टू वन चर्चा कर मध्यप्रदेश और विशेषकर जबलपुर रीजन में इंडस्ट्री स्थापना के संबंध में उनकी विभिन्न जिज्ञासाओं का समाधान किया। साथ ही इन क्षेत्रों में इंडस्ट्री स्थापना के लिए उन्हें प्रोत्साहित भी किया।
टेक्सटाइल और गारमेंट के क्षेत्र में मध्य प्रदेश और जबलपुर में इंडस्ट्री स्थापना की विभिन्न संभावनाओं पर आयोजित सेक्टोरल सेशन में एम.एस.एम. ई.विभाग के सचिव डॉ. नवनीत मोहन कोठारी ने पावर प्वाइंट प्रेजेंटेशन के माध्यम से प्रदेश में टेक्सटाइल और गारमेंट इंडस्ट्री के ओवरव्यू की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मध्य प्रदेश ऑर्गेनिक कॉटन प्रोडक्शन में प्रथम स्थान पर है। प्रदेश में टेक्सटाइल इंडस्ट्री की सेक्टर में से एक है , जो लगातार बढ़ रही है। इसमें महाकौशल क्षेत्र भी एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने बताया है प्रदेश में टेक्सटाइल और गारमेंट इंडस्ट्रीज के लिए पर्याप्त रॉ मैटेरियल, कनेक्टिविटी, इकोसिस्टम, क्लस्टर डेवलपमेंट, इंडस्ट्रियल सपोर्ट, मैनपावर और स्किलिंग एनवायरमेंट उपलब्ध है। टेक्सटाइल इकाइयों को सरकार द्वारा विशेष वित्तीय सहायता भी प्रदान की जाती है। वन टू वन चर्चा में उद्योगपति गोकुल दास एक्सपोर्ट से श्री प्रभात कुमार सिंह, वजीर एडवाइजर्स से श्री वरुण वैद्य, जबलपुर गारमेंट एंड फैशन डिजाइन क्लस्टर से श्री दीपक जैन, जबलपुर अपैरल इनोवेशन एंड मैनिफैक्चरिंग एसोसिएशन के प्रेसिडेंट और एमडी श्री अनुराग जैन एवं प्रतिभा सिंटेक्स से श्री श्रेयांश चौधरी ने नए और इच्छुक उद्यमियों से अपने अनुभव साझा किए।
कृषि, खाद्य और डेयरी प्रसंस्करण के क्षेत्र में मध्य प्रदेश और महाकौशल में इंडस्ट्री स्थापना की संभावनाओं पर आयोजित सेक्टोरल सेशन में उद्यानिकी और खाद्य प्रसंस्करण विभाग के प्रमुख सचिव श्री सुखवीर सिंह ने विस्तार से जानकारी दी। जबलपुर रीजन में कनेक्टिविटी, जमीन, रॉ मटेरियल की उपलब्धता, पशुपालन, कृषक संगठनों की सक्रियता के कारण इस क्षेत्र ने अपर संभावनाओं पर प्रकाश डाला। मंडी बोर्ड के एम.डी.श्री श्रीमन शुक्ला ने बताया कि मध्यप्रदेश को किन कारणों से फूड बास्केट ऑफ इंडिया कहते हैं। उद्योगपतियों में दिनशवा ग्रुप से श्री अजय उपाध्याय, नर्मदा शुगर मिल से श्री विवेक माहेश्वरी, मध्य भारत कंशोशियम से श्री योगेश द्विवेदी ने अपने अनुभव साझा किए।


