कटनी- मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. आर के आठ्या ने बताया बारिश के मौसम में फूड प्वांइजनिंग एक आम स्वास्थ्य समस्या है, क्योंकि इन महीनों में इसके जीवाणु अधिक पनपते हैं। कटे हुए फल, सब्जियां मिठाइयां एवं अन्य खाद्य पदार्थ जल्दी खराब हो जाते हैं। मक्खी और मच्छर इनके जीवाणुओं को एक खाद्य पदार्थ से दूसरे खाद्य पदार्थ तक ले जाते हैं। जब जीवाणुओं से संक्रमित खाद्य पदार्थ को कोई व्यक्ति खाता है तो खाद्य-विषाक्तता का शिकार हो जाता है। सी.एम.एच.ओ. डॉ. आठ्या ने फूड प्वाइजनिंग के लक्षणों व प्राथमिक उपचार के बारे में एडवाईजरी जारी करते हुए आमजनों से अपने परिजनों, स्नेहीजनों को सुरक्षित रखने के लिए खान-पान में जरूरी एहतियात बरतने का आग्रह किया है।
*फूड प्वांइजनिंग के लक्षण*
सी.एम.एच.ओ. डॉ. आठ्या ने बताया फूड-प्वांइजनिंग होने पर रोगी की पेट में ऐंठन, जी मचलाना, उल्टी आना, डायरिया और कभी-कभी बुखार और ठंड जैसे लक्षण हो सकते हैं। इसके लक्षण दूषित भोज्य पदार्थों के खाने के 2 घंटे से लेकर कुछ दिनों में प्रकट हो सकते हैं। फूड प्वांइजनिंग से आमतौर पर रोगी की हालत गंभीर नहीं होती। इस प्रकार के लक्षण दिखाई देने पर बिना बिलंब किये चिकित्सक से संपर्क करें। चिकित्सक की सलाह पर उल्टी रोकने वाली दवा, उचित मात्रा में पेय पदार्थ और आराम करने पर रोगी की हालत में जल्दी सुधार हो जाता है।
*बचाव हेतु क्या करें*
सी.एम.एच.ओ. ने बताया फूड प्वांइजनिंग से बचने का सबसे बेहतर तरीका यह है कि खाद्य पदार्थ को छूने से पहले हाथों को अच्छी तरह से धो लेना चाहिए। कच्चे मांस अथवा अंडे को छूने और बाथरूम से आने के बाद हाथों को किसी एंटीबैक्टीरियल साबुन से अच्छी तरह से साफ कर लेना चाहिए। भोजन जरूरत अनुसार ही बनाये। इस मौसम में देर तक रखे भोजन के जल्दी खराब, दूषित होने की आशंका अत्यधिक होती है। ताजा बने भोजन को ही इस्तेमाल में लायें। अधिक उम्र के लोगों और बच्चों के पाचन तंत्र की कार्य क्षमता कम होती है और जीवाणुओं को नष्ट करने वाले स्टमक एसिड भी कम होते हैं इसके कारण उनमें खाद्य विषाक्तता होने पर उनकी हालत गंभीर हो सकती है। गर्भवती महिलाओं को भी खाने-पीने के मामले में अधिक सतर्कता बरतने की जरूरत होती है। मधुमेह कैंसर जैसी गंभीर बीमारी या कमजोर प्रतिरक्षा क्षमता वाले लोगों में भी फूड प्वाइजनिंग होने का खतरा अधिक होता है।


