कलेक्टर श्री अवि प्रसाद ने मध्यप्रदेश भू -राजस्व संहिता की धारा 12 मे प्रदत्त शक्तियों के तहत शुक्रवार को एक आदेश जारी कर कटनी जिला अंतर्गत समस्त अधीनस्थ राजस्व अधिकारियों को नामांतरण संबंधी प्रकरणों का निराकरण करते समय शासकीय पट्टे की भूमि के विक्रय के पूर्व कलेक्टर की अनुज्ञा के आज्ञापक प्रावधान का अनुपालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है।
कलेक्टर श्री प्रसाद ने जिले के अंतर्गत ऐसे कतिपय प्रकरणों के संज्ञान में आने के बाद यह आदेश जारी किया है। जिसमें ऐसी भूमि जो पूर्व मे शासकीय भूमि रही है एवं कालांतर मे शासकीय पट्टे पर आवंटित की गई, ऐसी पट्टे की भूमि का विक्रय बिना कलेक्टर की अनुज्ञा के किया गया व राजस्व अधिकारियों द्वारा नामांतरण भी स्वीकृत कर दिया गया। जो नियम विरुद्ध और अवैधानिक है।
इस संबंध मे कलेक्टर श्री प्रसाद ने म०प्र० भू-राजस्व संहिता 1959 की धारा 165 (7-ख) के प्रावधान का उल्लेख करते हुए राजस्व अधिकारियों को अवगत कराया है, कि ष्उपधारा (1) मे अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी (कोई भी ऐसा व्यक्ति, जो कोई भूमि राज्य सरकार से धारण करता है या कोई भी ऐसा व्यक्ति, जो धारा 158 की उपधारा (3) के अधीन भूमिस्वामी अधिकार मे भूमि धारण करता है) अथवा जिसे कोई भूमि सरकारी पट्टादार के रूप मे दखल मे रखने का अधिकार राज्य सरकार या कलेक्टर द्वारा दिया जाता है और जो तत्पश्चात ऐसी भूमि का भूमिस्वामी बन जाता है, ऐसी भूमि का अंतरण कलेक्टर की पद श्रेणी से अनिम्न पद श्रेणी के किसी राजस्व अधिकारी की अनुज्ञा, जो लेखबद्ध किये जाने वाले कारणों से दी जाएगी, के बिना नही करेगा।
इसलिए म०प्र० भू राजस्व संहिता की धारा 12 मे प्रदत्त शक्तियों के तहत कलेक्टर श्री प्रसाद द्वारा आदेश जारी किया गया है, कि कटनी जिला अंतर्गत समस्त अधीनस्थ राजस्व अधिकारी नामांतरण संबंधी प्रकरणों का निराकरण करते समय शासकीय पट्टे की भूमि के विक्रय के पूर्व कलेक्टर की अनुज्ञा के आज्ञापक प्रावधान का अनुपालन सुनिश्चित करेगें। यदि किसी प्रकरण मे शासकीय पट्टे की भूमि के अंतरण के विषय में भू-राजस्व संहिता के उपरोक्त वर्णित प्रावधान का उल्लघंन राजस्व अधिकारी के संज्ञान में आता है तो तत्काल प्रकरण मे वैधानिक कार्यवाही सुनिश्चित हो।


