मनीष गौतम 9993205230
परमात्मा को पाना है तो मैं का त्याग करना ही होगा। किसी रईस व्यक्ति की परमात्मा प्राप्त की इच्छा हुई तो वह एक आश्रम में एक संत के पास गया
एवं कहने लगा कि मैं परमात्मा प्राप्त करना चाहता हूँ मुझे उपाय बताए, संत ने कहा कि बहुत सरल है परन्तु सबकुछ छोड़कर आना पड़ेगा। फिर वह मानव सब पैसा
प्रोपर्टी एवं परिवार को त्याग कर संत के आश्रम में आ गया, संत ने कहा कि तुम अब भी कुछ लेकर आ गये। उस मानव को गुस्सा तो आया परन्तु उसे तो परमात्मा प्राप्त करना था
अतः सहन कर गया, संत ने कहा अभी तुम कुछ दिन आश्रम का कुडा-कचरा गांव से दूर डाल कर आने का काम करो परन्तु उसे तो परमात्मा प्राप्त करने की लालसा थी, सो किया।
रास्ते में एक दिन उससे एक आदमी टकरा गया, उस मानव ने कहा अंधा है क्या? इस प्रकार रोजाना कोई ना कोई टकरा जाता रोजाना का वाद-विवाद हो जाता
एवं संत को मालूम होता काफी दिन व्यतीत हो जाने के बाद जब उस मानव से फिर कोई आदमी टकराया, तो उसने कुछ नही कहा कुडा उठाया
फिर गांव से दूर डाल कर आश्रम में आ गया,इस घटना का जब संत को मालूम पड़ा तो संत ने उस मानव को बुलाकर कहा कि अब तुम्हें परमात्मा प्राप्त हो गया
समझने का विषय यह है कि परमात्मा प्राप्त करने के लिए संसार का नहीं बल्कि अपने क्रोध, अहंकार एवं मैं का त्याग करना होता है।
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय
ये एक कहानी


