स्वामी विवेकानंद जी बचपन से मेरी प्रेरणा रहे हैं। स्वामी जी के शब्द सदैव मेरे कानों में गूंजते हैं और नई ऊर्जा देते हैं। मेरा सौभाग्य है कि आज बेलूर मठ की पवित्र धरा को प्रणाम करने आ पाया।
जिस कक्ष में स्वामी जी अंतिम समय तक रहे, उस कक्ष की दिव्य आध्यात्मिक ऊर्जा की प्रत्यक्ष अनुभूति से स्वयं को धन्य अनुभव कर रहा हूँ।


