रिपोर्टर राजेश केवट
कुटेश्वर माइंस गैरतलाई की बेबस असहाय प्रताड़ित 2042 मजदूर अब ऑनलाइन आवेदन कर अपने काम के प्रमाण प्रस्तुत कर रही है स्वयं मजदूर मजदूरी के लिए केंद्रीय श्रम आयुक्त को निवेदन भेजने का कार्य कर रही है अब देखने वाली बात है कि इन बेसहारा मजदूरों की व्यथा कौन पहले सुनता है ।
*मजदूरों ने भारत सरकार और केंद्रीय श्रम आयुक्त से लगाई गुहार*
*बरही :-भारत सरकार का उपक्रम जो कुटेश्वर माइंस गैरतलाई में लगभग 50 वर्षों से चल रहा है जो आज से 27 वर्ष पहले पूरी तरह से मेनुवल था जहां चार-पांच कंपनियों के मदद से लगभग 2042 मजदूर हाथ से हथौड़ा के माध्यम से गिट्टी तोड़ाई का काम करते रहे हर मजदूर करीब 25 से 30 वर्ष तक गिट्टी तोड़ने का कार्य किए थे और अपना एवं अपने परिवार का भरण पोषण करते थे किंतु अचानक शैल के दिमाग में आया कि मेनुवल की जगह मेंगनाइज कर दे तो ठीक होता और हुआ भी वही अचानक बिना कारण बताएं नोटिस दिए बिना सी.आई.एस.एफ की मदद से मजदूरों को 25-4-96 के दिन अचानक कम से खदेड़ कर गेट के बाहर का रास्ता दिखा दिया तब से आज दिनांक तक खदान के मजदूरों का कोई मांई बाप नहीं है न ही उनकी कोई पीड़ा सुनने वाला है 27 वर्षों से भटक रहे हैं
*सी.आई.एस.एफ का शिकार हुए थे हजारों मजदूर*
शैल के द्वारा पूरा बल प्रयोग कर मजदूरों को भगाया गया था सैकड़ो मजदूर घायल हुए थे सैकड़ो मजदूरों की साइकिलों के ऊपर बुलडोजर चला दिया गया था
*2042 मजदूरों का नहीं मिला काम का दाम न ग्रेजुटी*
कुटेश्वर माइंस गैरतलाई के मजदूरों को अचानक काम से भगा देने के कारण 2042 मजदूरों का 27 वर्षों से आज भी मजदूरी दो माह की बोनस एरियस और ग्रेजुटी नहीं दी गई है मजदूरों ने बिना मुखिया के मुख्य सचिव भारत सरकार, केंद्रीय श्रम आयुक्त जबलपुर माइंस प्रबंधक जिला कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक से गुहार लगाई है कि पिछले 27 वर्षों से हमारी बाकी पड़ी मजदूरी हम मजदूरों को दिलाई जाए हमारी बोनस एरियस ग्रेजुटी भी दिलाने की कृपा की जाए ।


