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रिपोर्टर सीमा कैथवास
नर्मदापुरम । संभाग एवं जिला मुख्यालय नर्मदापुरम नगर में सरकारी बहुमूल्य जमीनों पर रसूखदारी के साथ हो रहे अतिक्रमण के मामलों में जिला प्रशासन और नगर पालिका प्रशासन बेबस नजर आ रहा है। नगर के संभ्रांत नागरिक उनके घर एवं दुकानों के आसपास हो रहे बेजा अतिक्रमण और उससे हो रहे न्यूसेंस को लेकर काफी परेशान है। जनप्रतिनिधियो के संरक्षण के कारण प्रशासन भी कार्यवाही नहीं कर पा रहा है। ऐसे में मजबूर होकर पीड़ित व्यक्तियो को न्यायालय की शरण लेना पड़ रहा है। ऐसा ही एक मामला 3 नवंबर दिन शुक्रवार को सामने आया है जब राजस्व अमला, नगर पालिका का अतिक्रमण हटाओ दस्ता और पुलिस प्रशासन जेसीबी टीम के साथ मुख्य बाजार क्षेत्र वार्ड क्रमांक 6 में जिला अस्पताल कैंपस
के अंदर और इतवारा बाजार में नगर पालिका की दुकान के पीछे रसूखदारी से किए गए अतिक्रमण के मामले में उच्च न्यायालय और चुनाव आयोग के दिशा निर्देशन पर अतिक्रमण हटाने पहुंचा। प्रशासन द्वारा अतिक्रमण हटाने की जानकारी पर क्षेत्र में हड़कंप मच गया। इस दौरान प्रशासनिक अमले ने जिला अस्पताल परिसर के अंदर करीब 40 वर्षों से निवासरत परिवार का सामान बाहर कर बेजा कब्जा कर बनाया गया टीन शेड का मकान जेसीबी से ध्वस्त कर दिया। वही उच्च न्यायालय में याचिका लगाने वाले फरियादी सीताशरण पांडे की शिकायत पर नगर पालिका की पार्षद सिमरन रैकवार के परिजन की नपा की दुकान में पीछे अतिक्रमण कर पक्का निर्माण को हटाने प्रशासन का अमला पहुंचा था, परंतु राजनीतिक रसूख के चलते फिर अमले द्वारा उक्त अतिक्रमण को बिना हटाए ही वापस चला गया। बताया जाता है कि संबंधित अतिक्रमणकारी को दो दिवस का समय दिया गया है कि वह स्वत अतिक्रमण हटा लेगा। उक्त संबंध में याचिकाकर्ता और आवेदक सीताशरण पांडे ने मीडिया को बताया कि इतवारा बाजार में नगर पालिका के शिवाजी मार्केट में उनकी दुकान के बाजू में ही विजय उईके के नाम पर एलॉट दुकान को नगरपालिका पार्षद सिमरन रैकवार के परिजन द्वारा ली गई है। दुकान में पीछे एंक्लोजमेंट कर अतिरिक्त निर्माण करने से बारिश का पानी उनकी दुकान में घुस रहा था। जिसकी शिकायत उनके द्वारा नगर पालिका प्रशासन, कलेक्टर सहित जिला प्रशासन को की गई थी। सुनवाई नहीं होने पर मजबूर होकर उनके द्वारा न्याय के लिए उच्च न्यायालय में याचिका लगानी पड़ी। शिकायतकर्ता सीताशरण पांडे ने आरोप लगाया कि प्रसासन द्वारा स्थानीय विधायक डॉ सीतासरन शर्मा के हस्तक्षेप के कारण दुकान का अतिक्रमण नहीं हटाया गया। जिसकी शिकायत भी उनके द्वारा की गई है। माननीय उच्च न्यायालय द्वारा अतिक्रमण हटाने के निर्देश के बावजूद जिला प्रशासन द्वारा कारवाही नहीं किए जाने पर उनके द्वारा मुख्य निर्वाचन आयुक्त को शिकायत की गई थी। जिसके बाद शुक्रवार को अतिक्रमण हटाने की कार्यवाही के लिए प्रशासनिक अमला पहुंचा। इस दौरान अस्पताल की जमीन पर किए गए अन्य अतिक्रमण को हटाया गया। जिस मूल अतिक्रमण की शिकायत की गई थी उसे दो दिवस का समय देकर मामले को लंबित कर दिया गया है। दूसरी तरफ प्रशासनिक अमले द्वारा उच्च न्यायालय और निर्वाचन आयोग के निर्देश पर जिस अतिक्रमण को हटाने के लिए निर्देशित किया गया था,उस कार्रवाई को अधूरा छोड़े जाने पर अब गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
वही अतिक्रमण हटाने पहुंचे राजस्व के अधिकारी और नगर पालिका के अतिक्रमण दल द्वारा पुलिस की मौजूदगी में उक्त अतिक्रमण को हटाने की कार्यवाही पूर्ण रूप से अधूरी रही जिससे शिकायत कर्ता सीताशरण पांडे ने बताया कि राजनीतिक दबाव के चलते कार्यवाही को बाधित किया जा रहा था । और आरोप लगाया कि अतिक्रमण को हटाने के लिए पार्षद के परिजन प्रशासनिक अमला को गुमराह करते नजर आए और प्रशासनिक कार्यवाही में बाधा उत्पन्न कर रहे थे जिसके चलते अतिक्रमण नहीं हट सका और दो दिवस का समय दिया गया है। और स्वत हटाने के लिए कहा गया है।


