रिपोर्टर सीमा कैथवास
नर्मदापुरम। जैनों के सबसे बड़े त्यौहार पर्यूषण पर्व पर प्रतिवर्ष अनुसार इस वर्ष भी पारसनाथ दिगंबर जैन मंदिर जी में हर्षउल्लास के साथ मनाये जा रहे हैं पर्व के अंतिम दिन अनंत चतुर्दशी महापर्व मनाया जाता है ।इस दिन मंदिर जी में अनेको धार्मिक आयोजन कर पुण्य अर्जित किया जाता है प्रातः से ही मंदिर जी में बाहर से पधारे विद्वानों द्वारा दिव्य मंत्रोंचार द्वारा अभिषेक शांति धारा के उपरांत नित्य नियम पूजा एवं विधान होता है अनंत चतुर्दशी पर्व पर दोपहर 3:00 बजे से मंदिर जी में श्री जी के 108 दिव्या कलश एवं दिव्या शांति धारा संपन्न कर विश्व शांति की कामना की जाती है शाम को 7:00 बजे से मंगल महा आरती के उपरांत भक्ति प्रवचन सांस्कृतिक कार्यक्रम होते हैं ।।इस बार के प्रदूषण पर्व पर समाज जन द्वारा अत्यधिक भक्ति भाव के साथ श्री जी की धर्म आराधना की गई । पर्यूषण पर्व के नौवे दिन बाहर से पधारे विद्वान बाल ब्रह्मचारी अंशु भैया जी द्वारा एवं इंदौर आश्रम से पधारी दीदी द्वारा आकिंचन धर्म पर व्याख्या की गई। जिस प्रकार वायु से भरा गुब्बारा आकाश में उड़ाता चला जाता है क्योंकि वह हल्का होता है ठीक वैसे ही संयम तप त्याग के बाद आत्मा एकाकी होती है सांसारिक विकल्पों से क्रम मिल जाता है संसार की उधेड़बुन समाप्त हो जाती है ।एकमात्र अध्यात्म और एकत्व ही महत्व रखता है।यही से यात्रा मुक्तीधाम की शुरू होती है। जैसे कम वजन वाला तराजू का पलड़ा स्वभाव से ऊँचे चला जाता है ठीक इस प्रकार र्निभार आत्मा का स्वभाव उर्ध्वगामी है परंतु पांच पाप चार कसाय के कारण इसे नीचे ही रहना पड़ रहा है, वैसे ही आत्मा के स्वभाव का भान होगा आत्मा अंनत शक्तियों को प्रकट हो जाती है ।इसी एकत्व के ध्यान का नाम आकिंचन धर्म है।। समाज के अध्यक्ष संतोष जैन ने अनंत चतुर्दशी महापर्व पर समाजजन से अपील की है कि वह पुण्य के समस्त कार्यक्रम में अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर धर्म लाभ लवी आज के कार्यक्रम में मुख्य रूप से समाज के वरिष्ठ मुन्नालाल जैन अरुण जैन प्रवीण जैन प्रदीप सिघई राजेश जैन नीरज जैन अभिषेक जैन निर्दोष जैन आलोक जैन प्रशांत जैन संदेश दीपांशु जैन राजा जैन नीरज गोयल अपूर्व जैन सार्थक जेन पार्श जैन आदि उपस्थित रहे।


