रिपोर्टर सीमा कैथवास
नर्मदापुरम। जिला मुख्यालय नर्मदापुरम में शराब के विक्रय पर प्रतिबंध लगा हुआ है। प्रदेश के मुखिया शिवराज सिंह चौहान द्वारा नर्मदा सेवा यात्रा के दौरान नर्मदा तट के दोनों ओर 5 किलोमीटर के दायरे में शराब बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। जिसके बाद से होशंगाबाद से नर्मदापुरम हो चुके शहर में शराब विक्रय पर प्रतिबंध लग गया है। प्रतिबंध लगने के बाद से ही यहां पर शराब माफिया हावी हो गए हैं। अब स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि जिला मुख्यालय पर कलेक्ट्रेट से चंद कदमों की दूरी पर जिला पोस्ट ऑफिस कार्यालय के पीछे जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय के पास स्थित नर्मदापुरम के ब्लॉक शिक्षा अधिकारी कार्यालय और शासकीय माध्यमिक शाला कोठी बाजार परिसर बिल्डिंग में शाम होते ही नशेड़ी और शराबियों का अड्डा बन जाता है। जिसके सबूत सुबह शराब और बीयर की खाली बोतलें,चखना के खली रेपर , डिस्पोजल गिलास, नमकीन के खाली रैपर, प्लास्टिक के ग्लास, इंजेक्शन जैसी ढेर सारी वस्तुएं पड़ी हुई परिसर में मिलती हैं। ब्लॉक शिक्षा अधिकारी कार्यालय के कर्मचारियों सहित स्कूल के शिक्षक शिक्षिकाओं ने बताया कि वह लोग निरंतर परेशान हैं हमेशा गाली गलौज और डर का माहौल निर्मित रहता है सुबह होने पर हमें स्कूल परिसर की सफाई करानी पड़ती है, कई बार वरिष्ठ जनों से शिकायतें भी कर चुके हैं, पर कोई सुनवाई नहीं हो रही है। जिससे स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों के शिक्षा पर भी विपरीत प्रभाव पड़ रहा है और स्कूल परिसर का माहौल भी खराब हो रहा है। तत् संबंध में जिला शिक्षा अधिकारी शत्रुंजय प्रताप सिंह बिसेन से जब स्कूल परिसर में शराबियों द्वारा शराब पीकर माहौल खराब करने सहित पूरे मैदान में शराब की खाली बोतल,प्लास्टिक गिलास, इंजेक्शन जैसी चीजों के ढेर पड़ा रहने से खराब हो रहे माहौल के संबंध में जानकारी ली गई तो अवगत कराया गया कि उन्हें इस संबंध में कोई जानकारी नहीं है।मीडिया के माध्यम से जानकारी मिली है तो वह पुलिस प्रशासन और आबकारी विभाग को पत्र लिखकर यहां पर कार्यवाही कराएंगे। विकासखंड शिक्षा अधिकारी सहित प्राचार्य से भी जानकारी लेंगे। उक्त परिसर में नौनिहाल शिक्षा अध्यन करने आते है। मैदान में उनके लिए क्रीड़ा गतिविधि का मैदान गंदगी से पटा पड़ा है।
जिससे स्कूल के बच्चो की मानसिक स्थिति पर भी बुरा प्रभाव पड़ रहा होंगा। स्कूल प्रबंधन और विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय के जिम्मेदारो ने क्यों इस प्रकार की गंभीर स्थिति से अब तक अपने वरिष्ठ अधिकारियों को नही अवगत कराया बड़ा सवाल?और शिक्षा के मंदिर प्रांगण को क्यों दूषित होने से बचाने की कोई पहल नहीं की गई पर भी बड़ा सवाल खड़ा हो रहा है….?आखिर खेल मैदान की दुर्दशा पर कोई क्यों संज्ञान नहीं लिया गया?


