रिपोर्टर सीमा कैथवास
नर्मदापुरम । प्रदेश सरकार के खनिज साधन एवं जिले के प्रभारी मंत्री बृजेंद्र प्रताप सिंह सोमवार को नर्मदापुरम में जिला अस्पताल के नवीन भवन सहित लॉ कॉलेज भवन के भूमि पूजन कार्यक्रम में शामिल होने आए थे। इस दौरान सर्किट हाउस में प्रभारी मंत्री बृजेंद्र प्रताप सिंह के आगमन उपरांत मीडिया द्वारा सवाल किया गया कि खदानों पर राजनीतिक संरक्षण प्राप्त रसूखदार रेत माफिया हावी है, जिन पर प्रशासन की टीम भी अंकुश नहीं लगा पा रही है! परिस्थितियां इतनी गंभीर हो गई है कि पिछले दिनों रेत खदान पर अवैध खनन और परिवहन की सूचना पर प्रभारी तहसीलदार शक्ति श्री तोमर सहित राजस्व, खनिज विभाग का अमला रात में निमसाडिया रेत खदान पर गया था। जहां पर रेत माफियाओं द्वारा पूरी टीम को घेर लिया गया, इस दौरान 100 डायल सहित पुलिस को भी सूचना भेजी गई थी। जहां रात अंधेरे खदान पर करीब 5 – 7 डंपर खड़े हुए थे। इस दौरान घटना स्थल पर प्रशासन की टीम को घेर लिया गया था और कारवाई का विरोध करते धमकाते हुए चेतावनी भी दी गई थी। इसके बाद बमुश्किल तहसीलदार के नेतृत्व में खनिज विभाग की टीम ने रेत से भरे एक डंपर को जब्ती बनाकर देहात थाना परिसर लेकर आए थे परंतु थाना परिसर में जगह नहीं होने से डंफर को मंडी परिसर लेकर गए और दो होमगार्ड जवानों को अभिरक्षा में खड़ा किया गया। इसी दरमियान रेत माफियाओं के गुर्गे जप्त किए गए डंपर को लेकर फरार हो गए। इस मामले में अभी तक तहसीलदार सहित खनिज विभाग द्वारा कोई कार्यवाही नहीं की गई है। जिस पर प्रभारी मंत्री बृजेंद्र प्रताप सिंह द्वारा अवगत कराया गया कि वह इस मामले की जानकारी लेंगे। उल्लेखनीय है कि वर्तमान में जिले में तवा नर्मदा सहित सहायक नदियों पर मौजूद 118 रेत खदानों में से किसी भी रेत खदान पर उत्खनन परिवहन की कोई अनुमति नहीं है। रेत खदान पर माफिया इस कदर हावी है कि प्रदेश सरकार द्वारा जनवरी 2021 में जिले की 118 रेत खदानों का 262 करोड़ में शासन से ठेका लेने वाली छत्तीसगढ़ कोरबा की आरकेटीसी कंपनी भी यहां अपना व्यवसाय नहीं कर सकी है। मामला उच्च न्यायालय में लंबित होकर रह गया है। निरंतर मिल रही शिकायतों के उपरांत कलेक्टर नीरज कुमार सिंह द्वारा खनिज विभाग को निर्देश देकर रेत के अवैध परिवहन और उत्खनन को रोकने के लिए जिलेभर में 14 खनिज जांच के नाके स्थापित किए गए हैं। जहां पुलिस प्रशासन होमगार्ड सहित राजस्व अधिकारियों की ड्यूटी लगाई गई है। उसके बावजूद खदानों पर जेसीबी एवं लोडर से रेत का अवैध उत्खनन रसूखदार माफियाओं के संरक्षण में हावी है। जिन पर अंकुश नहीं लग पा रहा है। बंद पड़ी निमसाड़ियां रेत खदान पर रसूखदार रेत माफियाओं द्वारा किए जा रहे रेत के अवैध उत्खनन परिवहन की सूचना पर जिला प्रशासन के निर्देश पर 29,30 जून की देर रात्रि प्रभारी तहसीलदार शक्ति श्री तोमर के नेतृत्व में राजस्व अमला, खनिज अमला, होमगार्ड के जवान दो गाड़ियों में खदान पर पहुंचे थे। जहां करीब 7-8 डंपर भी थे। इसी दौरान छापामार कार्यवाही की सूचना मिलते ही रसूखदार रेत माफियाओं ने प्रशासन की टीम को घेर लिया। जिसके बाद प्रशासन की टीम ने रेत से भरा एक डंपर जब्त कर देहात थाने लेकर आई। इस दौरान थाने में जगह नहीं होने पर कुछ ऐसा हुआ कि रेत माफिया के गुर्गे रेत से भरा जप्त डंपर लेकर फरार हो गए। इस घटना के बाद से पूरा मामला दबाने का प्रयास किया जा रहा है। सूत्रों की मानें तो किसी रसूखदार नेता के दबाव में प्रशासन अब तक इस मामले में f.i.r. नहीं करा सका है,
खनिज विभाग भी टालमटोल कर रहा है। सूत्रों के अनुसार रसूखदार रेत माफिया का नाम लेने में भी खनिज विभाग के जवाबदारो को अब पसीना छूट रहा है। मामले में कारवाही नहीं करने को लेकर जप्त किए फरार ट्रक को पकड़ने की बात कह कर मामले से पल्ला झाड़ा जा रहा है। आखिर वह रसूखदार रेत माफिया कौन है जिसने निम्साड़ियां क्षेत्र में रेत का अवैध उत्खनन का काम ले रखा है ? जिसे पुलिस प्रशासन का भी भय नहीं है ।आखिर किस राजनेतिक रसूखदार नेता का संरक्षण प्राप्त है कि प्रशासन अब तक इस मामले में कार्यवाही नहीं कर पाया है जिस पर बड़ा सवाल खड़ा हो रहा है…?


