रिपोर्टर सीमा कैथवास
सिवनी मालवा। सिवनी मालवा में स्थानीय जगदीश मंदिर, गांधी चौक से भगवान जगन्नाथ के रथ को फूल मालाओं एवं भगवान का विशेष श्रृंगार कर भगवान नगर भ्रमण को निकलें। साथ में बड़े भाई बलराम एवं बहन सुभद्रा नगर के विभिन्न मार्गो में भक्तों में बड़ा उत्साह देखा गया। नागरिकों ने भगवान की पूजा अर्चना कर दर्शन किए। भजन गायकों ने अपनी सुमधुर वाणी के भजन पर भक्तों लोग भक्ति में नृत्य करते रहे। रथ यात्रा में जनप्रतिनिधि, पार्षदगण सैकड़ों की संख्या में महिलाएं, गणमान्य नागरिक, व्यापारी वर्ग, पत्रकार बंधु शामिल हुए। प्रत्येक वर्ष आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा निकाली जाती है। भगवान जगन्नाथ ने अपनी बहन की इच्छा पूर्ति के लिए उन्हें रथ में बिठाकर पूरे नगर का भ्रमण करवाया जाता है । जगन्नाथजी की रथ यात्रा के बारे में स्कंद पुराण, नारद पुराण, पद्म पुराण और ब्रह्म पुराण में भी बताया गया है इसलिए हिंदू धर्म में इसका विशेष महत्व बताया गया है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जो भी व्यक्ति इस रथयात्रा में शामिल होकर इस रथ को खींचता है उसे सौ यज्ञ करने के बराबर पुण्य प्राप्त होता है। भगवान कृष्ण को जगत के नाथ जगन्नाथजी के रूप में पूजा जाता है और इनके साथ उनके बड़े भाई बलराम और बहन सुभद्रा भी विराजमान हैं। भगवान बलरामजी के रथ को ‘तालध्वज’ कहा जाता है और इसकी पहचान लाल और हरे रंग से होती है। वहीं सुभद्रा के रथ का नाम ‘दर्पदलन’ अथवा ‘पद्म रथ’ है, उनके रथ का रंग काला या नीले रंग को होता है, जिसमें लाल रंग भी होता है। भगवान जगन्नाथ के रथ को नंदीघोष अथवा गरुड़ध्वज कहा जाता है, इनका रथ लाल और पीले रंग का होता है। तीनों रथ के तैयार होने के बाद इसकी पूजा के लिए पुरी के गजपति राजा की पालकी आती है। इस पूजा अनुष्ठान को ‘छर पहनरा’ नाम से जाना जाता है। इन तीनों रथों की विधि विधान से विधिवत पूजा करते हैं और ‘सोने की झाड़ू’ से रथ मण्डप और यात्रा वाले रास्ते को साफ किया जाता है।
