रिपोर्टर सीमा कैथवास
नर्मदापुरम। जिले में रेत के अवैध कारोबार को लेकर खनिज विभाग पर तो आए दिन आरोप लगते ही रहते हैं परंतु इस बार आरोप शहरी तहसीलदार पर भी लगा है उनकी कार्यशैली को लेकर यह आरोप सुर्खियों में चल रहा कि शहरी तहसीलदार द्वारा जिन अवैध रेत की ट्रैक्टर ट्रॉलीओं से पैसा नहीं मिलता है उन पर ही कार्यवाही की जाती है?
जबकि बड़े पैमाने पर बांद्राभान, घानाबड़,रायपुर,तवा पुल, डोंगरवाडा पुलघाट,करबला क्षेत्र से शाम होते ही रेत से भरी ट्रैक्टर ट्राली पूरी रात से सुबह तक सड़कों पर दौड़ती हैं। जो कि शहर के विभिन्न क्षेत्रों में पुलिस विभाग के लगे सीसीटीवी कैमरे में भी कैद होती हैं,सिर्फ कुछ को ही क्यो पकड़ा जाता है? शुक्रवार दोपहर नर्मदापुरम जिला मुख्यालय की मीडिया तक जब यह बात आग की तरह पहुंची कि तहसीलदार की कार्यवाही से प्रताड़ित होकर रेत का अवैध परिवहन करते एक रेत का कारोबार करने वाले ट्रैक्टर चालक द्वारा जहरीला पदार्थ खा लिया है और उसकी हालत अत्यंत गंभीर हो गई है जिसे उसके साथी अस्पताल लेकर गए हैं। पांडे हॉस्पिटल में इलाज कर रहे डॉक्टर विमलेश कुमार कीर ने बताया कि चंद्रशेखर उर्फ चंदू बाबरिया निवासी 35 वर्ष बांद्राभान ने कीटनाशक जहरीला पदार्थ खाया है। दोपहर 3 बजे की घटना है। जिसके बाद मरीज को हॉस्पिटल लेकर आए हैं। जिनका इलाज जारी है, 24 से 48 घंटे तक खतरे की स्थिति रहती है। दूसरी तरफ अस्पताल लेकर आए साथियों ने दबी आवाज में बताया कि तहसीलदार द्वारा पैसों की मांग की जा रही थी। पैसे नहीं दिए जाने पर चंदू का रेत से भरा ट्रैक्टर पकड़ लिया है। 5 दिन पहले भी चंदू का ट्रैक्टर पकड़ा था। जिसके बाद प्रताड़ित होकर उसने जहर खा लिया। इस मामले में तहसीलदार अनिल पटेल का कहना रहा कि उनके द्वारा चंद्रशेखर उर्फ चंदू बावरिया का बिना रॉयल्टी का रेत से भरा ट्रैक्टर पकड़ा है, जिसे थाने के सुपुर्द कर दिया गया है। चंद्रशेखर ने लोन के कारण जहर खाया है। आरोप गलत है। सूत्रों की माने तो इन दिनों रेत की अवैध ट्रैक्टर ट्रॉलीओं को लेकर एंट्री का खेल चल रहा है। जिसमें अधिकारियों के नाम पर वसूली भी की जा रही है। सूत्रों की मानें तो शहर में करीब 100 ट्रैक्टर ट्रॉलीयो से रेत का अवैध कारोबार निरंतर हो रहा है। मालाखेड़ी में घटित इस घटना को लेकर यह बात भी सूत्रों के हवाले से आ रही है कि साहब का एक ड्राइवर भी इस खेल में शामिल है? मोबाइल की कॉल डिटेल से खंगाला जा सकता है। सूत्रों का कहना है कि मालाखेड़ी की घटना सीसीटीवी कैमरे में क़ैद है कि कितने ट्रैक्टर पकड़े और कितने छोडे? बडा सवाल आखिर अस्पताल में राजस्व कर्मचारी क्यों गए थे चंद्रशेखर को देखने के लिए?अस्पताल के सीसीटीवी फुटेज की जांच हो तो भी कई बातें सामने आ सकती हैं? बड़ा सवाल यह भी है रेत खदानों के एरिया के पटवारी,आरआई अपनी जांच रिपोर्ट और प्रतिवेदन में इस बात का खुलासा क्यों नहीं करते हैं कि यहां पर अवैध खनन हो रहा है? क्या पटवारी आरआई की भी जेबे गर्म हो रही है? पर भी बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं। सूत्रों की माने तो अस्पताल में कुछ पत्रकारों द्वारा भी चंद्रशेखर का बयान लिया था जिसमें उसने गंभीर आरोप लगाए थे। अब घटना के बाद मचे बवाल के बीच भारी दबाव के बाद इस घटना को दबाने का प्रयास भी किया जा रहा है। यदि शहर के मालाखेड़ी का सीसीटीवी, पैट्रोल पम्प मालाखेड़ी का सीसीटीवी, अस्पताल के सीसीटीवी और जिन पर आरोप लग रहे हैं उनके मोबाइलों की कॉल डिटेल की जांच की जाए, तो पूरे मामले का खुलासा हो सकता है। सूत्र बताते हैं कि चंदू बावरिया के पास तीन ट्रैक्टर ट्राली है जिसमें से 5 दिन पहले भी इसकी एक ट्रैक्टर ट्रॉली को अवैध रेत का परिवहन करते पकड़कर पुलिस के सुपुर्द की गई थी । शुक्रवार दोपहर पेट्रोल पंप मालाखेड़ी चौराहे पर चंदू की ट्रैक्टर ट्रॉली को जब तहसीलदार ने पकड़ा तो इसने जमकर वहां हंगामा मचाया। इस दौरान यह भी आरोप लगाया कि अभी यहां से और गुजरी हुई अन्य ट्रैक्टर ट्राली के ऊपर क्यों कार्यवाही नहीं की ऐसे आरोप लगाए सिर्फ मुझे ही क्यों आपके द्वारा प्रताड़ित किया जा रहा है ,अन्य लोगों के ट्रैक्टर भी चल रहे है। उन्हें आपने क्यों छोड़ दी ?आखिर यह भी बड़ा सवाल है कि तहसीलदार द्वारा अब तक कितनी ट्रैक्टर-ट्रॉली पर कारवाई की और थाने में एफ आई आर दर्ज करवाई गई है, की भी जांच होना चाहिए?? और दूसरा पटवारी ने उनसे संबंधित प्रतिवेदन वरिष्ठ अधिकारियों को सौंपा है इसकी भी जांच होना चाहिए? फिलहाल पूरा मामला गरमाया हुआ है कि अधिकारियों के नाम पर होने वाली एंट्री इनके द्वारा की जा रही है। क्योंकि रेत का अवैध कारोबार करने वाले लोगों के बीच से खबर है कि बिना एंट्री के हम यह कारोबार नहीं संचालित कर सकते हैं। हम तो सिर्फ अपने परिवार का पेट पाल रहे हैं । अधिकारियों को बड़ी-बड़ी कालोनियों में बन रहे रिसोर्ट और कालोनियों में कहां से डंपरो से रेत आ रही बजरा ,मोरम ,मिट्टी, रेत, की जांच करना चाहिए ,सिर्फ ट्रैक्टर ट्राली के ऊपर ही दबाव नहीं बनाना चाहिए । भोपाल तिराहे पर हजारों से मिट्टी की पूरनि हो गई उस पर अधिकारियों ने क्या कार्रवाई की पर भी बड़े सवाल खड़े होते हैं ,जो कि बयां करते हैं इन अधिकारियों की कार्यप्रणाली को करनी और कथनी को? सूत्रों की माने तो कुछ लोगों के पास संबंधित वीडियो भी है जो आगे सामने आ सकते हैं। फिलहाल प्रशासन की किरकिती को बचाने के लिए गंभीर हुए है। संबंधित मामले में जिला प्रशासन के मुखिया उक्त घटना के बाद से गंभीर हुए हैं और पूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच के आदेश दिए हुए है।उक्त घटना में बड़ी कार्यवाही की भी कवायत लगाई जा रही है।


