रिपोर्टर सीमा कैथवास
नर्मदापुरम// जिले में हो रही गेहूं/चना खरीदी को लेकर बनाए जाने वाले खरीदी केंद्र सहित भंडारण के लिए कुछ वेयर हाउस को उपार्जन केन्द्र नही बनाए जाने का मामला गरमा गया है। कलेक्टर सहित वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंची शिकायत से मामले का खुलासा हुआ है। इस बार रबी सीजन में गेहूं /चना खरीदी के लिए बनाए जाने वाले खरीदी केंद्र वेयरहाउस चयन को लेकर भी गड़बड़ी की बात सामने आ रही है। जिसकी शिकायत कलेक्टर नर्मदापुरम सहित खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग भोपाल तक हुई है। उक्त मामले को लेकर हाईकोर्ट में याचिका भी लगाई गई है जिस पर सुनवाई होना है। आश्चर्य का विषय है कि जिला आपूर्ति नियंत्रक (खाद्य)
और नोडल अधिकारी सहित एसडीएम को संबंधित वेयरहाउस संचालक द्वारा उपार्जन केंद्र स्थापित कर वेयरहाउस भंडारण के लिए प्रस्तुत किए गए आवेदन की जानकारी भी नहीं है। एसडीएम साहब के नवागत होने से उन्हें जानकारी नहीं होना लाजमी हो सकता है परंतु उपार्जन खरीदी की जिला आपूर्ति नियंत्रक / नोडल अधिकारी ज्योति जैन द्वारा अवगत कराया जाना कि उनके कार्यालय में शिकायतकर्ता वेयर हाउस संचालक का उपार्जन केंद्र स्थापित कर वेयर हाउस भण्डारण के लिए कोई भी आवेदन नहीं आया हैं जो भी आवेदन आते हैं वह खंड स्तरीय समिति द्वारा तैयार कर भेजा जाता है सभी प्रक्रिया खंड स्तरीय समिति द्वारा की जाती हैं, उन्ही के द्वारा चयन किया जाता है।एसडीएम उक्त समिती के अध्यक्ष होते हैं। हमारे द्वारा सिर्फ मॉनिटरिंग की जाती है। वही एसडीएम नर्मदापुरम आशीष पांडे ने बताया कि वे अभी ज्वाइन हुए हैं पूर्व में ही खरीदी केंद्र स्थापित हो चुके हैं हमारे यहां आवेदन संबंधी कोई प्रक्रिया नहीं होती है। जिला आपूर्ती अधिकारी से जानकारी मिल जाएगी या कनिष्ठ आपूर्ति अधिकारी माखननगर से बात कर लीजिए। वही इस मामले में जिला आपूर्ति नियंत्रक द्वारा वास्तविक स्थिति से अवगत नहीं कराया जाना भी सवाल खड़े करता है।
अवगत हो कि सेमरीहरचंद निवासी एवं जयंती सीड्स एंड प्रोसेसिंग वेयरहाउस संचालक रामबाबू अग्रवाल ने पिछले दिनों कलेक्टर से शिकायत कर प्रबंधक मध्यप्रदेश वेयरहाउसिंग कारपोरेशन सेमरीहरचंद एवं कनिष्ठ आपूर्ति अधिकारी माखननगर की मिलीभगत से वैधानिक प्रक्रिया पूर्ण करने के उपरांत भी उनके बेयर हाउस को गेहूं उपार्जन केंद्र नहीं बनाए जाने का गंभीर आरोप लगाया हुआ है। रामबाबू अग्रवाल ने अपनी शिकायत में अवगत कराया कि उनके वेयरहाउस में गेहूं उपार्जन केंद्र निर्धारित करने हेतु आवेदन शाखा प्रबंधक मध्यप्रदेश हाउसिंग लॉजिस्टिक कार्पोरेशन शाखा सेमरी हरचंद एवं एसडीएम नर्मदापुरम सहित जिला खाद्य अधिकारी नर्मदापुरम एवं कलेक्टर नर्मदापुरम को पीएमएस योजना अंतर्गत वेयरहाउस ऑफर कर आवेदन 10 मार्च 2023 को रजिस्टर्ड डाक द्वारा भेजा गया था। जबकि शासन खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग के पत्र क्रमांक 550 दिनांक 06 सितंबर 2022 की कंडिका 13 के अनुसार उस गोदाम पर उपार्जन केंद्र बनाने के लिए प्राथमिकता के आधार पर प्रथम चयन किया जाना है जो पीएमएस में ऑफर की गई हो,परंतु आज दिनांक तक हमारे वेयर हाउस को उक्त योजना में उपार्जन केंद्र नहीं बनाया गया । श्री अग्रवाल ने शिकायत में आरोप लगाया है कि प्रबंधक मध्यप्रदेश वेयरहाउसिंग सेमरी हरचंद एवं कनिष्ठ आपूर्ति अधिकारी माखननगर द्वारा उक्त योजना की अवहेलना करते हुए हमारे वेयरहाउस का निरीक्षण ही नहीं किया गया और ना ही वेयरहाउस पर खरीदी केंद्र बनाने की अनुशंसा जिला स्तरीय उपार्जन समिति को भेजी गई। जिस कारण हमारा वेयरहाउस खाली पड़ा रह गया। जब मेरे द्वारा 28 अप्रैल को वेयरहाउसिंग कार्यालय सेमरीहरचंद में पहुंचकर शाखा प्रबंधक से वेयरहाउस में उपार्जन केंद्र बनाए जाने के पूर्व किए गए निरीक्षण की रिपोर्ट मांगी गई, तो बताया गया कि उक्त रिपोर्ट मेरे कार्यालय में उपलब्ध नहीं है। श्री अग्रवाल ने आरोप लगाया कि उक्त घटना से उनको आर्थिक क्षति पहुंची है। कलेक्टर से उन्होंने निष्पक्ष जांच की मांग की है। श्री अग्रवाल का कहना है कि उनकी वेयर हाउस गोदाम को कार्यपालन यंत्री लोक निर्माण विभाग द्वारा 23 जनवरी 2023 को ही गोदाम उपयोगिता प्रमाण पत्र जारी किया जा चुका है। साथ ही ऑनलाइन आवेदन करने के बाद उनकी आईडी भी जनरेट कर दी गई थी। फिर बड़ा सवाल यह भी है कि जिला आपूर्ति नियंत्रक द्वारा बताया गया कि उक्त वेयरहाउस का निरीक्षण के दौरान उसमें शटर नही होना पाया गया। ऐसे में यह कैसे संभव है कि वेयरहाउस निरीक्षण के बाद आईडी जेनरेट होने के बाद जब शिकायत की गई तो संबंधित प्रबंधक ने वेयरहाउस में पात्रता समिति के आदेश के विपरीत निरीक्षण किया और उक्त समिति के आदेश पर प्रश्नचिंह लगाए। इससे अब संबंधित वेयरहाउस प्रबंधक श्री खातेकर सहित कनिष्ट आपूर्ति अधिकारी की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े होते है?? फिलहाल अब पूरा मामला वरिष्ठ अधिकारियों की जांच में है।
