कटनी (04 मई ) – सरसों की खेती को लाभ का धंधा बनाने के लिए किसानों में जागरूकता और रुचि पैदा करने हेतु कलेक्टर कटनी अवि प्रसाद के प्रयास रंग लाने लगे हैं। कलेक्टर श्री प्रसाद की विशेष रुचि और मार्गदर्शन में किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग के प्रयासों से जिले में सरसों उत्पादन के क्षेत्रफल में करीब 35 फीसदी का इजाफा हुआ है। वहीं बड़ी संख्या में किसानों ने सरसों की खेती को अपनाते हुए अपनी आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाने की दिशा में कदम उठाया है।
12 हजार हेक्टेयर में हुई सरसों की बुवाई
कलेक्टर श्री प्रसाद के विशेष प्रयासों और किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग के द्वारा योजनाओं के सफल संचालन से कटनी जिले में वर्ष 2022-23 में सरसों की बुवाई करीब 12 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में हुई। जबकि बीते वर्षों में यह रकवा महज 9000 हेक्टयर था। इस तरह से सरसों राई की बुवाई जिले में करीब 33 से 35 फीसदी अधिक क्षेत्र में हुई। कलेक्टर श्री प्रसाद के कुशल मार्गदर्शन और निर्देशन में कृषि विभाग द्वारा सरसों राई के उन्नत किस्मों के बीज के वितरण के लिए विशेष कार्यक्रम चलाया गया।
रीठी के किसानों लिए अमृत बनी सरसों की फसल
रीठी क्षेत्र के भ्रमण के दौरान कलेक्टर अवि प्रसाद द्वारा यहां के खेतों का भ्रमण भी किया गया, साथ ही किसानों से उनकी समस्याओं की जानकारी ली गई। किसानों की समस्या का तत्काल निराकरण करने के लिए कलेक्टर श्री प्रसाद द्वारा प्रशासनिक अमले को निर्देशित भी किया गया। साथ ही पानी की कम उपलब्धता और पथरीली भूमि होने के मद्देनजर यहां के किसानों को सरसों की खेती के लिए प्रेरित किया गया। इसका परिणाम यह रहा कि जिले में सर्वाधिक सरसों की बुवाई रीठी विकासखंड में ही हो रही है। उल्लेखनीय है कि रीठी की पठारी और पथरीली भूमि सरसों की खेती के लिए उपयुक्त है। रीठी के किसानों के लिए वर्तमान में सरसों की खेती आर्थिक सक्षमता लाने अमृत का काम कर रही है।
कम लागत में अधिक लाभ से बढ़ा किसानों का रुझान
उल्लेखनीय है कि सरसों की खेती कम लागत वाली खेती है। इसमें पानी और उर्वरक की आवश्यकता भी गेंहू की फसल की तुलना में काफी कम है। जिसकी वजह से किसानों का रुझान सरसों की खेती की तरफ बढ़ा है। सरसों की खेती से शुद्ध लाभ और लागत का अनुपात गेंहू की सिंचित और असिंचित खेती से अधिक होना भी किसानों के लिए फायदेमंद साबित हुआ है। इस लाभ को उन्नत बीजों और तकनीकी के इस्तेमाल से और बढ़ाया जा सकता है। तुलनात्मक अध्ययन पर नजर डालें तो प्रति हेक्टेयर गेंहू सिंचित में शुद्ध लाभ 57625 रुपए और असिंचित में 24125 रुपए है। जबकि सरसों की खेती में यह शुद्ध लाभ 58750 प्रति हेक्टेयर है।
जिले में सरसों के विक्रेता किसानों की संख्या 448
सरसों की खेती को बढ़ावा देने के सुखद परिणाम सामने आने लगे हैं। पहली बार जिले में सरसों की फसल बेचने वाले किसानों की संख्या 448 जा पहुंची है, जबकि सरसों की खेती करने वाले पंजीकृत किसानों की संख्या 4595 है। वर्ष 2023-24 में सरसों की 1548 मैट्रिक टन खरीदी का अनुमान है। जिससे किसानों को 8.44 करोड़ रुपए प्राप्त होंगे। कलेक्टर श्री प्रसाद ने जिले में सरसों की खेती की दिशा में किए जा रहे प्रयासों और सफलता के लिए किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग की समूची टीम को बधाई दी है।
