कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी श्रीमती शीतला पटले द्वारा उप संचालक पशुपालन एवं डेयरी विभाग छिंदवाड़ा के प्रतिवेदन के आधार पर दण्ड प्रक्रिया संहिता 1973 की धारा-144 में प्रदत्त शक्तियों को प्रयोग में लाते हुये जनसामान्य के हित, जानमाल एवं पशुधन की सुरक्षा तथा लोकशान्ति को बनाये रखने के लिये छिंदवाड़ा जिले की सम्पूर्ण सीमा में प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किया गया है । जारी आदेश के अनुसार सम्पूर्ण जिले में पशु मेला, पशु प्रदर्शनी एवं पशु हाट बाजारों, सम्पूर्ण जिला क्षेत्र में पशुओं के परिवहन, अन्य राज्यों, जिलों से छिंदवाड़ा क्षेत्र की सीमा में पशुओं के प्रवेश तथा पशु पालकों द्वारा पशुओं को लावारिस जंगलों, सार्वजनिक स्थलों में पर चराई के लिये एवं सार्वजनिक जलाशयों में पानी पीने के लिये छोड़ने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है । यह आदेश आम जनता को सम्बोधित है चूंकि वर्तमान में ऐसी परिस्थितियां नहीं है, और न ही यह सम्भव है कि इस आदेश की पूर्व सूचना प्रत्येक व्यक्ति को दी जाये । अतः यह आदेश एक पक्षीय पारित किया गया है । इस आदेश का उल्लंघन करने वाले व्यक्ति के विरूध्द भारतीय दण्ड संहिता की धारा-188 के अंतर्गत कार्यवाही की जायेगी । यह आदेश आगामी 23 जून तक लागू रहेगा ।
कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी श्रीमती पटले ने बताया कि उप संचालक पशुपालन एवं डेयरी विभाग छिंदवाड़ा द्वारा अपने प्रतिवेदन में प्रतिवेदित किया गया है कि पशुओं में लम्पी स्किन डिसीज के संक्रमण की रोकथाम के लिये भारत सरकार मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय नई दिल्ली द्वारा जारी दिशा-निर्देशों एवं प्रदेश के सीमावर्ती जिलों में गौ-वंशीय एवं भैस-वंशीय पशुओं में लम्पी स्किन रोग के कारण अनेक गौ-वंश की संक्रमित होने की लगातार सूचना समाचार पत्रों के माध्यम से प्राप्त होने के कारण रोग के संक्रमण का विस्तार जिला छिंदवाड़ा में भी होना संभावित है । लम्पी स्किन डीसीज पशुओं की एक वायरल बीमारी है जो कि पोक्स वायरस के द्वारा पशुओं में फैलती है, इस रोग का प्रसार मच्छर, काटने वाली मक्खी, टिक्स आदि के काटने एवं दूषित चारा व पानी के सेवन से एक पशु से दूसरे पशुओं में होता है । रोग के संक्रमण के नियंत्रण के लिये जिले में प्रतिबंधात्मक निषेधाज्ञा की आवश्यकता को दखते हुये यह प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किया गया है ।
