रिपोर्टर सीमा कैथवास
सिवनी मालवा। जिस प्रकार नर्मदापुरम में कोई भी सरकार आ जाए रेत माफिया पर लगाम नहीं लगा पाती है। ठीक उसी प्रकार शिक्षा माफिया भी जिले में हावी हैं और कारवाई कागजी खानापूर्ति तक ही सीमित है। उसका जीता जागता उदाहरण इस वक्त निजी स्कूलों में अभिभावकों को अपने बच्चों की किताबें लेने के लिए निश्चित और निर्धारित दुकानों पर लेने के लिए मोटी रकम देकर लेने को मजबूर किया जा रहा है । और हर साल निजी स्कूलों द्वारा मनमाफिक फीस बढ़ाई जा रही है लेकिन जिला प्रशासन के जिम्मेदार अधिकारी हो या जिला शिक्षा अधिकारी को उनके रसूख के आगे मौन है। और अभिभावकों को अपने बच्चों की शिक्षा के लिए मजबूरन चुप रहना पड़ रहा है और उनके जेबों पर डकैती चल रही है । आपको बताते हैं कि नर्मदापुरम के सिवनी मालवा तहसील का वाकया सामने आया है और अभिभावकों ने शिकायत भी की है पिछले दिनों फीस बढ़ाने को लेकर पिपरिया के अभिभावकों ने भी शिकायत कलेक्टर की जनसुनवाई में कर अपना दर्द बयां किया था। आपको बता दे कि एनसीईआरटी की पुस्तकें तो हर दुकान में मिल जाती है पर निजी प्रकाशकों की किताबें लेने के लिए निश्चित दुकान पर आना पड़ता है। प्रदेश सरकार हो या केंद्र सरकार शिक्षा पर हो रही लूट पर किसी का ध्यान नहीं है। इस क्षेत्र में निजी स्कूलों द्वारा जनता से खुली लूट हो रही है कोई भी सरकार इस तरफ ध्यान नहीं दे रही। शिक्षा का स्तर और वहां इस प्रकार से लूट मची है कोई देखने वाला नहीं है। स्कूल और निजी प्रकाशकों की दादागिरी पर प्रशासन भी चुप है और अभिभावकों के हित के लिए कुछ नहीं कर पा रहा । देश भर में प्रशासन ने निर्देश जारी किए हैं कि सभी स्कूलों में एनसीईआरटी की पुस्तकें पढ़ाई जाएंगे पर कोई भी निजी स्कूल इसका पालन नहीं कर रहा ,अब अपनी मर्जी से प्राइवेट पब्लिशर की किताबों की सूची अभिभावकों को थमा रहे हैं । अभिभावक भी बच्चों के भविष्य को लेकर ज्यादा विरोध नहीं कर पाते एनसीईआरटी की किताबों में पुस्तक विक्रेताओं को कम कमीशन मिलता है जबकि अन्य प्रकाशकों की पुस्तकों से ज्यादा कमीशन मिलता हैं। स्कूलों द्वारा तय निजी प्रकाशकों की किताबें एनसीईआरटी की किताबों से 5 गुना तक महंगी है। निजी स्कूलों में कमीशन के चक्कर में हर साल पाठ्यक्रम में बदलने के साथ अलग-अलग प्रकाशकों की महंगी किताबें चलाई जाती है। अभिभावक भी बच्चों के भविष्य को लेकर ज्यादा विरोध नहीं कर पाते । छोटे-छोटे बच्चों की चुनिंदा किताबें लेना अब अभिभावकों की मजबूरी बन गई है। निजी स्कूलों की मनमानी से माता-पिता परेशान हैं सरकार, जनप्रतिनिधि, प्रशासन को इस ओर ध्यान देना चाहिए। और आवश्यकता है कि एनसीईआरटी की किताबों का स्कूलों में अधिकाधिक प्रयोग हो ताकि विद्यार्थियों के माता-पिता पर अनावश्यक आर्थिक बौझ ना पड़े । सिवनी मालवा में भारती किसान यूनियन के प्रदेश उपाध्यक्ष गुर्जर संतोष पटवारे ने जिला शिक्षा अधिकारी नर्मदापुरम को लिखित शिकायत की है। शिकायत में उन्होंने लिखा है कि निजी स्कूल संचालकों द्वारा पुस्तकों एवं ड्रेस के नाम पर पालकों से की जा रही लूट को रोके जाने बाबत उन्होंने शिकायत में लिखा कि निजी स्कूलों द्वारा चयनित पुस्तकों को स्वयं के माध्यम से या निजी दुकानदारों के माध्यम से विक्री कराया जा रहा है जिसमें कक्षा नर्सरी से कक्षा पांचवी तक की किताबें 2 हजार रुपए से ₹5000 तक की बेची जा रही हैं जिसमें भारी कमीशन स्कूल संचालकों को मिल रहा है। जिसका पक्का बिल भी नहीं दिया जा रहा अतः महोदय जी से निवेदन है कि ऐसे स्कूल संचालकों पर नियमानुसार कार्रवाई की जाए और पालको के साथ हो रही लूट को रोका जाए। प्रतिलिपि अनुविभागीय अधिकारी राजस्व सिवनी मालवा एवं किड्स वैली अकैडमी सिवनी मालवा को दी है।
