खनन प्रभावित क्षेत्रों और वहां रहने वाले लोगों के विकास को अधिक व्यवस्थित, जरूरत आधारित और परिणाममुखी बनाने की दिशा में जिला खनिज प्रतिष्ठान (डीएमएफ) कटनी ने महत्वपूर्ण पहल शुरू की है। जिला खनिज प्रतिष्ठान संशोधित नियम-2026 के प्रावधानों के अनुरूप अब खनन प्रभावित ग्रामों में ग्रामवार बेसलाइन सर्वे कराया जाएगा। सर्वेक्षण से सामने आने वाली वास्तविक जरूरतों के आधार पर जिले में पांच वर्षीय भावी योजना के साथ वार्षिक कार्ययोजना तैयार की जाएगी।
इसी संबंध में 24 अगस्त को टीएल बैठक के पश्चात कलेक्टर एवं जिला खनिज प्रतिष्ठान की कार्यपालिका समिति के अध्यक्ष श्री आशीष तिवारी की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में कार्यपालिका समिति एवं संबंधित विभागों के अधिकारियों की बैठक आयोजित हुई। बैठक में खनन प्रभावित क्षेत्रों में उपलब्ध सुविधाओं, विकास की आवश्यकताओं तथा डीएमएफ की राशि के प्रभावी उपयोग को लेकर विस्तार से चर्चा की गई।
जरूरत जहां, विकास की प्राथमिकता वहां
बैठक में बताया गया कि डीएमएफ की राशि का उपयोग खनन प्रभावित व्यक्तियों और क्षेत्रों के विकास के लिए निर्धारित प्राथमिकताओं के अनुरूप किया जाएगा। उच्च प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में 70 प्रतिशत राशि का उपयोग पेयजल आपूर्ति, महिला एवं बाल कल्याण, स्वास्थ्य, स्वच्छता, कृषि, आवास, शिक्षा, वृद्ध एवं दिव्यांगजन कल्याण, पशुपालन, पर्यावरण संरक्षण एवं प्रदूषण नियंत्रण, कौशल विकास तथा आजीविका सृजन जैसे कार्यों में किया जाएगा।
वहीं अन्य प्राथमिकता के अंतर्गत 30 प्रतिशत राशि से भौतिक अवसंरचना, सिंचाई, ऊर्जा और वाटरशेड विकास से संबंधित कार्यों की कार्ययोजना तैयार की जाएगी।
इस तरह डीएमएफ की राशि का उपयोग केवल सामान्य विकास कार्यों तक सीमित न रहकर स्थानीय जरूरत और प्राथमिकता के आधार पर खनन प्रभावित क्षेत्रों के समग्र विकास के लिए किया जाएगा।
गांव से शुरू होगी विकास की योजना
बैठक में जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी द्वारा बेसलाइन सर्वे के लिए निर्धारित प्रारूप को प्रेजेंटेशन के माध्यम से विस्तार से समझाया गया। बेसलाइन सर्वे में ग्राम स्तर पर गठित समिति द्वारा प्रत्येक गांव में उपलब्ध सुविधाओं और आवश्यकताओं का वास्तविक आकलन किया जाएगा। इसके आधार पर विभागवार एवं ग्रामवार प्रपत्र तैयार कर विकासखंड स्तरीय समिति के समक्ष प्रस्तुत किए जाएंगे।
विकासखंड स्तरीय समिति ग्रामों से प्राप्त जानकारी का परीक्षण कर अपने अभिमत सहित विकासखंड स्तरीय सर्वे रिपोर्ट जिले को सौंपेगी। इसी रिपोर्ट को आधार बनाकर पांच वर्षीय भावी योजना और प्रत्येक वर्ष की वार्षिक कार्ययोजना तैयार की जाएगी।
इस व्यवस्था से खनन प्रभावित क्षेत्रों में विकास कार्यों का चयन स्थानीय आवश्यकताओं के वैज्ञानिक आकलन के आधार पर किया जा सकेगा और डीएमएफ निधि का अधिक प्रभावी एवं पारदर्शी उपयोग सुनिश्चित होगा।
समय-सीमा में पूरा करें सर्वे कार्य
कलेक्टर श्री आशीष तिवारी ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि बेसलाइन सर्वे की पूरी प्रक्रिया निर्धारित समय-सीमा में गुणवत्तापूर्ण ढंग से पूर्ण की जाए। उन्होंने ग्राम स्तर से प्राप्त होने वाली जानकारी को वास्तविक स्थिति पर आधारित रखने तथा संबंधित विभागों के अधिकारियों के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित करने के निर्देश दिए, ताकि खनन प्रभावित क्षेत्रों की वास्तविक आवश्यकताओं के अनुरूप प्रभावी विकास योजना तैयार की जा सके।
बैठक में वन मंडलाधिकारी, मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत, उप संचालक किसान कल्याण एवं कृषि, लोक निर्माण, जल संसाधन, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, ग्रामीण यांत्रिकी सेवा, अग्रणी जिला प्रबंधक सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे। नगर निगम, स्वास्थ्य, शिक्षा, महिला एवं बाल विकास, मत्स्य, आयुष, सामाजिक न्याय, पशुपालन, उद्यानिकी, आदिम जाति कल्याण, खेल, आईटीआई, प्रदूषण नियंत्रण मंडल सहित अन्य विभागों के अधिकारियों ने भी बैठक में सहभागिता की।
खनिज विभाग की ओर से उप संचालक खनिज प्रशासन श्री रत्नेश दीक्षित, जिला समन्वयक श्री प्रशांत सोनवाने, लेखापाल श्री मोहम्मद रजा एवं कम्प्यूटर ऑपरेटर श्री अवधेश दाहिया उपस्थित रहे।


