योगेश गजभिये पांढुरना*.गुरु पूर्णिमा उत्सव के अवसर पर श्री धुनिवाले दादाजी महाराज की नगरी खंडवा तक दादा धाम एक्सप्रेस ट्रेन पुनः प्रारंभ कराने की मांग को लेकर 17 जुलाई से पांढुर्णा से निकली नंगे पांव निशान पदयात्रा लगातार आगे बढ़ रही है। यह यात्रा लगभग 360 किलोमीटर की दूरी तय कर खंडवा स्थित परमहंस श्री धुनिवाले दादाजी महाराज की समाधि पर पहुंचकर ट्रेन पुनः शुरू कराने की अर्जी गुरु चरणों में समर्पित करेगी।
गुरु पूर्णिमा के अवसर पर देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु श्री धुनिवाले दादाजी महाराज के दर्शन एवं महाआरती में शामिल होने खंडवा पहुंचते हैं। जिला पांढुर्णा में भी दादाजी महाराज के प्रति श्रद्धालुओं की गहरी आस्था है और बड़ी संख्या में भक्त वर्षों से गुरु पूर्णिमा पर खंडवा धाम पहुंचते रहे हैं।
श्रद्धालुओं के अनुसार, जब खंडवा एवं नागपुर तत्कालीन सीपी एंड बेरार क्षेत्र में आते थे, तब दरबार से जुड़े एक न्यायिक प्रकरण के दौरान छोटे हरीहर भोले भगवान दादाजी नागपुर गए थे। वहां न्यायालयीन कार्यवाही दरबार के पक्ष में होने के बाद वापसी के समय वे पांढुर्णा भी पधारे थे, जहां उन्होंने स्वर्गीय धोडीराज धर्माधिकारी के निवास पर हवन-पूजन किया था। इस कारण पांढुर्णा और दादाजी दरबार का विशेष आध्यात्मिक संबंध माना जाता है।
कोरोना काल में भारत सरकार द्वारा दादा धाम एक्सप्रेस बंद किए जाने के बाद से श्रद्धालु लगातार इसके पुनः संचालन की मांग कर रहे हैं। इसके लिए आवेदन, धरना, अनशन एवं भूख हड़ताल जैसे आंदोलन भी किए जा चुके हैं। लोकसभा चुनाव के दौरान भाजपा प्रत्याशी श्री बंटी विवेक साहू ने भी अपने चुनावी संकल्प पत्र में दादा धाम एक्सप्रेस पुनः शुरू कराने का वादा किया था, लेकिन वर्षों बाद भी ट्रेन का संचालन प्रारंभ नहीं हो सका।
इसी मांग को लेकर श्रद्धालुओं ने दादाजी महाराज के चरणों में अर्जी पहुंचाने का संकल्प लिया और 17 जुलाई को पांढुर्णा से मनोज गुडधे के नेतृत्व में निशान पदयात्रा का शुभारंभ किया। यात्रा दादाजी दरबार टपरिया एवं शिव पंचायत श्री दादाजी दरबार से पूजा-अर्चना के बाद रवाना हुई।
यात्रा के प्रथम दिन लगभग 38 किलोमीटर की दूरी तय कर मुलताई स्थित ताप्ती उद्गम स्थल पहुंची। दूसरे दिन ताप्ती माता के दर्शन कर लगभग 30 किलोमीटर चलकर आमला पंखा में पड़ाव किया गया। तीसरे दिन 28 किलोमीटर की यात्रा कर भडूस पहुंचे। चौथे दिन 32 किलोमीटर चलकर गोनिघाट हनुमान मंदिर में रात्रि विश्राम किया गया। पांचवें दिन 27 किलोमीटर की पदयात्रा कर जत्था नांदा पहुंचा तथा छठवें दिन 21 किलोमीटर की यात्रा के बाद देसली ग्राम में विश्राम किया गया। इसके बाद यात्रा लगभग 200 किलोमीटर की दूरी तय कर प्रसिद्ध काली घोड़ी मंदिर पहुंची, जहां से खंडवा धाम लगभग 90 किलोमीटर की दूरी शेष है, खंडवा धाम मार्ग की सड़क अत्यंत खराब होने के कारण भक्तो को नंगे पांव धूम बरसाद के साथ जर्जर सड़क का सामना करने के बाद भी भक्तो का जुनून ” भजलो दादाजी का नाम भजलो हरीहर जी का नाम” लेते हुए,भक्त दादा धाम एक्सप्रेस की अर्जी लेकर विशेष निशान यात्रा के साथ गुरु के चरणों मे निशान समर्पित कर पूजा-अर्चना के साथ दादा धाम एक्सप्रेस की अर्जी पेश करेंगे।
यात्रा के दौरान श्रद्धालु प्रतिदिन स्वयं भोजन तैयार कर भंडारा आयोजित कर रहे हैं। प्रत्येक पड़ाव पर भव्य आरती, भजन-कीर्तन एवं गुरु वंदना के साथ वातावरण भक्तिमय बना हुआ है। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार 27 जुलाई को श्रद्धालु खंडवा रेलवे स्टेशन के समीप पार्वतीबाई धर्मशाला में विश्राम करेंगे। इसके पश्चात बैंड-बाजे, नगाड़ों, झांझ एवं गुलाल के साथ श्री बड़े दादाजी महाराज एवं हरीहर भोले भगवान की समाधि पर निशान अर्पित कर दादा धाम एक्सप्रेस पुनः प्रारंभ कराने की अर्जी गुरु चरणों में समर्पित करेंगे।
निशान पदयात्रा में शामिल श्रद्धालु :-
नर्मदा परिक्रमा वासी शंकर महाराज, बालू मामा पराड़कर, मनोज गुडधे, गोलू ठाकुर, शशिकांत आंबुलकर, उमेश बरगट, विवेक चौतरे, जितु तिड़के, मयंक पराड़कर, शांतनु जुननकर, हितेश केंवटे, सचिन टेटे, गौरव वानखड़े, शुभम खरवड़े, आशु आखरे, रवि खोड़े, चेतन हेडाऊ, कुणाल पालीवाल, मनोज निनावे, जितेंद्र गिरडकर, हरि महाराज अंधारे, संदीप ढहारे एवं टिंकू बोबडे सहित अनेक श्रद्धालु शामिल हैं।


