*योगेश गजभिये पांढुरना*.शिक्षाविद् श्री सोनम वांगचुक के लोकतांत्रिक आंदोलन के समर्थन में संविधान जागरूक अभियान के लोगों ने राष्ट्रपति के नाम एसडीएम को ज्ञापन सौंपकर कहा कि हम ‘संविधान जागरूकता अभियान, पांढुर्णा’ के माध्यम से राष्ट्र के एक सजग प्रहरी और शिक्षाविद् श्री सोनम वांगचुक के साथ किए गए व्यवहार पर गहरी
पीड़ा और आक्रोश व्यक्त करते हैं। एक ऐसे व्यक्ति, जिसने अपना पूरा जीवन राष्ट्र निर्माण और शिक्षा सुधार के लिए समर्पित किया, उन्हें जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण आंदोलन के दौरान पुलिस बल द्वारा हटाकर अस्पताल ले जाना, न केवल उनके मौलिक अधिकारों का हनन है, बल्कि यह उन लोकतांत्रिक मूल्यों पर भी प्रहार है जिस पर हमारे महान राष्ट्र की नींव टिकी है।
भारतीय संविधान का अनुच्छेद 19 प्रत्येक नागरिक को शांतिपूर्ण विरोध और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता प्रदान करता है। जब एक देश का प्रबुद्ध नागरिक अपनी सरकार से शिक्षा प्रणाली में सुधार और जनहित की मांग करता है, तो उसे ‘दमनात्मक कार्रवाई’ के बजाय ‘संवाद’ की मेज पर बुलाया जाना चाहिए। अतः, हम महामहिम से निम्नलिखित हस्तक्षेप की पुरजोर मांग करते हैं जिसमें तत्काल और सार्थक संवाद, श्री सोनम वांगचुक द्वारा उठाए गए शिक्षा सुधार और पर्यावरण सुरक्षा से जुड़े मुद्दों को राष्ट्रीय प्राथमिकता मानते हुए, केंद्र सरकार तत्काल उच्च-स्तरीय सार्थक संवाद स्थापित करे, लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा, शांतिपूर्ण आंदोलनकारियों के प्रति बल प्रयोग और दमन की नीति को तत्काल बंद किया जाए। राज्य का कार्य नागरिक की आवाज को दबाना नहीं, बल्कि उसे सुनना है, संविधान की सर्वोच्चता, यह सुनिश्चित किया जाए कि प्रशासनिक एजेंसिया संविधान के दायरे में रहकर कार्य करें। असहमति को देशद्रोह या कानून-व्यवस्था की समस्या के रूप में देखना लोकतांत्रिक गरिमा के विरुद्ध है, छात्रों के भविष्य की सुरक्षा, शिक्षा व्यवस्था में व्याप्त अनिश्चितताओं को दूर करने के लिए सभी हितधारकों (विशेषकर शिक्षाविदों और विद्यार्थियों) के साथ मिलकर एक पारदर्शी कार्ययोजना तैयार की जाएं।
ज्ञापन सौंपने पर भीमराव वालके,राहुल पठाड़े, कीर्ति पठा़डे, देवांग पाठे, ताहिर पटेल पोर्णिमा गोंडे़,चंदा देशभ्रतार, नितिन देवड़ा सहित अन्य मौजूद रहे।


