पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने पंचायत सचिवों के स्थानांतरण को लेकर नई गाइडलाइन जारी कर दी है। नई नीति के तहत अब कोई भी पंचायत सचिव अपने गृह ग्राम या ससुराल की ग्राम पंचायत में पदस्थ नहीं रह सकेगा। इसके अलावा जिस पंचायत में सचिव का रिश्तेदार सरपंच या उपसरपंच चुना जाएगा, वहां से भी सचिव का तबादला किया जाएगा।
विभाग द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार एक ही ग्राम पंचायत में 10 वर्ष या उससे अधिक समय से पदस्थ सचिवों को प्राथमिकता के आधार पर स्थानांतरित किया जाएगा। प्रदेश में 24 हजार से अधिक पंचायत सचिव कार्यरत हैं और नई व्यवस्था का असर बड़ी संख्या में सचिवों पर पड़ सकता है।
विभाग ने सभी कलेक्टरों और जिला पंचायत सीईओ को तय समय-सीमा में स्थानांतरण प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए हैं। नई नीति के तहत 15 जून तक जिले के भीतर पंचायत सचिवों के तबादले किए जा सकेंगे। स्थानांतरण प्रस्ताव कलेक्टर की अनुशंसा और प्रभारी मंत्री की स्वीकृति के बाद जारी किए जाएंगे, जबकि आदेश जिला पंचायत सीईओ द्वारा जारी होंगे।
*इन परिस्थितियों में तबादला होगा अनिवार्य*
नई गाइडलाइन में कुछ परिस्थितियों में स्थानांतरण को अनिवार्य किया गया है। इनमें सचिव का रिश्तेदार सरपंच या उपसरपंच चुना जाना, गृह ग्राम या ससुराल की पंचायत में पदस्थ होना तथा एक ही पंचायत में 10 वर्ष या उससे अधिक समय तक कार्यरत रहना शामिल है।
*प्रतिबंध अवधि में भी हो सकेंगे तबादले*
विभाग ने स्पष्ट किया है कि स्थानांतरण प्रतिबंध अवधि के दौरान भी विशेष परिस्थितियों में सचिवों का तबादला किया जा सकेगा। भ्रष्टाचार, वित्तीय अनियमितता, गंभीर शिकायतों, अनुशासनात्मक कार्रवाई लंबित होने अथवा लोकायुक्त, ईओडब्ल्यू और अन्य जांच एजेंसियों से जुड़े मामलों में शासन स्तर से स्वीकृति मिलने पर स्थानांतरण किए जा सकेंगे।
*अंतरजिला संविलियन की भी व्यवस्था*
नई नीति में अंतरजिला संविलियन (ट्रांसफर) को स्वैच्छिक आधार पर अनुमति दी गई है। विवाहित, विधवा और तलाकशुदा महिला पंचायत सचिव अपने पति, ससुराल या माता-पिता के निवास वाले जिले में संविलियन के लिए आवेदन कर सकेंगी। वहीं अनुकंपा नियुक्ति प्राप्त सचिवों को भी अपने मूल जिले में संविलियन का अवसर मिलेगा।
विभाग का कहना है कि नई व्यवस्था का उद्देश्य पंचायतों में पारदर्शिता बढ़ाना, हितों के टकराव को रोकना और प्रशासनिक कार्यप्रणाली को अधिक प्रभावी बनाना है।


