कटनी रेलवे स्टेशन पर रोके गए 165 बच्चों को आखिरकार रिहा कर दिया गया। सभी बच्चों को स्पेशल ट्रेन में दो कोच लगाकर उनके गंतव्य के लिए रवाना किया गया। विदाई के दौरान भावुक माहौल देखने को मिला।
जानकारी के अनुसार, ये बच्चे बिहार के अररिया और पटना से महाराष्ट्र के लातूर और नांदेड़ स्थित मदरसों में पढ़ाई के लिए जा रहे थे। 11 अप्रैल को कटनी स्टेशन पर GRPF, RPF और CWC ने मानव तस्करी के शक के आधार पर इन्हें डिटेन किया था।
इस पूरे मामले पर जमीयत उलेमा-ए-हिंद से जुड़े सदस्य अब्दुल कादिर खान (जबलपुर) ने कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि बच्चों के पास सभी जरूरी दस्तावेज मौजूद थे, इसके बावजूद बिना ठोस सबूत के उन्हें रोका गया, जो गैर-जिम्मेदाराना और असंवैधानिक है।
उन्होंने यह भी बताया कि इस मामले में
भोपाल के सदर मौलाना मुफ्ती मोहम्मद अहमद खान
जबलपुर के सदर मौलाना इकबाल साहब
ने भी जांच और कार्रवाई की मांग की है।
अब्दुल कादिर खान ने इसे मदरसों जैसे शैक्षणिक संस्थानों पर हमला बताते हुए बिहार के DGP और CMO कार्यालय को भी पत्र भेजा है। अधिकारियों द्वारा कार्रवाई का आश्वासन मिलने की बात कही गई है।
वहीं, इस दौरान स्थानीय समाजसेवियों और संगठनों ने बच्चों की देखभाल में सहयोग किया। विदाई के समय नाश्ता और अन्य सामग्री की व्यवस्था कर बच्चों को रवाना किया गया।
हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम में पुलिस और प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि वरिष्ठ अधिकारी स्पष्ट जवाब देने से बचते नजर आए।
अब्दुल कादिर खान ने कहा कि इस मामले को जल्द ही अदालत में भी उठाया जाएगा, ताकि जिम्मेदारी तय हो सके और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।


